बिहार के पूर्व DGP गुप्‍तेश्‍वर पांडे ने बताया, क्‍यों बने कथावाचक

पटना। बिहार के पूर्व डीजीपी व जेडीयू नेता गुप्तेश्वर पांडेय ने एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। पूर्व डीजीपी के चर्चा में रहने का कारण है उनका कथावाचक अवतार है।
रविवार को गुप्तेश्वर पांडेय ने अपने इस नए अवतार को लेकर कहा है कि एक समय ऐसा आता है जब आप जीवन के उद्देश्य को जानना चाहते हैं और ईश्वर को जानना चाहते हैं। मैं कोई अपवाद नहीं हूं। मेरी दिलचस्पी अब भगवान में है और यह परिवर्तन अचानक नहीं हुआ है।
उन्होंने बताया कि मैं 14 साल की आयु से ही हनुमान जयंती जैसे अलग-अलग मौकों पर लोगों को मंदिर में प्रवचन सुनाया करता था। आध्यात्म में मेरी शुरू से रुचि रही है। इसमें नया कुछ नहीं है। सेवा अवधि में भी मैंने कई अनुष्ठानों में हिस्सा लिया, लेकिन ड्यूटी के दौरान ऐसे कथा कहने की इजाजत नहीं थी, इसलिए मैंने तभी ऐसा नहीं किया। मेरा मानना है कि ईश्वर के चरणों में जगह पाना इंसान का अंतिम लक्ष्य है। इसमें न्यूज जैसी कोई चीज नहीं है, लेकिन मीडिया का धन्यवाद उन्होंने मेरे निजी जिंदगी को जनता तक पहुंचाया।
गौरतलब है कि फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद रिया चक्रवर्ती को लेकर दिए बयान को लेकर पूर्व डीजीपी ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। इसके बाद बिहार विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने डीजीपी के पद से वीआरएस ले ली थी। चर्चा थी कि वे चुनाव लड़ेंगे लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। अब सोशल मीडिया पर उनका कथा करते हुए वीडियो वायरल हो रहा है।
कौन हैं गुप्तेश्वर पांडेय
मूल रूप से बिहार के बक्सर जिले के रहने वाले गुप्तेश्वर पांडेय 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने डीजीपी बनने से पहले एएसपी, एसपी, एसएसपी, आईजी और एडीजी के तौर पर बिहार के 26 जिलों में अपनी सेवाएं दीं। पांडेय ने 2009 में बक्सर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए वीआरएस लिया लेकिन टिकट मिला नहीं तो वापस सेवा में आने की अर्जी दी। इसे 9 महीने बाद नीतीश सरकार ने मंजूर कर लिया था। इसके बाद 2020 में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने दोबारा वीआरएस ली लेकिन इस बार भी उनके हाथ निराशा लगी।
-एजेंसियां

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