हिंदू समुदाय अल्‍पसंख्‍यक हुआ तो संविधान, धर्मनिरपेक्षता और कानून कुछ नहीं बचेगा

गांधीनगर। गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा है कि संविधान, धर्मनिरपेक्षता और कानून की बात तब तक चलेगी जब तक देश में हिंदू बहुसंख्यक हैं। हिंदू समुदाय के अल्पसंख्यक हो जाने के बाद कुछ भी नहीं बचेगा। उनके इस बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया है।
नितिन पटेल गांधीनगर के सेक्टर 7-ए में भारत माता मंदिर की स्थापना पर पहुंचे थे। यह गुजरात का पहला भारत माता का मंदिर है। भारत माता की मूर्ति, पृष्ठभूमि में भारत के नक्शे के साथ एक शेर पर बैठी देवी और एक भगवा झंडा पकड़े हुए है।
भारत माता के मंदिर की स्थापना पर दिया बयान
विश्व हिंदू परिषद ने यह मूर्ति स्थापित करवाई है। यहां पर बोलते हुए नितिन पटेल ने कहा, ‘हमारे देश में संविधान, धर्मनिरपेक्षता के बारे में बात की जाती है लेकिन मैं आपको बता दूं… ये वीडियो रिकॉर्ड करना चाहते हैं तो कर लें। मेरे शब्दों को नोट कर लें…जो भी लोग संविधान, धर्म निरपेक्षता और कानून की बात करते हैं, वो जान लें कि ऐसा तब तक ही है, जब तक देश में हिंदू बहुसंख्यक है। जिस दिन हिंदू अल्पसंख्यक होगा और दूसरों की जनसंख्या बढ़ने लगेगी, उसके बाद ना धर्मनिरपेक्षता बचेगी…ना लोकसभा और ना संविधान बचेगा…सब कुछ हवा में उड़ा दिया जाएगा। सब दफन कर दिया जाएगा। कुछ भी नहीं बचेगा।’
‘हजारों मुसलमान भी देशभक्त’
डेप्युटी सीएम ने कहा, ‘मैं सभी के बारे में बात नहीं कर रहा हूं। मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि लाखों मुसलमान देशभक्त हैं, लाखों ईसाई देशभक्त हैं। गुजरात पुलिस बल में हजारों मुसलमान हैं। वे सभी देशभक्त हैं।’
हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ जाएंगे सुप्रीम कोर्ट
गुजरात के उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हाई कोर्ट ने पिछले सप्ताह धर्म परिवर्तन के खिलाफ विवादास्पद कानून की कुछ धाराओं, जिनमें मूल प्रवाधान भी शामिल हैं, पर रोक लगाई गई है। राज्य सरकार इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी। उन्होंने कहा कि गुजरात हाई कोर्ट ने अन्य धाराओं समेत धारा 5 के उपयोग पर रोक लगा दी थी, जो मुख्य रूप से शादी के माध्यम से धर्मांतरण से संबंधित हैं। वहीं, राज्य की भाजपा सरकार के अनुसार यही धारा पूरे अधिनियम का ‘मूल’ है और इस पर रोक से पूरा कानून प्रभावित होता है।
असामाजिक तत्वों से बेटियों को बचाने के लिए कानून
नितिन पटेल ने कहा गुजरात सरकार अपनी आय, जीवन शैली और धर्म के बारे में झूठ बोलकर लड़कियों को फंसाने की कोशिश करने वाले असामाजिक तत्वों से बेटियों को बचाने के लिए इस कानून को लायी जोकि लव जिहाद विरोधी कानून के रूप में लोकप्रिय है। लड़कियों को शादी के बाद पता चलता है कि पुरुष दूसरे धर्म का है और कुछ नहीं कमाता।
सिर्फ मुसलमानों के लिए नहीं है कानून
पटेल ने कहा कि उन्हें पता चला है कि एक्ट को चुनौती देने वाली रिट याचिका एक खास समुदाय ने दायर की थी। उन्होंने कहा कि मैं उस संगठन से पूछना चाहता हूं कि अगर हिंदू लड़कियां हिंदुओं से शादी करती हैं, मुस्लिम लड़कियां मुसलमानों से शादी करती हैं, ईसाई लड़किया ईसाई से शादी करती हैं। सिख लड़कियां सिखों से शादी करती हैं तो उन्हें क्या दिक्कत है…मैं स्पष्ट करता हूं अगर कोई हिंदू लड़का एक निर्दोष मुस्लिम लड़की को धोखा देकर शादी करता है ये कानून उस पर भी लागू होता है इसलिए ये कानून किसी विशेष धर्म के लिए नहीं है।’
उन्होंने कहा, ‘चूंकि कुछ लोगों ने नए कानून के प्रावधानों को चुनौती दी है, उच्च न्यायालय ने हाल ही में कानून पर रोक लगा दी है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों और हमारे महाधिवक्ता से परामर्श करने के बाद मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने इस रोक को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने का फैसला किया है।’
यह है पूरा मामला
गौरतलब है कि गुजरात उच्च न्यायालय ने राज्य के धर्मांतरण विरोधी नए कानून की अंतरधार्मिक विवाह संबंधी कुछ धाराओं के क्रियान्वयन पर 19 अगस्त को रोक लगा दी थी। विवाह के माध्यम से जबरन या धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन के लिए दंडित करने वाले गुजरात धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम, 2021 को राज्य सरकार ने 15 जून को अधिसूचित किया गया था।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद की गुजरात शाखा ने पिछले महीने दाखिल एक याचिका में कहा था कि कानून की कुछ संशोधित धाराएं असंवैधानिक हैं। अदालत ने आगे की सुनवाई लंबित रहने तक धारा तीन, चार, चार ए से लेकर धारा चार सी, पांच, छह एवं छह ए को लागू करने पर रोक लगा दी थी।
-एजेंसियां

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