पूर्व राष्ट्रपति बुश ने कहा, अफगानिस्‍तान से अमेरिकी सैनिकों को बुलाने के परिणाम अविश्वसनीय रूप से बुरे होंगे

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने अफ़ग़ानिस्तान से नेटो सेनाओं की वापसी को ‘एक ग़लती’ बताया है.
उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन की अफ़ग़ान नीति की भी आलोचना की है और कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों को बुलाने के परिणाम अविश्वसनीय रूप से बुरे होने वाले हैं.
जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है, जब यह दिखाई दे रहा है कि तालिबान जल्द ही काबुल में अमेरिका समर्थित अफ़ग़ानिस्तान सरकार को पलट सकता है.
विदेशी सैनिकों के लौटकर जाने की घोषणा के बाद से ही तालिबान लगातार आगे बढ़ रहा है. अफ़ग़ानिस्तान के कई ज़िलों पर उसने कब्ज़ा कर लिया है. पड़ोसी देशों की सीमा पर स्थित कई प्रमुख अफ़ग़ान चौकियाँ भी उसके कब्ज़े में हैं, जिसकी वजह से अफ़ग़ान सरकार लगातार कमज़ोर पड़ रही है.
इस परिस्थिति के बारे में एक जर्मन समाचार प्रसारक द्वारा यह पूछे जाने पर कि ‘अफ़ग़ानिस्तान से अपने सैनिकों को बुलाकर अमेरिका ने कहीं कोई ग़लती तो नहीं की?’
जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने कहा, “मुझे लगता है कि ये एक ग़लती है क्योंकि मैं मानता हूँ कि अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों को बुलाने के परिणाम अविश्वसनीय रूप से बुरे होने वाले हैं.”
तालिबान की वापसी
बुश प्रशासन ने ही साल 2001 में अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान शुरू किया था और वो अभियान मुख्यत: तालिबान की तानाशाही के ही ख़िलाफ़ था लेकिन अब जबकि अमेरिकी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान से लौट रहे हैं, तो वही दौर एक बार फिर लौटता दिख रहा है.
अपने इंटरव्यू में पूर्व राष्ट्रपति बुश ने उन अफ़ग़ान दुभाषियों और उनके परिवारों की भी चिंता की, जिन्होंने इतने वर्षों तक अमेरिका और नेटो सेनाओं की ज़मीनी स्तर पर मदद की.
उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि इन लोगों को बस मरने के लिए छोड़ दिया गया है, जिन्हें अब हर वक़्त उन निर्दयी और नृशंस लोगों से ख़तरा है. उनके बारे में सोचकर मुझे तक़लीफ़ होती है.”
बुश से पहले, बाइडन प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी ‘अफ़ग़ानिस्तान में लगातार बिगड़ रही सुरक्षा की स्थिति’ पर चिंता ज़ाहिर की थी क्योंकि तालिबान ये दावा कर रहा है कि उसने अफ़ग़ानिस्तान के 85 प्रतिशत हिस्से पर अपना कब्ज़ा जमा लिया है.
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि कट्टरपंथी इस्लामिक समूह, तालिबान ने बीते सिर्फ़ एक सप्ताह में अफ़ग़ानिस्तान के क़रीब 10 प्रतिशत हिस्से पर अपना कब्ज़ा जमा लिया. इन रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अफ़ग़ानिस्तान के 407 ज़िलों में से 195 पर पूरी तरह तालिबान का कब्ज़ा है. साथ ही 129 ज़िलों में कब्ज़ा करने के लिए संघर्ष जारी है.
बाडइन को तालिबान की जीत पर संदेह
इस तेज़ी से बढ़ते तनाव के बावजूद, अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों के लौटने की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं आया है. अमेरिकी प्रशासन के अनुसार सोमवार को भी अमेरिकी सैनिकों का एक बड़ा जत्था अफ़ग़ानिस्तान से वापस लौट गया.
अमेरिका पहले ही कह चुका है कि 31 अगस्त तक अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद सभी अमेरिकी सैनिक वापस लौट जायेंगे.
