स्वामी हरिदास व रसिया सम्राट को उप्र संस्कृति विभाग ने भुलाया

मथुरा। संस्कृति विभाग के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी द्वारा सुप्रसिद्ध ठुमरी गायिका गिरिजा देवी की स्मृति में समारोह आयोजित किए जाने का प्रस्ताव द‍िया गया है जिस पर 65 लाख रुपये व्यय का प्रावधान किया गया है।

उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया ने कहा है कि यह एक स्तुत्य प्रयास है किन्तु संस्कृति विभाग द्वारा ध्रुपद सम्राट स्वामी हरिदास और रसिया सम्राट स्वामी मेघश्याम शर्मा तथा घासीराम के अतुलनीय योगदान को विस्मृत न कर उनकी स्मृति में अति भव्य समारोहों का आयोजन करना भी न्यायोचित होगा।

उन्होंने कहा है कि स्वामी हरिदास सन्त ही नहीं महान संगीतज्ञ भी थे। सम्राट अकबर उनका गायन सुनने के लिए छद्म वेष में तानसेन का तानपूरा उठाकर लाये थे।

मोहन स्वरूप भाटिया ने कहा है कि स्वामी मेघश्याम शर्मा ने हजारों रसिया लिखे हैं और वह सुमधुर गायक भी थे। रासलीला की अधिकांश मण्डलियाँ उनके द्वारा रचित ‘आरती कुंज विहारी की, गिरिधर कृष्ण मुरारी की‘ से लीला प्रारम्भ करती हैं तथा ‘‘मैया करि दै मेरौ ब्याहु मँगाइ दै दुल्हँन गोरी सी आदि अनेकानेक रसिया देष के हर प्रदेष में लोकप्रिय हैं।

उन्होंने आगे कहा है कि गोवर्धन के घासीराम के रसिया ‘श्यामा-श्याम सलोनी सूरत कौ सिंगार बसन्ती है’ आदि आज भी ब्रज के गाँव – गाँव, घर-घर में गाये जाते हैं और अत्यन्त लोकप्रिय रहे हैं। ब्रज क्षेत्र में अनेक रससिद्ध संगीतज्ञ कलाकार, साहित्यकार तथा कवि हैं जिनकी की जा रही निरन्तर उपेक्षा न्यायोचित नहीं है। भाट‍िया ने अपेक्षा की है क‍ि प्रदेश सरकार में दो मंत्री व विधायक इस संबंध में प्रयास करेंगे।

– Legend News

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