सर्दियों में हार्ट के मरीजों को अधिक सावधान रहना जरूरी

सर्दियों के मौसम में बीपी और शुगर घटते-बढ़ते रहते हैं इसलिए हार्ट अटैक या हार्ट की प्रॉब्लम बढ़ने की आशंका ज्यादा रहती है।
इतना ही नहीं, सर्दी की वजह से दिल की नलियां सिकुड़ जाती हैं। ऐसे में हार्ट के मरीज को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत होती है।
1. ठंड से बचाव न करना
सर्दी में ज्यादा घूमने-फिरने से ठंड से हार्ट की आर्टरीज सिकुड़ जाती हैं। शरीर को गरम रखने के लिए हार्ट को ज्यादा जोर लगाना पड़ता है यानी हार्ट को ज्यादा ब्लड सप्लाई की ज़रूरत पड़ती है। अगर किसी को पहले से हार्ट ब्लॉकेज है तो एंजाइना या छाती में दर्द और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
क्या न करें
-सुबह और शाम के समय जब ज्यादा ठंड हो या बादल छाए हों हार्ट के मरीज बाहर ना जाएं।
-छाती को ठंडी हवा न लगने दें, खासकर सुबह के समय क्योंकि छाती में इससे हार्ट की नाड़ियों या धमनियों के सिंक करने का खतरा रहता है।
– तड़के या देर रात को खुले में सैर न करें।
क्या करें
– सर्दियों में हार्ट के मरीज धूप निकलने पर ही सैर के लिए जाएं।
– ठंडे पानी की जगह गुनगुने पानी से ही नहाएं।
-नहाने के तुरंत बाद घर से बाहर नहीं निकलें।
-अक्सर ठंड और ठंडे पानी की वजह से लोग नहाने में जल्दबाजी करते हैं। इससे दिक्कत हो सकती है। इससे दिल की धड़कन बढ़ सकती है और एंजाइना का दर्द हो सकता है। हो सके तो नहाने से पहले बाथरूम को भी हीटर लगाकर गर्म कर लें और नहाने में हड़बड़ी न करें।
2. दवाओं की कम डोज
अपने डॉक्टर से मशविरा करके हम लोग बीपी की दवाइयां नहीं बढ़वाते जबकि गर्मी के मुकाबले सर्दी में ब्लड प्रेशर ज्यादा बढ़ जाता है और ज्यादा दवाइयों की जरूरत होती है। इससे हार्ट की प्रॉब्लम बढ़ जाती है।
क्या न करें
बिना डॉक्टर की सलाह से दवा न बदलें और न लें।
क्या करें
-जिन लोगों को शुगर और बीपी की शिकायत है, वे इन दिनों अपने डॉक्टर की सलाह से बीपी और शुगर का लेवल कंट्रोल में रखने के उपाय करें क्योंकि इन दोनों का लेवल कंट्रोल न होने से हार्ट पर जोर पड़ता है जिससे हार्ट फेल हो सकता है।
– अपने डॉक्टर से दवाइयों के बारे में नियमित सलाह-मशविरा करते रहें। डॉक्टर की बताई गई दवाई नियमित रूप से समय पर लें।
– डॉक्टर से बात करके दवाइयों की मात्रा बढ़वा सकते हैं क्योंकि हार्ट के मरीजों को सर्दियों में दवाई की जरूरत ज्यादा पड़ती है।
-सर्दियों में हार्ट के मरीजों को फ्लू और निमोनिया का खतरा रहता है। साल में एक बार सर्दियों में वैक्सीन जरूर लगवा लें।
– कब्ज और गैस न रहने दें। इसके लिए रात को सोते समय त्रिफला चूर्ण लें।
3. गलत खानपान
सर्दियों में ज्यादातर समस्या गलत खानपान की वजह से होती हैं। इन्हें सही करने से परेशानी काफी हद तक दूर हो जाएगी।
क्या न करें
सर्दियों में खानपान सही रखना बहुत जरूरी है। गलत खानपान न करें। भारी भोजन न करेंं। तेल-मसाला कम खाएं।
क्या करें
