गुलेल को राष्ट्रीय खेल घोषि‍त करे सरकार: भारतीय गुलेल संघ

औरंगाबाद। भारत सरकार से गुलेल को राष्ट्रीय खेल घोषि‍त करने की मांग की गई है। 28 फरवरी को भारतीय गुलेल संघ के सचिव लवकुमार जाधव द्वारा खेल मंत्रालय भारत सरकार को गुलेल को राष्ट्रीय खेल घोषि‍त करने के ल‍िए आवेदन पत्र भेजा था। भारतीय गुलेल संघ के वकील अशोक तपसे ने मा. हक और मा. गव्हाने हायकोर्ट औरंगाबाद को कहा की भारत में अभी तक कोई भी राष्ट्रीय खेल नहीं है अत: गुलेल को राष्ट्रीय खेल घोष‍ित क‍िया जाए।

इसपर माननीय हाईकोर्ट औरंगाबाद ने खेल मंत्रालय भारत सरकार को आदेश देते हुये कहा कि दो महीने में भारतीय गुलेल संघ के सचिव लवकुमार जाधव ने जो आवेदन पत्र भेजा है उसपर नि‍र्णय लिया जाये।

भारतीय गुलेल संघ के सचिव लवकुमार जाधव ने बताया क‍ि भारतीय गुलेल संघ 2015 से भारत में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेल रहा है। चूंक‍ि गुलेल भारत का पारंपरिक खेल है और इसकी शुरूआत भारत से ही हुई और अब व‍िश्वभर में इसे 113 से ज्यादा देश खेल रहे हैं और 2018 इटली में हुये विश्व कप में 22 देशों ने भाग भी लिया था। अत: गुलेल को राष्ट्रीय खेल घोष‍ित करके इसका और भी व‍िकास हो सकेगा व इसे अन्य खेलों की भांत‍ि वृहदस्तर पर बढ़ावा देना आसान होगा।

‘गुलेल’ को भारत का राष्ट्रीय खेल का दर्जा मिलने की आवश्यकता है और इस खेल को हर मायने में विकसित और अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए हम हर प्रयास करने के लिए सदा तत्पर है। इसी दिशा में भारतीय ओलम्पिक एसोसिएशन के खेल की सूची में इस गुलेल खेल का नाम निर्देशन होना आवश्यक है।

आज भी भारत के ग्रामीण क्षेत्र तथा अनेक शहरों में भी इसका काफी प्रचलन हैं। प्राचीन काल में युद्ध कला में भी इसका प्रषिक्षण दिया जाता था और इसके लिए खास गुलेल के संघ भी सेना में होते थे। कई लोग गुलेलबाजी में महारत हासिल करने के लिए इसका उपयोग एक खेल की तरह करते है। इससे निशानेबाजी का कौशल बहुत ही अच्छे और महत्वपूर्ण ढंग से विकसित होता है।

पुराने जमाने मे शिकारी गुलेल से पक्षियों और प्राणीयों की हत्या करते थे और अपना पेट पालने की कोश‍िश करते थे। हालांकि अभी भी भारत के कई इलाकों जैसे आदिवासी और ग्रामीण या जंगली क्षेत्रों में गुलेल का उपयोग होता है लेकिन अगर हम इस को एक खेल के तौर पर विकस‍ित करते हैं तो बेवजह पक्षी और प्राणी की हत्या का प्रमाण कम हो सकता हैं और इस खेल का समावेष हम अगर राष्ट्रीय खेल में करते हैं तो अच्छे निशानेबाज विकसित हो सकते हैं। अगर सही मायने में इसे सराहा जाये और इस खेल को सही ढंग से विकसित किया जाये तो राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक निशानेबाज खिलाड़ी उभर सकते हैं और भारत का नाम वैश्व‍िक स्तर पर उँचा कर सकते हैं।

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