देश को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाने की योजना पर काम कर रही सरकार

नई दिल्ली। सरकार अगले पांच वर्षों में देश को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाने की योजना पर काम कर रही है, इससे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में चीन और वियतनाम को कड़ी टक्कर दी जा सकेगी।
सरकार चाहती है कि फॉक्सकॉन और विस्ट्रॉन जैसी कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग फर्मों के अलावा ऐपल, सैमसंग, हुआवे, ओपो और वीवो जैसी बड़ी कंपनियां अपनी ग्लोबल सप्लाई चेन इंडिया में शुरू करें।
यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार 45,000 रुपये करोड़ का फंड बना रही है।
एक सीनियर अधिकारी के अनुसार, ‘इस मामले में एक इंटर-मिनिस्ट्रियल नोट जारी हो चुका है।’
इस राशि में से लगभग 41,000 करोड़ रुपये प्रोडक्शन-लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) के आधार पर कंपनियों को दिए जाएंगे। वहीं शेष 4,000 करोड़ रुपये प्रस्तावित कैपिटल सब्सिडी या रीइंबर्समेंट स्कीम के तहत ऑफर किए जाएंगे। यह स्कीम पॉपुलर मॉडिफाइड स्पेशल इन्सेंटिव पैकेज स्कीम (M-SIPS) की जगह लेगी।
अधिकारी ने कहा, ‘सरकार को PLI स्कीम से पांच साल की अवधि में 2 लाख से अधिक नौकरियां, 5 लाख रुपये से अधिक का एक्सपोर्ट और लगभग 5,000 करोड़ रुपये के आसपास टैक्स रेवेन्यू हासिल होने की उम्मीद है।’
PLI स्कीम के तहत मिलने वाले इन्सेंटिव का मकैनिज्म इंटर-मिनिस्ट्रियल परामर्श के बाद तय किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि यह मौजूदा मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (MEIS) के तहत मिलने वाली ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप स्कीम से मिलती-जुलती रह सकती है। MEIS को 31 मार्च तक के लिए ही बहाल किया गया है। ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप एक सर्टिफिकेट है जिसकी एक निश्चित मॉनिटरी वैल्यू होती है। इसका इस्तेमाल कस्टम ड्यूटी के भुगतान के लिए किया जा सकता है।
सरकारी अधिकारी यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि नई पॉलिसी वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन के मानकों के अनुरूप हो और इन्सेंटिव को प्रत्यक्ष तौर से एक्सपोर्ट से लिंक न करती हो। हालांकि, सरकार इस स्कीम के लिए योग्यता के कड़े मानदंड रखना चाहती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सिर्फ लोकल मार्केट के लिए डिवाइस बनाने वाले मैन्युफैक्चरर्स इस फंड का लाभ न उठा सकें। दुनिया की सबसे बड़ी कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर फॉक्सकॉन समेत सैमसंग, हुआवे, वीवो और ओपो के पास 500 अरब डॉलर वाले ग्लोबल मोबाइल फोन मार्केट में 80 पर्सेंट से ज्यादा हिस्सेदारी है। फॉक्सकॉन का एक कारखाना इंडिया में है।
भारत में लोकल प्रोडक्शन को भी वियतनाम से सस्ते इम्पोर्ट के कारण नुकसान हो रहा है। 2025 तक दुनिया में स्मार्टफोन का कुल मार्केट साइज 648 अरब डॉलर पर पहुंचने का अनुमान है और इसमें लगभग 370 अरब डॉलर एक्सपोर्ट होगा। इस मार्केट की टॉप तीन ग्लोबल कंपनियां ऐपल, सैमसंग और हुआवे हैं। भारत के आधे से अधिक स्मार्टफोन मार्केट पर शाओमी, ओपो, विवो और हुआवे जैसी चीन की कंपनियों का कब्जा है।
शनिवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की थी कि सरकार लोकल इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए एक स्कीम पर काम कर रही है लेकिन उन्होंने कहा था कि इसकी जानकारी बाद में जारी की जाएगी। प्रस्तावित मसौदे को मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फर्मोशन टेक्नोलॉजी (MeitY), डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड, नीति आयोग के सीईओ और डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरन ट्रेड (DGFT) के पास विचार विमर्श के लिए भेजा गया है। इनके साथ ही इस मसौदे को रेवेन्यू, एक्सपेंडिचर, इकनॉमिक अफेयर्स और कॉमर्स के सचिवों से उनकी राय जानने के लिए भेजा गया है।
-एजेंसियां

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