– इन दिनों शरीर में एसिडिटी बढ़ जाती है। इससे हार्ट में क्लोट्स बनने लगते हैं। सुबह उठकर गुनगुना पानी पीना चाहिए। गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद और आधा नीबू मिलाकर पिएं। यह शरीर की एसिडिटी को कम करेगा जो दिल के लिए बेहद नुकसानदायक होती है।
– अर्जुन छाल का काढ़ा बनाकर पिएं।
– सर्दियों में प्यास कम लगती है लेकिन पानी पीते रहना चाहिए जिससे शरीर से टॉक्सिन्स निकलते रहें। पानी में थोड़ी सौंफ डालकर उबालें। दिन भर थोड़ा-थोड़ा यह पानी पीते रहें। ऐसे ही तुलसी, पुदीने, धनिए, दालचीनी आदि का पानी भी पी सकते हैं।
– सर्दी में गाजर, चुकंदर और सेब का जूस फायदेमंद रहता है। इस जूस से पेट को एंजाइम्स मिलते हैं जो पेट को ठीक रखते हैं। इससे हार्ट प्रॉब्लम से बचाव होता है।
– लौकी के जूस में काली मिर्च भी डालकर पिएं।
फल-सब्जियां
– खट्टे फल सर्दियों में आपकी इम्युनिटी और ब्लड सर्कुलेशन को दुरुस्त रखेंगे। संतरा, मौसमी, कीनू, कीवी, अनार, पाइनएपल, आंवला आदि से शरीर में विटामिन-सी बढ़ता है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। इससे शरीर पर होने वाले वायरल और बैक्टीरिया के अटैक से बचाव होता है। विटामिन-सी से बढ़ी इम्युनिटी दिल की हिफाजत करेगी। ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होने से बीपी की गोली या बीटा-ब्लॉकर गोली खाने का असर ज्यादा बढ़ जाता है।
– कच्ची-हरी सब्जियां और साग खाएं। ये खून में संतुलन बनाती हैं, यानी खून गाढ़ा है तो उसे पतला और ज्यादा पतला है तो उसे गाढ़ा बनाएंगी।
– हरी पत्तेदार सब्जियां कच्ची खाएंगे तो 100 प्रतिशत पोषण मिलेगा, पकाकर खाएंगे तो सिर्फ 10 प्रतिशत।
– कच्ची सब्जियों और साग को गर्म पानी से जरूर धो लें, बैक्टीरिया का खात्मा हो जाएगा।
– रेशेदार सब्जियां और फल ज्यादा खाएं। कलर थेरपी के अनुसार हार्ट को ठीक करने और स्वस्थ रखने में हरा रंग अहम होता है।
– सब्जियों वाला रागी, ओट्स, जौ, ज्वार या बाजरे का दलिया खाएं। रागी में दिल के लिए फायदेमंद कैल्शियम होता है जबकि ओट्स में कॉलेस्ट्रॉल को कम करने वाला फाइबर होता है।
तेल-घी
-एक दिन में देसी घी, मक्खन या कोई भी तेल कुल मिलाकर 3 चम्मच यानी 15 मिलीलीटर से ज्यादा न हो।
– कोल्ड कंप्रेस्ड ऑयल ही प्रयोग करना चाहिए। तेल खरीदें तो रैपर पर यह शब्द देखकर खरीदें।
ड्राई फ्रूट्स
– काजू को छोड़कर सभी ड्राई फ्रूट्स हार्ट पेशेंट्स के लिए अच्छे हैं। इनमें जीरो कॉलेस्ट्रोल होता है। याद रखें कि जो भी चीज पेड़ों से सीधे मिलती है उसमें कॉलेस्ट्रॉल नहीं होता।
– फ्लैक्स, सनफ्लॉवर, पम्पकिन सहित दूसरी तरह के भुने हुए बीजों को मिलाकर एक टेबल स्पून रात को खा सकते हैं।
बिस्किट-नमकीन
– बिस्किट और नमकीन आदि या तो ना लें या बहुत ही कम मात्रा में लें।
मीठा
– मीठा खाने का मन करे तो गुड़ अच्छा है।
– गाजर का हलवा सिर्फ दूध में पकाया हुआ थोड़ा-सा खा सकते हैं। मूंग हलवा बहुत हेवी होता है, बचें।
– हुजूर, आप खजूर भी खा सकते हैं।
