ज्ञानदीप बना नन्दभवन, नन्दोत्सव पर बिखरा हर्षोल्लास

मथुरा। मथुरा में भगवान् कृष्ण के जन्म के पश्चात् जन्म का उत्सव गोकुल के नन्दभवन में हर्षोल्लास पूर्वक मनाया था। गोकुल ही नहीं सम्पूर्ण ब्रज जसोदा-नन्दबाबा को बधाइयाँ देने के लिए उमड़ पड़ा था।

ऐसा ही कुछ दृश्य था गोवर्धन रोड स्थित ज्ञानदीप श‍िक्षा भारती के प्रांगण में जहाँ नन्द बाबा थे, जसोदा मैया थीं, बधाई गाती ब्रज बालाएँ थीं-

आईं आईं नन्द जू की पौरिं, बधायौ लाईं ग्वालिनियाँ।
फूल लाई मालिन तौ पान लाई तमोलिनियाँ,
गदका लाई लल्ला की बधाई, सुघड़ परवारिनियाँ।
और इसके साथ ही प्रांगण में गूँज उठे हजारों बच्चों के स्वर –
नन्द के आनन्द भए जय कन्हैया लाल की।

बधाई नृत्य – नाटिका में भाग लेने वाले कलाकार थे – कुनाल, हनु, सूरज, प्रियांषी, मनीष, सचिन, कृष्ण, ध्रुव, लक्ष्य, रोहित, अनन्या, कनक, प्रियांशी, हिना, गजल, खुशी, बंश‍िका, विद्या, श‍िवानी तथा कार्तिकेय। निर्देशन किया दीपाली वर्मा ने। सहयोगी थीं दीप्ति चतुर्वेदी, कनुप्रिया, अर्पणा सक्सैना एवं मधुलिका भाटिया। संचालन किया छात्र नितेष पांडे ने।

इस अवसर पर ज्ञानदीप के संस्थापक सचिव पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया ने उन बच्चों को आमंत्रित किया जिनके नाम कृष्ण से सम्बन्धित थे यथा – माधव, मनमोहन, कन्हैया आदि – आदि। कृष्ण का कम प्रचलित नाम ‘कनुआ‘ भी एक छात्र ने बताया।

उन्होंने कहा कि कृष्ण की माखन चोरी, चीरहरण, कालिया मर्दन आदि सभी लीलाओं में एक सार्थक सन्देश था जो आज भी प्रेरणास्पद है।

Gyandeep की प्रधानाचार्या श्रीमती रजनी नौटियाल तथा शैक्षिक निदेशक श्रीमती प्रीति भाटिया ने इस अवसर पर कहा कि कृष्ण ऐसे महापुरुष हुए हैं जिन्होंने महारास जैसी सरस लीलाओं के साथ महाभारत के युद्ध में अर्जुन को जो सन्देश दिया, वह गीता के रूप में भारत में ही संसार के अनेक देशों में सम्मान के साथ ग्रहण किया गया है।
अन्त में प्रशासनीक अधिकारी आषीश भाटिया ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *