GL बजाज के छात्रों ने इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी की बारीकियां जानीं

मथुरा। देश में हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार इनोवेशन और रिसर्च पर फोकस कर रही है। इसी कड़ी में जीएल बजाज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस मथुरा में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें यहां के प्राध्यापकों और छात्र-छात्राओं को आईपीआर के विशेषज्ञों ने इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी की बारीकियों से रूबरू कराया।

कार्यशाला में दीवांशु मिश्रा ने बताया कि डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एण्ड प्रमोशन (DIPP) पेटेंट एप्लिकेशंस की प्रोसेसिंग में लगने वाले समय को कम करने और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक बड़ी योजना बना रहा है। इसमें पेटेंट एग्जामिनर्स की संख्या बढ़ाने और ट्रेडमार्क एप्लिकेशंस की ऑनलाइन प्रोसेसिंग करने के साथ इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफिस को मजबूत करना शामिल है। श्री मिश्रा ने कहा कि अभी तक पेटेंट को अनुमति मिलने में लम्बा समय लगता था लेकिन अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि इसमें सुधार के प्रयास तीव्रगति से चल रहे हैं, इससे मेक इन इंडिया कैम्पेन में भी गति आएगी।

श्री मिश्रा ने बताया कि युवा छात्र-छात्राओं को पेटेंट्स और ट्रेडमार्क्स की जानकारी देने के लिए आईपीआर को एक विषय के तौर पर सोशल साइंसेज या इकोनॉमिक्स में शामिल करने पर भी एनसीईआरटी और सीबीएसई के बीच बात चल रही है। देखा जाए तो देश में फाइल होने वाली पेटेंट एप्लिकेशंस में से 75 फीसदी से अधिक विदेशी कम्पनियों के होते हैं। सरकार इन फाइलिंग्स में भारतीयों की हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है।

कार्यशाला में एनआईपीएल ट्रेनिंग अधिकारी वैभव विवेक ने बताया कि डीआईपीपी ट्रेडमार्क्स, पेटेंट्स, डिजाइंस और जियोग्राफिकल इंडिकेशंस के लिए नोडल डिपार्टमेंट है। देश के पेटेंट ऑफिस में एट्रीशन रेट ज्यादा होने की वजह से स्टाफ की कमी है। अधिकारी ने बताया कि ज्यादातर नए कर्मचारी ट्रेनिंग के बाद ऊंची सैलरी पर मल्टीनेशनल कम्पनियों में चले जाते हैं। सरकार टैलेंट को बरकरार रखने के लिए पे स्केल्स में संशोधन करने पर भी विचार कर रही है।

इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के कोऑर्डिनेटर डॉ. अमित पराशर ने बताया कि डीआईपीपी इंजीनियरिंग कॉलेजों में आईपीआर को एक पेपर के तौर पर शामिल करने के लिए एचआरडी मिनिस्ट्री और ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एज्यूकेशन से बात कर रहा है। सरकार आईपीआर पॉलिसी भी ला सकती है। संस्थान की निदेशक प्रो. (डॉ.) नीता अवस्थी ने आईपीआर विशेषज्ञों को स्मृति चिह्न भेंटकर उनका आभार व्यक्त किया। प्रो. अवस्थी ने कहा कि ऐसे जागरूकता बढ़ाने वाले कार्यक्रम समय की मांग हैं। इस कार्यशाला के आयोजन में संस्थान के प्राध्यापक डॉ. मंधीर वर्मा तथा डॉ. रमाकान्त का विशेष सहयोग और योगदान रहा। कार्यशाला का संचालन विपिन धीमान ने किया।

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