यदि आप Jio फाइबर के “फ्रॉड” से बचना चाहते हैं, या उसके “शिकार” हो चुके हैं… तो ये खबर आपके लिए है

दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार रिलायंस इंडस्‍ट्री के मालिक मुकेश धीरूभाई अंबानी की संपत्ति महामारी के दौरान भी तेजी के साथ कैसे बढ़ती गई, यदि आप इस प्रश्‍न का जवाब चाहते हैं तो आपको Jio फाइबर द्वारा करोड़ों लोगों से किए जा रहे उस तकनीकी फ्रॉड को जानना होगा जिससे सामान्‍यत: आम आदमी तो क्‍या, विशेषज्ञ भी आसानी से नहीं पकड़ सकते।
इस तकनीकी फ्रॉड की शुरूआत वहीं से हो जाती है, जहां से आप Jio फाइबर के आकर्षक प्‍लान और बढ़-चढ़कर पेश किए गए सबसे तेज इंटरनेट स्‍पीड मुहैया कराने के दावों की ओर आकर्षित होते हैं।
पहले बात जाल में फंसाने वाले Jio फाइबर के प्‍लान की
चूंकि महामारी के इस दौर में वर्क फ्रॉम होम तथा ऑनलाइन स्‍टडी ने इंटरनेट को लगभग हर घर के लिए जरूरी बना दिया है तो Jio फाइबर सहित तमाम इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों की चांदी हो गई है और सबने अपने-अपने आकर्षक प्‍लान पेश कर रखे हैं।
Jio फाइबर के प्‍लान पर गौर करें तो वह 30 Mbps से लेकर 1 Gbps तक की स्‍पीड मुहैया करने का दावा करता है और उसी के अनुसार उसका टैरिफ 399 रुपए से लेकर 8499 रुपए प्रति माह तक जाता है, जिसमें 18% GST का भुगतान कंज्‍यूमर को अलग से करना होता है। कनेक्‍शन लेते वक्‍त हर प्‍लान की डिपॉजिट राशि भी अलग-अलग है।
सामान्‍य तौर पर इसमें कुछ गलत नजर नहीं आता किंतु गौर करेंगे तो पता लगेगा कि 30 Mbps वाले प्‍लान के अतिरिक्‍त दूसरे किसी प्लान में कंज्‍यूमर को नेट की वो स्‍पीड नहीं मिलती, जिसके लिए कि Jio फाइबर ने आपसे पैसा लिया है और उसी के अनुरूप एडवांस डिपॉजिट कराया है।
ऐसा इसलिए कि अधिकांश घरों में लेटेस्‍ट टेक्‍नोलॉजी वाले वो इलेक्‍ट्रॉनिक गैजेट्स होते ही नहीं जो 30 Mbps से अधिक की स्‍पीड को सपोर्ट कर सकें।
मोबाइल फोन हो या लैपटॉप…अथवा टीवी ही क्‍यों न हो, Jio फाइबर के हाईस्‍पीड प्‍लान को लेटेस्‍ट टेक्‍नोलॉजी वाले इलेक्‍ट्रॉनिक गैजेट्स ही सपोर्ट करते हैं।
यहां यह जान लेना जरूरी है कि Jio फाइबर के प्‍लान में इंटरनेट के साथ-साथ कंज्‍यूमर टीवी और एक फिक्‍स्‍ड फोन नंबर का भी उपयोग कर सकता है बशर्ते उसके इलेक्‍ट्रॉनिक गैजेट्स Jio फाइबर को सपोर्ट करते हों।
कायदे से देखा जाए तो कौन से इलेक्‍ट्रॉनिक गैजेट्स Jio फाइबर के किस प्‍लान को सपोर्ट करेंगे, यह जानकारी देना Jio फाइबर का काम है लेकिन वह ऐसा कुछ नहीं करता।
हां, यदि कंज्‍यूमर को Jio फाइबर का दावा सच साबित करना है तो पहले उसे कंपनी के मुताबिक इलेक्‍ट्रॉनिक गैजेट्स खरीदने होंगे अन्‍यथा Jio की टीम स्‍पीड न मिल पाने का जिम्‍मा कंज्‍यूमर के सिर फोड़कर अपना धंधा करती रहेगी।
