आज हिन्दी दिवस नहीं, हिन्दी समृद्धि संकल्प दिवस है

मथुरा। गोवर्धन रोड स्थित ज्ञानदीप श‍िक्षा भारती में 8 सितम्बर से प्रारंभ हिन्दी दिवस के विविध कार्यक्रम का शनिवार को समापन हो गया।

सप्ताह पर्यन्त हुए कार्यक्रमों में सुलेख प्रतियोगिता ‘स्वर्णिम हिन्दी-स्वर्णिम ज्ञानदीप है’ विषयक कविता लेखन प्रतियोगिता, कर्तव्यपरायण ही सफलता का सोपान’ विषयक लघु कथा लेखन, चित्रकला आदि प्रतियोगिताओं में छात्र-छात्राओं ने हिन्दी की महत्ता का प्रतिपादन किया। प्रतियोगिताओं में सफल विद्यार्थियों को प्रधानाचार्या रजनी नौटियाल ने पुरस्कृत किया।

समापन कार्यक्रम में शैक्षिक निदेशक प्रीति भाटिया, हिन्दी विभागाध्यक्ष धीरेन्द्र सिंह, सुषमा सक्सेना, कार्यक्रम समन्वयक संदीप कुलश्रेष्ठ तथा प्रशासनिक अधिकारी आशीष भाटिया ने पारस्परिक वार्ता, पत्र लेखन तथा सार्वजनिक सम्बोधनों में हिन्दी के अधिकाधिक प्रयोग का आह्वान किया।

इस अवसर पर ज्ञानदीप के संस्थापक सचिव पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया ने कहा कि संसार के 195 देशों के बहुसंख्य विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जा रही है। भारत के अधिकांश प्रदेशों में हिन्दी जन -जन की भाषा है। हिन्दी के अतिरिक्त कोई ऐसी भाषा नहीं है जो राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठ‍ित हो किन्तु यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि संवैधानिक रूप से हिन्दी राष्ट्रभाषा घोष‍ित नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि अहिन्दी भाषाभाषी प्रदेशों में ‘हिन्दी दिवस’ तथा अन्य प्रदेशों में हिन्दी दिवस ‘हिन्दी समृद्धि संकल्प दिवस’ के रूप में मनाया जाया जाना चाहिए।

हिन्दी सप्ताह का समापन छात्रा ऋतु की इन पंक्तियों से हुआ-

बदले परिवेश में, मीरा के देश में,
तुलसी के देश में, कबिरा के देश में,
स्वर्णिम प्रभात करो रे, कोई तो हिन्दी की बात करो रे-

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