संसदीय समिति के सामने गूगल ने माना, यूजर्स की बातें सुनती है कंपनी

सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसद की स्थायी समिति के समक्ष पहली बार गूगल ने यह माना है कि कंपनी यूजर्स की कुछ बातें सुनती है।
दरअसल फोन, इंटरनेट पर प्राइवेसी को लेकर कई बार सवाल खड़े होते रहे हैं। यह न जाने कितनी बार कहा गया है कि आपके फोन में जो डाटा है, वो सिर्फ आपके पास ही नहीं है। जैसे-जैसे भारत में इंटरनेट का दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ही इसको लेकर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। डिजिटल युग में आपकी प्राइवेसी कितनी यह बड़ा सवाल है।
फेसबुक और गूगल के अधिकारियों ने सोशल मीडिया मंचों के दुरुपयोग के मुद्दे पर मंगलवार को सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसद की स्थायी समिति के समक्ष अपना पक्ष रखा। इस दौरान गूगल से संसदीय समिति ने पूछा कि कुछ सेवाओं पर संदेह होता है। ओके गूगल करके जब गूगल असिस्टेंट से पूछा जाता है या बात की जाती है तो क्या गूगल कर्मचारी भी इसे सुन सकते हैं। गूगल ने माना कि उनके कर्मचारी सुन सकते हैं।
हालांकि गूगल प्रतिनिधि ने माना कि संवेदनशील बातों को नहीं सुना जाता। इस बात पर सांसदों ने पूछा कि यह कैसे तय किया जाता है कि क्या संवेदनशील है और क्या नहीं। समिति की ओर से आईटी मंत्रालय के प्रतिनिधि बुलाने का फैसला किया गया। समिति के सभी सदस्यों ने एक सुर में इस बात को कहा कि सरकार के दिशा निर्देश को सभी कंपनियों का मानना चाहिए।
फेसबुक के भारत में लोक नीति निदेशक शिवनाथ ठुकराल और जनरल काउन्सल नम्रता सिंह ने समिति के समक्ष अपनी बात रखी। गूगल की तरफ से भारत में उसके सरकारी मामलों एवं लोक नीति के प्रमुख अमन जैन तथा निदेशक (विधि) गीतांजलि दुग्गल ने समिति के समक्ष अपना पक्ष रखा। संसदीय समिति की बैठक का एजेंडा नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना और सोशल मीडिया/ऑनलाइन समाचार मीडिया मंचों के दुरुपयोग को रोकना था।
सूत्रों के मुताबिक फेसबुक और गूगल के प्रतिनिधियों से कहा गया है कि उनकी मौजूदा डेटा सुरक्षा एव निजता संबंधी नीति में खामियां हैं और उन्हें अपने उपयोक्ताओं के डेटा की निजता और सुरक्षा के लिए कड़े मानक तय करने होंगे। सूत्रों ने बताया कि समिति के अध्यक्ष थरूर ने सोशल मीडिया मंचों पर महिला यूजर्स की निजता को लेकर चिंता प्रकट की। उन्होंने कहा कि उन्हें कई महिला सांसदों की तरफ शिकायतें मिली हैं।
-एजेंसियां

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