हेल्थ ऐप्स पर किया गया हेल्थ टेस्ट भरोसे लायक नहीं

इन दिनों हेल्थ ऐप्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है जो आपकी सेहत पर नजर रखकर आपको हेल्दी जीवन जीने में मदद करने का दावा करते हैं।
लेकिन क्या इन ऐप्स द्वारा आपकी सेहत का जो आंकलन किया जा रहा है, वह पूरी तरह से सही है? शायद नहीं।
महिलाओं के पीरियड्स को ट्रैक करने वाले 2 सबसे फेमस ऐप्स फ्लो एंड क्लू ने हाल ही में एक हेल्थ टूल शुरू किया जो महिलाओं में हॉर्मोनल गड़बड़ी से होने वाली बीमारी पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के रिस्क का मूल्यांकन करता है। ऐप के डिवेलेपर फ्लो हेल्थ की मानें तो अकेले सितंबर के महीने में 6 लाख 36 हजार महिलाओं ने फ्लो हेल्थ असेस्मेंट को पूरा किया। इसके बाद ऐप ने करीब 2 लाख 40 हजार यानी 38 प्रतिशत महिलाओं को बताया कि उनमें हॉर्मोनल डिसऑर्डर की दिक्कत है और उन्हें अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
हाई-लेवल क्लिनिकल स्टडी नहीं करते
लेकिन फ्लो एंड क्लू हेल्थ टूल यूज कर इस हेल्थ टेस्ट को करने वाली ज्यादातर महिलाओं को ये पता ही नहीं कि इस ऐप ने किसी भी तरह की हाई-लेवल क्लिनिकल स्टडी नहीं की कि यह जानने के लिए वह जिस हेल्थ रिस्क का आंकलन कर रहे हैं, उसमें कितनी सच्चाई है या फिर इसमें कहीं किसी तरह का ओवर डायग्नोसिस तो नहीं किया जा रहा। नतीजतन कुछ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इस नए हेल्थ टूल की वजह से ऐसी महिलाओं को भी हॉर्मोनल इम्बैलेंस का शिकार बताया जा रहा है जिनमें ऐसी कोई दिक्कत है ही नहीं या फिर उसका उनकी सेहत पर किसी तरह का नकरात्मक असर नहीं पड़ रहा।
जिन्हें समस्या नहीं है उन्हें भी हो जाती है चिंता
पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम पर स्टडी करने वाली बॉन्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर जेनिफर डाउस्ट कहती हैं, इस तरह के हेल्थ ऐप्स पर किया गया हेल्थ टेस्ट और डायग्नोसिस बहुत से लोगों को ऐसी समस्या के बारे में चिंताजनक बना देता है जो उन्हें है ही नहीं, या फिर जिसका उनके शरीर पर किसी तरह का क्लिनिकल प्रभाव नहीं पड़ने वाला।
ऐप का आंकलन सही हो, ऐसा जरूरी नहीं
हेल्थ ट्रैकिंग ऐप्स का सालों से इस्तेमाल हो रहा है ताकि लोगों के हार्ट रेट, मूड, स्लीप पैटर्न और मेन्स्ट्रुअल साइकल जैसी चीजों के डेटा को इकट्ठा किया जा सके लेकिन अब इनमें से बहुत से ऐप्स एक कदम आगे बढ़कर इन डेटा के जरिए किसी व्यक्ति को होने वाले हेल्थ रिस्क जैसा दिल से जुड़ी बीमारियों के बारे में भी बताने लगे हैं। इन ऐप्स के आंकलन करने वाले नए टूल हो सकता है कि कुछ हद से मददगार हों लेकिन उनके द्वारा किया गया आंकलन सही है ऐसा जरूरी नहीं।
कन्ज्यूमर के तौर पर इन ऐप्स के डायग्नोसिस कन्फ्यूजिंग हैं
नेचर डिजिटल मेडिसिन में प्रकाशित एक स्टडी की मानें तो इस तरह के ज्यादातर ऐप्स के नतीजों में हाई-लेवल एविडेंस यानी सबूतों को कमी होती है। नेचर स्टडी के ऑथर डॉ जॉन टोरॉस भी कहते हैं, एक कन्ज्यूमर के तौर पर यह सचमुच बेहद कन्फ्यूजिंग है, अगर इस तरह के ऐप्स ये दावा करते हैं कि वे आपकी मेंटल हेल्थ, पीसीओडी, हार्ट डिजीज और डायबिटीज के बारे में जानकर आपकी मदद करते हैं लिहाजा अपनी सेहत की जानकारी के लिए डॉक्टर और उनके द्वारा बताए गए टेस्ट्स पर यकीन करना है या फिर इन हेल्थ ऐप्स पर यह आपको तय करना है।
-एजेंसियां

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