पूर्व मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त कुरैशी ने दी चीन को चिढ़ाने की सरकार को एक सलाह

नई दिल्‍ली। बॉर्डर पर आंख दिखा रहे चीन को कैसे चिढ़ाया जा सकता है? भारत ने हाल ही में 59 चीनी ऐप्‍स पर बैन लगाया। उससे चीन तिलमिला गया। अब उससे भी बड़े एक्‍शन की सलाह देते हुए देश के पूर्व मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त डॉ. एसवाई कुरैशी ने मजेदार आइडिया दिया है।
रिटायर्ड ब्‍यूरोक्रेट ने एक वायरल मैसेज को ट्वीट करते हुए कहा कि दिल्ली में जिस रोड पर चीनी दूतावास है, उसका नाम बदलकर ‘दलाई लामा मार्ग’ कर देना चाहिए। कुरैशी ने अपने ट्वीट में कहा कि ऐसा करने से 59 ऐप को बैन करने से भी ज्‍यादा भीषण प्रतिक्रिया आएगी।
कुरैशी के ट्वीट पर लोगों ने भी ली चीन की मौज
कुरैशी के इस हल्के-फुल्‍के ट्वीट पर कुछ लोगों ने कहा कि ऐसे गंभीर मुद्दे पर इस तरह की टिप्‍पणी से बचना चाहिए। कई लोगों ने इसे 100 फीसदी असरदार बताते हुए जल्‍द से जल्‍द लागू करवाने को कहा। शमशेर अहमद नाम के एक यूजर ने लिखा कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दलाई लामा से मिलना चाहिए और उनके नाम पर एक छात्रृवृत्ति की घोषणा करनी चाहिए।’ कुछ यूजर्स ने दलाई लामा को भारत रत्‍न से नवाजने का सुझाव भी दिया।
59 ऐप्‍स पर बैन से चिढ़ गया चीन
भारत ने TikTok, WeChat, Weibo समेत 59 चीनी ऐप्‍स पर बैन लगा दिया था। चीन ने इसपर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसे कदमों से व्‍यापारिक रिश्‍ते खराब होते हैं। ड्रैगन की ओर से ग्‍लोबल ट्रेड नियमों का उल्‍लंघन बताया गया जबकि खुद चीन में गूगल, ट्विटर और फेसबुक जैसी वेबसाइट्स बैन हैं। सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार सरकार ने उन 59 मोबाइल एप्स को प्रतिबंधित किया है जो भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरनाक थे।
चीन ने दलाई लामा के साथ किए बड़े अन्‍याय
दलाई लामा ने 1995 में बौद्ध धर्म में दूसरे सबसे पवित्र भिक्षु और पंचेन लामा के पुनर्जन्म के तौर पर तिब्बत में रहने वाले छह वर्षीय गेधुन चोकेई न्यिमा को चुना था। चीन सरकार ने हालांकि अपनी पसंद का चयन किया। वहीं गेधुन चोकेई 1995 से लापता है और इसे दुनिया का सबसे कम उम्र का राजनीतिक कैदी माना जाता है। वर्तमान दलाई लामा का जन्म ल्हामो थोंडुप के रूप में 6 जुलाई, 1935 को तिब्बत के तकसीर क्षेत्र में एक किसान एवं घोड़ा व्यापारी के एक परिवार में हुआ था। जब वह दो साल के थे, तब बौद्ध अधिकारियों का एक दल उनके गांव में पहुंचा। इस समय 13वें दलाई लामा की मृत्यु हो चुकी थी और 14वां दलाई लामा बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। चार साल की उम्र में उन्हें तिब्बत की राजधानी ल्हासा ले जाया गया। जब चीनी सैनिकों ने 1959 में ल्हासा पर नियंत्रण कर लिया था तो दलाई लामा ने अपने कई समर्थकों के साथ तिब्बत से भागकर आने के बाद भारत में शरण ली।
-एजेंसियां

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