पलूशन का ध्यान न रखना
सर्दी में पलूशन बढ़ने से फेफड़ों और ब्लड सर्कुलेशन से संबंधित समस्या पैदा होती है। इससे भी हार्ट प्रॉब्लम बढ़ती है।
क्या न करें
-जब पलूशन का स्तर ज्यादा हो तो बाहर न निकलें।
क्या न करें
– जब पलूशन का स्तर ज्यादा हो तो बाहर न निकलें।
5. जीवन शैली गलत होना
जीवन शैली को सही रखकर हार्ट के मरीज ठंड के असर से बच सकते हैं।
क्या न करें
– कुछ लोग सर्दियों में अचानक कसरत शुरू कर देते हैं जबकि पहले नहीं करते थे। इससे भी हार्ट को शॉक लगता है।
-कोई भी एक्सरसाइज करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
-अगर पहले से योग नहीं किया है तो योग शुरू करने से पहले किसी योग गुरु की सलाह जरूर लें।
– तनाव से बचें।
नशे का सेवन
शराब, सिगरेट आदि का सेवन भी दिल की बीमारी की वजह है। अमूमन ठंड में लोग शरीर को गर्म रखने के लिए इनकी मात्रा बढ़ा देते हैं।
क्या न करें: नशे वाली सभी चीजें खतरनाक हैं। ब्रांडी, रम, वाइन और विस्की, सभी से बचें।
क्या करें: नशा न करें। अगर छोड़ना मुश्किल हो तो इसकी मात्रा जरूर कम कर दें।
क्या करें
व्यायाम
– इस मौसम में एक्सरसाइज से हार्ट पेशंट को काफी लाभ होता है।
– लंबी और गहरी सांस वाली कोई भी कसरत अच्छी होती है, लेकिन धीरे-धीरे ही करें।
-वॉक करें और वह भी धीरे-धीरे बिना सांस फूले।
-हर रोज 35 से 40 मिनट वॉक करें यानी 3-4 किलोमीटर चलें। एक बार में इतना चलें या फिर दिन में दो-तीन बार में।
-वॉक इतनी स्पीड से करें कि सांस न फूले, न ही छाती में दर्द महसूस हो।
– हेवी एक्सरसाइज या हार्ट पर लोड डालने वाले खेल न खेलें।
-स्कूलों में बच्चों को हाथ ऊपर-नीचे करके कराई जाने वाली पीटी जैसी एक्सरसाइज हल्के-हल्के कर सकते हैं।
– हल्का और सहन करने लायक एक्सरसाइज करें ताकि ब्लड सर्कुलेशन ठीक बना रहे, लेकिन खुले में न करें। धूप निकलने पर या कमरे का टेंपरेचर मेंटेन करके ही एक्सरसाइज करें।
– अपनी ताकत के मुताबिक हाथ-पैर के जोड़ों को हिलाने के सूक्ष्म व्यायाम करें। इनसे जोड़ों में लचक बनती है और हार्ट में खून का सर्कुलेशन ठीक बना रहता है।
योग
– योग से निरोग रहेंगे।
-आसनों में त्रिकोणासन, पादहस्तासन, शशांकासन, अर्धवक्रासन, उत्तानपादासन, मेरुदंडासन, भुजंगासन और शलभासन करें।
– अनुलोम-विलोम और कपालभाति प्राणायाम करें। धीरे-धीरे 5 से 10 मिनट दिन में एक या दो बार खाली या हल्के पेट करना बेहतर रहेगा। कपालभाति तभी करें, जब बीपी कंट्रोल हो।
-भस्त्रिका प्राणायाम: बिलकुल धीरे-धीरे करें। जिन्हें गंभीर हार्ट प्रॉब्लम है, वे न करें। एक मिनट में 5 से 6 आवृत्तियां ही हों। दिन में कुल 3 से 5 मिनट करना है।
जरूरी बातें
-2 घंटे का फासला रखें खाने और सोने के बीच में
-7 से 8 घंटे की नींद लें
-10 से 20 फीसदी ज्यादा हो जाता है सर्दियों में आमतौर पर ब्लड शुगर, क्योंकि बॉडी मौसम के अनुसार खुद को री-अजस्ट करती है।
सेहत के लिए खास खाना
डॉ. बिमल छाजेड़ की थिअरी
– बिना घी-तेल की दाल-सब्जी खाएं।
