हिमाचल प्रदेश: कुल्लू दशहरे में बिन बुलाए पहुंचे दो देवता ‘नजरबंद’

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू दशहरे में बिन बुलाए पहुंचे दो देवताओं को एक बार फिर ‘नजरबंद’ कर दिया गया है। इन देवताओं को पुलिस की कड़ी सुरक्षा में एक कैंप में रखा गया है।
कुल्लू प्रशासन के औपचारिक आमंत्रण न भेजने के बावजूद चर्चित कुल्लू दशहरे में समर्थक इनकी मूर्तियों को लेकर पहुंचे थे।
दोनों देवता-शृंगा ऋषि और बालू नाग की दशहरे में एक अहम भूमिका है लेकिन विवाद के चलते दशहरा कमेटी पिछले 10 साल से इन्हें आमंत्रित नहीं कर रही है।
दोनों देवताओं के भक्त आपस में सर्वोच्च स्थान को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं। मामला हाई कोर्ट तक जा पहुंचा लेकिन इनका विवाद सुलझ नहीं पाया। ऐसे में कुल्लू प्रशासन की तरफ से न्योता न मिलने पर भी एक बार फिर दोनों देवताओं के भक्त पालकी लेकर दशहरे में शामिल होने आते हैं लेकिन पुलिसकर्मी अनहोनी को टालने के लिए इन्हें कैंप के अंदर ही ‘नजरबंद’ कर देते हैं। इस साल भी दोनों देवता दशहरे की रथयात्रा में शामिल हुए।
1650 में शुरू हुआ था कुल्लू दशहरे का आयोजन
कुल्लू दशहरा का आयोजन 1650 में शुरू हुआ था। मान्यता के मुताबिक यहां के राजा जगत सिंह को ब्रह्म हत्या के श्राप से कुष्ठ रोग हो गया था। ब्रह्म हत्या से दोष मुक्त होने के लिए अयोध्या से भगवान रघुनाथ की मूर्ति लाई गई थी। उनकी पूजा के साथ ही यहां कुल्लू दशहरे का उत्सव शुरू हुआ था। राजा जगत सिंह अपना राजपाठ भगवान रघुनाथ को सौंपकर उनके छड़ीबरदार बन गए थे। तबसे कुल्लू दशहरे में भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा निकाली जा रही है और राजपरिवार का सदस्य इसमें छड़ीबरदार की भूमिका में होता है।
रथयात्रा में दायीं ओर चलने को लेकर देवताओं के बीच छिड़ी ‘जंग’
कहा जाता है कि रथ यात्रा में सर्वोच्च देवता की मूर्ति भगवान रघुनाथ (कुल्लू दशहरा के पीठासीन देवता) के दायीं ओर चलती है। इस जगह पर कई दशकों तक शृंगा ऋषि काबिज रहे लेकिन 1970 के दशक में जब उन्होंने दशहरे में भाग लेना बंद कर दिया तो बालू नाग देवता ने उनकी जगह ले ली।
11 साल बाद शृंगा ऋषि ने दशहरे में दोबारा भाग लेना शुरू किया लेकिन रथयात्रा में दायें स्थान को लेकर दोनों देवताओं के भक्तों में विवाद हो गया। कुछ साल पहले दोनों देवताओं के भक्तों ने एक-दूसरे के ऊपर पत्थरबाजी की थी जिससे कई लोग घायल हो गए थे। उसके बाद दोनों देवताओं को नजरबंद रखा जाता है और पुलिस उन्हें रथयात्रा में शामिल होने की इजाजत नहीं देती है।
दोनों के भक्तों का अलग-अलग पक्ष
बालू नाग को लक्ष्मण का अवतार माना जाता है। उनके भक्त कहते हैं कि कोई भी एक भाई को उसके बड़े भाई से अलग नहीं कर सकता और उन्हें एक साथ रहने का अधिकार है। दूसरी और शृंगा ऋषि के भक्त कहते हैं कि गुरु की जगह किसी भी रिश्ते से बढ़कर है इसलिए वे किसी को भी उनकी जगह नहीं लेने देंगे।
-एजेंसियां

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