50 हजार करोड़ रुपये की शुरुआती रकम से NISF बनाने जा रही है सरकार

नई दिल्‍ली। गृह मंत्रालय ने 15वें वित्‍त आयोग (FFC) से 50 हजार करोड़ रुपये की शुरुआती रकम द्वारा राष्‍ट्रीय आंतरिक सुरक्षा निधि (NISF) बनाने को कहा है। इसका ज्‍यादा हिस्‍सा रियल टाइम सर्विलांस और इंटेलिजेंस गैदरिंग टेक्‍नोलॉजी एंड गैजेट्स पर खर्च होने की उम्‍मीद है।
एनके सिंह की अध्‍यक्षता वाली एफएफसी को लिखी चिट्ठी में मंत्रालय ने कहा है कि आंतरिक सुरक्षा केंद्र और राज्‍यों की साझा जिम्‍मेदारी है इसलिए ऐसा फंड बनाना सही है। 26 अगस्‍त को ईमेल से भेजे गए सवालों का गृह मंत्रालय और एफएफसी ने जवाब नहीं दिया।
राष्‍ट्रीय सुरक्षा निधि के बाद अलग से बनेगी आंतरिक सुरक्षा निधि
सरकार ने पिछले साल नवंबर में 15वें वित्‍त आयोग का कार्यकाल 11 महीने बढ़ा दिया था। रक्षा और आंतरिक सुरक्षा के लिए आयोग रास्‍ते खोज सके, उसका भी इंतजाम था। रक्षा मंत्रालय ने एक राष्‍ट्रीय सुरक्षा निधि बनाने की बात की थी। अब गृह मंत्रालय चाहता है कि NISF अलग से बने और वही उसे मैनेज करे। एक मेमोरेंडम में मंत्रालय ने कहा, “राज्‍यों की आंतरिक सुरक्षा में साझा जिम्‍मेदारी है लेकिन रक्षा में नहीं।”
राज्‍यों के पैसे से बनेगा इंटरनल सिक्‍योरिटी फंड
मंत्रालय ने कहा कि राज्‍यों और केंद्रशासित प्रदेशों पर 52 हजार करोड़ रुपये से ज्‍यादा का बकाया है। यह आंकड़ा जनवरी 2020 तक वहां सेंट्रल पैरामिलिट्री फोर्सेज की तैनाती का खर्च है। गृह मंत्रालय उसी पैसे से यह निधि शुरू करना चाहता है। 15वें वित्‍त आयोग ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में पुलिस ट्रेनिंग और हाउसिंग से लेकर हेल्‍थ, रूरल समेत कई सेक्‍टर्स के लिए अलग-अलग ग्रांट देने की सिफारिश की थी। गृह मंत्रालय को लगता है कि इसमें साइबर क्राइम डिटेक्‍शन भी शामिल किया जाना चाहिए। वह कई तरह के आईटी टूल्‍स और रियल टाइम सर्विलांस और इंटेलिजेंस गैदरिंग की क्षमता हासिल करने को भी सेक्‍टर्स का हिस्‍सा बनाना चाहता है।
पैरामिलिट्री फोर्सेज की तैनाती का खर्च देते हैं राज्‍य
पुलिस राज्‍यों/केंद्रशासित प्रदेशों के अधीन (दिल्‍ली अपवाद) होती है लेकिन केंद्र भी 5 तरह की पैरामिलिट्री फोर्स रखता है। उन्‍हें खास तरह के काम के लिए ट्रेन किया गया है और आपातकालीन स्थितियों या बड़े कार्यक्रम के वक्‍त तैनात किया जाता है। इन फोर्सेज को मेंटेन केंद्र करता है मगर तैनाती का खर्च राज्‍य भी देते हैं।
NCRB भी बना रहा अपना सिस्‍टम
नैशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्‍यूरो (NCRB) पूरे देश के थानों और उनके डेटाबेसेज को जोड़ने का कार्यक्रम चला रहा है। दिसंबर 2019 तक क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्‍टम (CCTNS) पर 1,680 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे। NCRB का प्‍लान दुनिया का सबसे बड़ा ऑटोमेटेड फेशियल रिकग्निशन सिस्‍टम लाने का भी है।
-एजेंसियां

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