महामारी के बीच गुजरात पर चक्रवाती तूफान का खतरा

अहमदाबाद। कोरोना महामारी के बीच गुजरात पर चक्रवाती तूफान का खतरा मंडरा रहा है। सौराष्ट्र तथा दक्षिण गुजरात में चक्रवाती तूफान से फसलों को नुकसान हो सकता है। अरब सागर में आगामी 14 मई यानी शुक्रवार को लो प्रेशर बनने की संभावना है, जो शनिवार को डिप्रेशन में तब्दील हो सकता है तथा 16 मई को गुजरात के पूर्व मध्य अरब सागर में चक्रवाती तूफान उठने की संभावना है। चक्रवात सौराष्ट्र व दक्षिण गुजरात के समुद्री किनारे से टकरा सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार गुजरात के समुद्री तट पर 16 से 18 मई तक चक्रवात तौकते का खतरा रहेगा। गृह राज्य मंत्री प्रदीप सिंह जाडेजा ने चक्रवात बनने तथा उससे होने वाले नुकसान की संभावनाओं पर सरकार के आला अधिकारियों के साथ चर्चा की।
उन्होंने सौराष्ट्र व दक्षिण गुजरात के साथ अन्य जिलों के कलेक्टर जिला विकास अधिकारी तहसीलदार तथा राजस्व अधिकारियों को चौकस रहने को कहा गया है।
जडेजा ने समीक्षा बैठक के बाद सौराष्ट्र व दक्षिण गुजरात के जिला कलेक्टर को खास हिदायत देते हुए बताया कि समुद्र में गए मछुआरों को सुरक्षित बुला लिया जाए तथा तटरक्षक बल की मदद से चक्रवात व तूफान से होने वाले नुकसान को ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन की तैयारियां की जाए। बताया जा रहा है कि अब तक करीब एक सौ बोट समुद्र से समुद्री किनारे पर आकर लंगर डाल चुकी है। चक्रवात से सौराष्ट्र के जामनगर भावनगर पोरबंदर तथा दक्षिण गुजरात के सूरत तापी व वलसाड जिले को अधिक खतरा है, इसलिए इन जिलों के तटीय क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन पुलिस तथा तटरक्षक बल के जवान सतर्क हो गए हैं तथा राहत व बचाव के लिए सभी आवश्यक तैयारियां कर रहे हैं।
सरकार ने राजस्व अधिकारियों व अनाज मंडियों के संचालकों को निर्देश जारी कर खुले में रखे अनाज को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने को कहा है। सौराष्ट्र व दक्षिण गुजरात में आम तथा विविध फल व फूल की फसलों को बचाने के लिए किसान कई उपाय कर रहे हैं। गिर सोमनाथ जूनागढ़ जिलों में किसान आम की कच्ची फसल को ही तोड़ रहे हैं ताकि बरसात से खराब ना हो। किसानों का मानना है कि अगर चक्रवात के बाद तेज बरसात और तूफान आता है तो 80 फीसद फसलें उसे नष्ट हो सकती हैं।
-एजेंसियां

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