Tapesh Bhardwaj बनाम प्रदूषण नियंत्रण परिषद केस: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल

नई द‍िल्ली। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण परिषद पर लगे 5 लाख के जुर्माने के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल याचिका पर कल अंतिम सुनवाई होना तय हुआ है। दरअसल 13 अप्रैल 2017 को एनजीटी ने मथुरा के रहने वाले Tapesh Bhardwaj की याचिका पर फैसला सुनाया था। एनजीटी ने मथुरा छावनी परिषद पर दस लाख एवंं उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण परिषद पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया था, जिसको कि‍ छावनी परिषद ने जमा कर दिया था तथा उस स्थान पर कचरे के निस्तारण के लिए एक स्थल भी बनाया जिसका इसी वर्ष सांसद हेमा मालिनी ने उद्घाटन भी किया था ।

याचिकाकर्ता Tapesh Bhardwaj के अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी ने कहा कि कल सर्वोच्च न्यायालय में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण परिषद के खिलाफ दलील पेश कर परिषद की याचिका को खारिज करवाएंगे ।

मथुरा छावनी परिषद पर दस लाख  व उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण परिषद पर पांच लाख रुपये का जुरमाना: एन जी टी

राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने आज तपेश भारद्वाज बनाम उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण परिषद मामले में फैसला सुनाया। याची ने वर्ष 2016 के नवंबर माह में यह याचिका दायर की थी। याचिका में प्रमुख रूप से यमुना में ऑक्सीजन स्तर शून्य हो जाने एवम कचरे की वजह से उत्पन्न होने वाली बीमारियों का उल्लेख था।

स्थानीय निकाय ठोस कचरा एवम खतरनाक कचरे के प्रबंधन में 2006 एवम 2016 के नियमों की पूर्ण अनदेखी का भी उल्लेख किया गया था। अधिकरण में याची की ओर से दाखिल किए गए दस्तावेजों एवं फोटोग्राफ्स को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जांच के आदेश दिये थे।

अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी ने बहस के दौरान छावनी परिषद एवम प्रदूषण नियंत्रण परिषद, दोनों ही के दावों को गलत साबित कर दिया था, व कड़े शब्दों में कहा था कि प्रदूषण नियंत्रण परिषद भी अपनी जिम्मेदरी से मुंह नहींं मोड़ सकता। अधिकरण ने बहस सुनने के बाद आज आदेश जारी किया।

अधिकरण ने इस मामले की पूूरे देश में व्याप्त अपशिष्ट कुप्रबन्धन के साथ तुलना करते हुए इसे एक अत्यंत ही गंभीर मामला माना है। याची के वक्तव्य को सही ठहराते हुए छावनी परिषद एवम उत्तर प्रदेश प्रदूषण परिषद को कड़ी फटकार लगाई।  कर्तव्यों का बोध कराते हुए कहा कि याचिका ना ही राजनीति से प्रेरित है ना ही किसी अन्य बाहरी कारण से, याचिका अगर प्रेरित है तो सिर्फ स्वछ वातावरण की मांग से व यह याची के साथ साथ सम्पूर्ण मथुरा की जनता की मांग है ।

अधिकरण ने जुर्माना जमा करने हेतु दो सप्ताह का समय दिया एवम साथ ही छावनी परिषद को निर्देश दिए कि चार सप्ताह के भीतर कचरा स्थल को चलाने के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद से अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन दाखिल करें, कचरा निस्तारण स्थल के चारों तरफ़ हरित पट्टी विकसित करें, साथ ही कचरा निस्तारण स्थल को चार दिवारी से घेरने का भी निर्देश दिया।

अधिकरण ने राज्य प्रदूषण पर‍िषद को राज्य सरकार से वित्तीय सहायता मांगने की अनुमति दी परंतु समय के भीतर ही जुर्माने की रकम भरने को कहा एवम कोई भी अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया।अधिकरण ने राज्य सरकार, छावनी परिषद, उत्तर प्रदेश एवम केंद्रीय प्रदूषण पर‍िषदोंं  को यह आदेश अक्षरशः लागू करने का भी निर्देश भी दिया।

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