केडी हास्पीटल में दूरबीन विधि से हुई Gastric surgery

मथुरा। मल्टी स्पेशियेलिटी केडी हास्पीटल के सर्जरी विभाग के डा. मयंक माथुर के नेतृत्व वाली टीम ने Gastric surgery कर मुकेश के आमाशय के आधा सेंटी मीटर चैडे छेद को बंद कर दिया है। दूरबीन विधि से किये आॅपरेशन में टीम ने छेद को बंद करने के लिए इसमें औमेंटा डाला है। इससे मरीज को भविष्य में कोई परेशानी न हो। अब मरीज को न तो उल्टियां हो रही हैं और न ही पेट फूलने से भयंकर दर्द हो रहा है। आमाशय का हिस्सा डयूडीनियम में दो घंटे से अधिक समय तक किए गए दूरबीन विधि के आॅपरेशन के चलते मरीज एक सप्ताह में काम पर वापस लौट सकता है। जबकि ओपन सर्जरी में चार से पांच माह तक बेड रेस्ट करना पडता है।

मल्टी स्पेशियेलिटी केडी हास्पीटल के आकष्मिक विभाग में दूरबीन विधि से की Gastric surgery

अन्य हास्पीटल में ओपन सर्जरी में खर्च होते डेढ लाख लेकिन अब खर्च हुए मात्र पंद्रह हजार रुपये

केडी हास्पीटल के वार्ड में मौजूद 35 वर्षीय मुकेश और उसके परिजनों ने बताया कि वह कुछ दिनों से उल्टियां कर रहा था। उसका पेट फूल रहा था। पेट में भयंकर दर्द होने की वजह से वह चीखने-चिल्लाने को विवश था। इसी से उसके परिजन उसे केडी हास्पीटल की आकस्मिक सेवा में देर रात को लेकर आए। यहां चिकित्सकों ने जांच कराने के बाद पता लगाया कि मरीज के आमाशय के निकट स्थित डयूडीनियम में बारीक आधा सेमी का सूराख है। इसी से उसे ये परेशानियां हो रही हैं। चिकित्सकों ने परिजनों की सहमति से आॅपरेशन करने का निर्णय लिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने परिजनों को दूसरे चिकित्सालयों में होने वाली ओपन सर्जरी आॅपरेशन की परेशानी जैसे चार-पांच माह में काम पर लौट पाना, आॅपरेशन में काफी लम्बा चीरा लगना और दो से 1.5 लाख रुपये तक खर्च होने की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने दूरबीन विधि से मात्र सात दिन में मरीज का काम पर लौटना, छोटे-छोटे तीन चीरा लगना और मात्र 15 हजार रुपये का खर्चा होने की बात समझाई तो परिजनों ने दूरबीन विधि से आॅपरेशन कराना स्वीकार किया। आॅपरेशन करने वाली टीम में डा. मयंक माथुर, डा. रवि माथुर, डा. भुवनेश, एनथिएस्ट डा. मंजू सक्सेना, डा. संतोष गुप्ता, सहायक राजेश कुमार, पवन शर्मा, दिनेश, अंशुल और प्रतिभा शामिल रहे।

केडी हास्पीटल में सेवा में तत्पर है काबिल सर्जनों की टीम-डा. मयंक माथुर
मथुरा। मल्टी स्पेशियेलिटी केडी हास्पीटल की ओपीडी में मौजूद डा. मयंक माथुर ने एक सवाल के जवाब में बताया कि आहार नाल में इस तरह के सूराख बीडी-सिगरेट पीने वालों और सेहत बनाने के लिए स्टीराइड्स का इस्तेमाल करने वालों के अक्सर हो जाते हैं। इसी से ऐसी चीजों के इस्तेमाल से बचें। उन्होंने लोगांे से कहा कि वे दिल्ली-आगरा जाने के बजाय जटिल से जटिल मामलों को लेकर केडी हास्पीटल में आएं। यहां एक से एक काबिल सर्जनों की टीम आपकी सेवा में तत्पर है।

मरीजों को चिकित्सालय पहुंचाना भी पुण्य का कार्य-डा. रामकिशोर अग्रवाल
आरके एजुकेशन हब के चैयरमेन डा. रामकिशोर अग्रवाल, वाइस चैयरमेन पंकज अग्रवाल और एमडी मनोज अग्रवाल ने कहा कि आमाशय का आॅपरेशन कर सूराख को बंद करना अपने आप में दुर्लभ केस है। लोगों को केडी हास्पीटल में हो रहे ऐसे केसों को समझ कर अपने आस-पास ऐसे ही परेशान लोगों को केडी हास्पीटल का रास्ता दिखाना चाहिए। इससे उनकों को स्वास्थ्य लाभ के बाद सुकून से जीवन गुजारना संभव हो सके। ये कार्य भी मानवता की सेवा की श्रेणी में आता है। जो कि अपने आप में पुण्य का कार्य है। फोटो परिजन-केडी हास्पीटल में मरीज मुकेश के आमाशय के सूराख को बंद करने में जुटे डा. मयंक माथुर, डा. रवि माथुर, डा. भुवनेश और अन्य। ————–

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