– 6 तरह के ड्राई फ्रूट दिल के मरीज न खाएं: काजू, बादाम, पिस्ता, अखरोट, मूंगफली और सूखा नारियल। इन्हें भिगोकर खाने से भी इनमें फैट या ऑयल कम नहीं हो पाता। नारियल की कच्ची गिरी में भी 49 प्रतिशत ऑयल होता है।
– अंजीर, खजूर या छुआरा, सुखी खुमानी, किशमिश या मुनक्का खा सकते हैं। पर, मूंगफली समेत बाकी ड्राई फ्रूट्स में ऑयल या फैट होता है। न खाएं।
– हर तरह के तेल से बचें। तिल, फ्लैक्स, पम्पकिन या किसी भी तरह के बीज न खाएं। इनमें
ऑयल होता है।
-मिठाइयों में से सिर्फ दूध की मिठाई कभी-कभार और वह भी बहुत कम मात्रा में ले सकते हैं। सिर्फ डबल टोंड या स्किम्ड दूध ही पिएं।
– इडली, ढोकला, आटे की मैगी खा सकते हैं।
– तिल या मूंगफली की पट्टी की जगह चने की
पट्टी खाएं।
-मीट-अंडा आदि बिलकुल न लें।
स्वामी रामदेव की सलाह
– खाने में मसाले हल्के रखें। काली मिर्च, हल्दी और जीरा उपयोगी होते हैं।
– नई रिसर्च के अनुसार, खाने में रोज 2 चम्मच घी या तेल सभी के लिए जरूरी है।
-गाय घी इस्तेमाल करें या नेचरल ऑयल यानी केमिकल के बिना फिजिकली रिफाइन या राइस ब्रैन ऑयल का। कच्ची घानी का तेल भी अच्छा है।
– कोल्ड कंप्रेस्ड या वर्जिन ऑयल अच्छे होते हैं।
-तिल का तेल हार्ट, मोटापे और शुगर की बीमारी में औषधि का काम करता है।
-रोज लहसुन की 1-2 कलियां खाएं।
-अर्जुन की छाल और दालचीनी को उबालकर पिएं।
डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी की रॉ फूड थिअरी
– दिनभर के अपने कुल भोजन का 50 फीसदी फल और सलाद के रूप में लें, बाकी 50 फीसदी दाल, अनाज या दूसरी चीजों के रूप में लें।
– मीठा खाने का मन करे तो खजूर खाएं।
-हरी पत्तेदार सब्जियां कच्ची खाएं तो 100 प्रतिशत फायदा होगा। जबकि पकाकर खाएंगे तो सिर्फ 10
प्रतिशत ही।
-कच्ची हरी सब्जियां खाएं। हरे रंग वाली और हरे पत्तों वाली। जैसे पालक, सरसों, मेथी, बथुआ चौलई आदि। हरी सब्जियां खून को ऑप्टिमाइज़ करने में मदद करती हैं। संतुलन बनाती हैं। यानी खून गाढ़ा है तो उसे पतला करेंगी। ज़्यादा पतला है तो उसे गाढ़ा।
– कच्ची सब्जी खाने से पहले उसे अच्छी तरह गरम पानी से साफ करना जरूरी है।
– चाय आदि में मीठे के रूप में गुड़, शक्कर या देसी खांड का इस्तेमाल करें।
– एनिमल प्रोटीन यानी पशुओं से मिलने वाली चीजें हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण है, इनसे बचें। इनमें दूध, दही आदि डेयरी प्रोडक्ट्स आते हैं।
एक्सपर्ट्स पैनल
-डॉ. नरेश त्रेहन चेयरमैन, मेदांता
-स्वामी रामदेव, जाने-माने, योग गुरु
-डॉ. के. के. अग्रवाल, प्रेसिडेंट, हार्ट केयर फाउंडेशन
–डॉ. आर. एन. कालरा, सीनियर कार्डियॉलजिस्ट
-डॉ. बिमल छाजेड़, फाउंडर, SAAOL हार्ट सेंटर
-डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी, मेडिकल न्यूट्रिशनिस्ट
-डॉ. शिखा शर्मा, डायटिशन व न्यूट्रिशनिस्ट
-आचार्य बालकृष्ण, वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य, पतंजलि
-एजेंसियां

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