देश में सुरक्षा के तार नए सिरे से कसे जा रहे हैं: राजनाथ सिंह

मेरठ। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आज मेरठ में रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के योगदान को जमकर सराहा। राजनाथ सिंह ने आज मेरठ में रैपिड एक्शन फोर्स की रजत जयंती समारोह को संबोधित किया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि देश में सुरक्षा के तार नए सिरे से कसे जा रहे हैं। देश की आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ बनाए रखने और शांति बहाली की दृष्टि से रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की बढ़ती आवश्यकता को स्वीकारते हुए पांच और बटालियनें पहली जनवरी, 2018 से वजूद में आ जाएंगी।
इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की निगरानी के लिए भी आरएएफ की एक नई बटालियन मिलेगी।
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आज मेरठ में आरएएफ की रजत जयंती समरोह के दौरान पांच नए बटालियनों के गठन की घोषणा की। वाराणसी के साथ ही दिल्ली के बवाना, जलंधर, जयपुर और बेंगलुरु में आरएएफ की बटालियनें स्थापित करने का निर्णय हो चुका है। अब तक देश में 10 आरएएफ बटालियनें वजूद में हैं। इनमें उत्तर प्रदेश में मेरठ, इलाहाबाद के साथ ही अलीगढ़ भी शामिल है।
रैपिड एक्शन फोर्स तुंरत स्थिति संभालने में माहिर है। यह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की विशेष शाखा है। यह बटालियन दंगा नियंत्रण करने, भीड़ को काबू में करने, आपदा राहत एवं बचाव कार्य में विशेष कार्य करती है। इस मौके पर परेड का निरीक्षण करने, सलामी लेने के साथ ही राजनाथ सिंह ने रजत जयंती वर्ष पर आरएएफ का डाक टिकट जारी किया और कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया। उनके साथ केंद्रीय रिजर्व पुलिस बन के महानिदेशक राजेंद्र राय भटनागर और आरएएफ के आइजी केएस भंडारी भी मौजूद थे।
सांप्रदायिकता-जातिवाद विकास में बाधक
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सांप्रदायिकता, अराजकता, क्षेत्रवाद, जातिवाद ये सभी विकास में बाधक हैं। समाज की इन विभाजनकारी ताकतों को पस्त करने की जिम्मेदारी भी हमारे ऐसे फोर्स पर ही है। आरएएफ जवानों से मुखातिब होते हुए उन्होंने कहा कि आप लोग देश में एकता-अखंडता की रक्षा करने के साथ, शांति-व्यवस्था तो बनाते ही हो, अर्थ व्यवस्था सुदृढ़ीकरण में भी आपका परोक्ष योगदान है।
दंगा नियंत्रण को खोजने होंगे ‘लेस लीथल’ तरीके
मेरठ के वेदव्यासपुरी में 108 बटालियन प्रांगण में आरएएफ की परेड के निरीक्षण और सलामी के बाद उन्होंने कहा कि दंगा नियंत्रण में कई बार प्राणघाती तरीकों का कम से कम इस्तेमाल करना पड़े, इसके लिए एक बीपी आरएंडी कमेटी बनाई गई है। उपाय ढूंढे जा रहे हैं ताकि कम घातक (लेस लीथल), मनोवैज्ञानिक तरीकों और नई तकनीकी से दंगाई पर काबू पाया जा सके, भीड़ को तितर-बितर किया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि अपने कुशल प्रशिक्षण, संयम, धैर्य, निष्पक्षता, विवेक और नियमों के तहत चलकर ढाई दशक में आरएएफ ने जो विश्वसनीयता और साख बनाई है, वह राज्यों की पुलिस के लिए भी अनुकरणीय है। अब जमाना सिविलाइज्ड फोर्स का है, ऐसे में आरएएफ राज्यों की पुलिस के प्रशिक्षण में महती भूमिका अदा कर सकता है। 18 मिनट के संबोधन में उन्होंने कई बार आरएएफ की पीठ थपथपाई।
उन्होंने कहा कि कम संसाधनों में अधिकतम परिणाम देने वाली इस स्पेशलाइज्ड फोर्स ने भले ही मीलों का सफर तय किया है, लेकिन यह शुरुआत है।
-एजेंसी