पिछले गुरुवार को अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने दोहराया था कि 9/11 की 20वीं वर्षगांठ के अवसर पर अमेरिका का अफ़ग़ान सैन्य अभियान पूरी तरह समाप्त हो जायेगा.
अपने इस भाषण में बाइडन ने कहा था कि “तालिबान पूरे देश पर कब्ज़ा कर ले और पूरे देश को चलाये, इसकी संभावनाएं बहुत कम हैं. मैं नहीं मानता कि 75 हज़ार तालिबान लड़ाके तीन लाख अफ़ग़ान सैनिकों पर भारी पड़ेंगे.”
इसके अलावा उन्होंने कहा कि “अफ़ग़ानिस्तान की रक्षा करने की ज़िम्मेदारी अफ़ग़ान प्रशासन और अफ़ग़ान सुरक्षा बलों की है. हालांकि ये सवाल भी है कि क्या वो यह करने की हिम्मत जुटा पायेंगे.”
इससे पहले बाइडन ने कहा था कि “अफ़ग़ानिस्तान का भविष्य क्या होगा, ये अफ़ग़ान लोग ही बेहतर तय कर सकते हैं.”
अन्य पूर्व राष्ट्रपतियों ने क्या कहा?
बुश ने अपने इंटरव्यू में अमेरिका के सहायक रहे अफ़ग़ान दुभाषियों को लेकर जो चिंता जताई, उसके बारे में बाइडन प्रशासन कह चुका है कि उन्हें और उनके परिवारों को स्पेशल वीज़ा प्रोग्राम के तहत उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जायेगी.
अपने हालिया भाषण में जो बाइडन ने बताया था कि अफ़ग़ान दुभाषियों में से आधों ने देश छोड़ने की इच्छा ज़ाहिर की है. हालांकि, ये अब तक स्पष्ट नहीं है कि इन अफ़ग़ान नागरिकों को अस्थायी रूप से कहाँ शिफ़्ट किया जायेगा.
अप्रैल में जब जो बाइडन ने अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी सैन्य अभियान समाप्त होने की घोषणा की थी, तब उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने इस बारे में दोनों पूर्व राष्ट्रपतियों, बराक ओबामा और जॉर्ज डब्ल्यू बुश से बात की है.
तब बराक ओबामा ने जो बाइडन ने निर्णय को सही ठहराया था. वहीं पिछले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अमेरिकी सैनिकों को अफ़ग़ानिस्तान से बुलाये जाने की योजना को ‘एक सकारात्मक चीज़’ कहा था लेकिन बुश ने तब इस बारे में कोई आलोचनात्मक टिप्पणी नहीं की थी. कुछ जानकार मानते हैं कि सत्ता छोड़ने के बाद अपने परवर्तियों के काम पर टिप्पणी ना करने की अमेरिकी मर्यादा का पालन करते हुए बुश ने ऐसा किया था.
बुश की राय से असहमति
हालांकि, कुछ वक़्त पहले एक अमेरिकी न्यूज़ चैनल को दिये इंटरव्यू में बुश ने कहा कि “तालिबान के लौटने से अफ़ग़ान महिलाओं और लड़कियों को सबसे ज़्यादा परेशानी होने वाली है.”
अमेरिकी सोशल मीडिया पर बुश की अफ़ग़ानिस्तान पर ताज़ा टिप्पणी के ख़िलाफ़ खुलकर बोलने वालों की संख्या भी अच्छी खासी है.
लोग लिख रहे हैं कि बुश को ये नहीं दिख रहा कि 20 साल से अमेरिकी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में हैं क्योंकि उन्होंने ही अफ़ग़ानिस्तान सैन्य अभियान को अंजाम तक पहुँचाये बिना इराक़ में मोर्चा खोल दिया था.
कुछ लोगों ने लिखा है कि अल-क़ायदा को ख़त्म करने के मिशन को एक व्यापक मिशन में बदल देना, बुश की सबसे बड़ी ग़लती थी जिसकी वजह से इतने वर्षों तक अमेरिकी सैनिकों को अफ़ग़ानिस्तान में रहना पड़ा.
-एजेंसियां

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