बिल भरवाने के लिए अस्‍पताल ने बंधक बनाया मरीज

नई दिल्‍ली। कैलाश कॉलोनी स्‍थित अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल में पांच दिनों के लिए मोहम्मद उमर (48) को ‘मेडिकल बंधक’ बना कर रखा गया। उनकी वहां सर्जरी हुई थी।
दरअसल, अस्पताल ने बिल जमा किए बिना उन्हें छोड़ने से इंकार कर दिया। उमर के परिवार ने अस्पताल से यह साफ कर दिया था कि वह सर्जरी नहीं करा सकते लेकिन अस्पताल पर आरोप है कि उसने जबरन उसे भर्ती कर लिया। अस्पताल ने भरोसा दिलाया कि वे बीमा कंपनी से अप्रूवल दिला देंगे और यह दावा भी किया कि बीमा कंपनी से अप्रूवल मिल गया। लेकिन सर्जरी के बाद प्रबंधक ने यह कहना शुरू कर दिया कि बीमा कंपनी ने भुगतान देने से मना कर दिया है, जब तक वे भुगतान नहीं करेंगे मरीज को जाने नहीं दिया जाएगा।
बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने अप्रैल 2017 को एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि अगर मरीज बिल जमा नहीं कर पाते तो अस्पातल उन्हें बंधक नहीं बना सकता। 11 अगस्त को ब्लैडर नेक इनसिजन सर्जरी के बाद उमर को अगले दिन ही डिस्चार्ज किया जाना था लेकिन उन्हें 16 अगस्त तक बंधक बना कर रखा गया, जब तक बीमा कंपनी की तरफ से पेमेंट का अप्रूवल नहीं आ गया। इस बीच अस्पताल जनरल वॉर्ड के हिसाब से हर दिन का 1000 रुपये बिल में जोड़ते रहे।
इस संबंध में जब अपोलो स्पेक्ट्रा के प्रवक्ता से पूछा गया तो उन्होंने दावा किया कि मरीज को डिटेन करके नहीं रखा गया था। उन्होंने कहा कि बीमा कंपनी सर्जरी के संबंध में स्पष्टीकरण चाहती थी। वे मरीज को अस्पताल में देखना चाहते थे ताकि फिजिकल वेरिफिकेशन किया जा सके। चूंकि, मरीज कैथेटर पर था इसलिए हमने उन्हें बेहतर देखभाल के लिए रखा।
उधर, उमर के बेटे इमरान कहना है कि यह झूठ है क्योंकि बीमा एजेंट 10 अगस्त को ही मिलकर जा चुके थे, जिस दौरान उन्होंने दस्तावेज वेरिफाइ किया, डॉक्टर से मिले और मेरे पिता का हस्ताक्षर लिया। सिक्योरिटी गार्ड उमर को पेशाब में दिक्कत थी। 7 अगस्त को उन्होंने लैप्रोस्कोपिक सर्जन से संपर्क किया जिन्होंने अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल आने को कहा जहां उनका ऑपरेशन हुआ। परिवार ने पहले ही 3,000 रुपये खर्च किए थे, जिसमें अल्ट्रासाउंड किया गया। जिसमें उनकी समस्या का पता चला। सर्जरी का कॉस्ट बताने पर इमरान ने अस्पताल से कहा कि वह यह खर्च वहन नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी बताया कि पिता का बीमा किया हुआ है। इमरान ने कहा, ‘मैंने बार-बार इस पर जोर दिया कि हमारे पास पैसा नहीं है और अस्पातल के स्टाफ व डॉक्टरों ने हमें भरोसा दिया कि बीमा कंपनी से अप्रूवल मिलते ही सर्जरी हो जाएगी।’
पिता को अस्पताल से छुट्टी न मिलने पर इमरान ने कैम्पेन फॉर डिग्निफाइड ऐंड अफोर्डेबल हेल्थकेयर की मालिनी से मदद मांगी जो कि एक वकील के साथ 16 अगस्त को अस्पताल पहुंचीं। उन्हें भी अस्पताल ने कह दिया कि जब बिल जमा नहीं होता, उन्हें नहीं छोड़ा जाएगा। आखिरकार जब बीमा कंपनी से अप्रूवल मिला तब उमर को छुट्टी दी गई।
-एजेंसियां

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