हर महीने तय डेट पर कंज्‍यूमर यदि अपना प्‍लान रिचार्ज नहीं कराता तो एक मिनट भी कंपनी आपको सर्विस उपयोग का मौका नहीं देगी क्‍योंकि उसका स्‍विच उसके पास है। वह तत्‍काल सर्विस स्‍विच ऑफ कर देगी।
इस बीच यदि आपकी सर्विस किसी फॉल्‍ट के कारण बंद हो गई तो भी बिना यह देखे कि फॉल्‍ट कंपनी की ओर से हुआ है, कंज्‍यूमर की सर्विस तय समय तक ही जारी रहेगी।
कुल मिलाकर गलती चाहे कंपनी की ही क्‍यों न हो, परंतु कंज्‍यूमर की सर्विस में हुई कटौती के लिए उसे कोई राहत नहीं दी जा सकती।
मान लें कि आपको किसी कारणवश महीने में चार दिन सर्विस नहीं मिल सकी तो आपके चार दिन का पैसा कंपनी एडजस्‍ट नहीं करेगी। वो आपको ही भुगतना होगा।
इस तरह कंपनी करोड़ों कंज्‍यूमर्स से अरबों रुपया प्रति माह सिर्फ इस तरह फ्रॉड करके वसूल रही है क्‍योंकि कंज्‍यूमर के लिए भले ही वह रकम मामूली हो परंतु यदि उसे करोड़ों उपभोक्‍ताओं से मल्टीप्‍लाई करें तो रकम का पहाड़ खड़ा हो जाता है, और यही इन बड़ी कंपनियों के फ्रॉड गेम का मूल मंत्र है।
कंप्लेंट अटेंड कब होगी, Jio फाइबर की कोई जिम्‍मेदारी नहीं
कंज्‍यूमर बेशक पूरे महीने निर्बाध सर्विस का भुगतान करता हो किंतु यदि कोई कंप्लेंट है तो Jio फाइबर उसे किसी निर्धारित समय में हल कराने की कोई गांरटी नहीं देती। टोल फ्री नंबर पर कंप्लेंट किए जाते वक्‍त कंज्‍यूमर को अगले 24 घंटों में कंप्लेंट अटेंड करने की बात कही जाती है किंतु ये 24 घंटे मिनिमम हैं या मैक्सिमम, ये बताने वाला कोई नहीं।
जिन पर बताने की जिम्‍मेदारी है वो सरकारी अफसरों सा व्‍यवहार करें तो चौंकिये मत, क्‍योंकि वो आपको कनेक्‍शन ‘बेच’ चुके हैं।
इन हालातों में आपको बिना नेट कनेक्‍शन के कितने घंटे या कितने दिन गुजारने होंगे तथा कितना आर्थिक नुकसान और कितना मानसिक उत्‍पीड़न सहना होगा, कहना मुश्‍किल है।
Jio फाइबर के लिए कंज्‍यूमर के समय और पैसे का कोई मूल्‍य नहीं क्‍योंकि एकबार उसके जाल में फंसने के बाद कंज्‍यूमर उसके अधीन हो जाता है, वो कंज्‍यूमर के अधीन नहीं।
संभवत: यही कारण है कि कनेक्‍शन बेचने के बाद Jio फाइबर का अदना सा अदना कर्मचारी भी कंज्‍यूमर को तरजीह देना तो दूर, उसके साथ अभद्र व्‍यवहार करने से भी परहेज नहीं करता क्‍योंकि वो जानता है कि कंज्‍यूमर अब उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
उसके द्वारा डिपॉजिट किया हुआ पैसा हो या मनमाने तरीके से सर्विस स्‍विच ऑफ करने की व्‍यवस्‍था, सब उसके हाथ में है।
कंज्‍यूमर के हाथ में यदि कुछ है तो केवल और केवल पछतावा, क्‍योंकि कंज्‍यूमर को मजबूर करके उसके साथ फ्रॉड करने की यह पॉलिसी सिर्फ Jio फाइबर की ही नहीं है, उन सभी नेट प्रोवाइडर कंपनियों की भी है जो दावे तो बड़े-बड़े करती हैं लेकिन मकसद मात्र किसी भी तरह बेवकूफ बनाकर लोगों की जेब काटना ही होता है।
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी

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