1999 के बाद पहली बार विराट टीम की कमान देसी coach के हाथ

नई दिल्‍ली। 1999 के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है, जब टीम इंडिया के साथ देसी कोच होगा और वो है टीम के coach रवि शास्त्री जो खुद वर्ल्ड कप विजेता टीम के सदस्य रहे हैं।

क्या आप जानते हैं कि 21वीं सदी आने के बाद से भारत के हर वर्ल्ड कप अभियान की कमान विदेशी का हाथ में थी?  सच है, ऐसा ही था।
सदी में कभी नहीं हुआ कि कोई भारतीय टीम का कोच रहा हो या फिर कोई वर्ल्ड कप विजेता टीम इंडिया के कोच के तौर पर जुड़ा हो।

2003 में जॉन राइट थे, जिनकी न्यूजीलैंड टीम कभी वर्ल्ड कप चैंपियन नहीं रही है, राइट न्यूजीलैंड के ही हैं।

2007 में ऑस्ट्रेलियाई ग्रेग चैपल टीम के कोच थे यानी एक और विदेशी। चैपल जिस दौर में खेला करते थे, तब ऑस्ट्रेलिया वर्ल्ड कप चैंपियन नहीं बना। पहली बार ऑस्ट्रेलिया ने 1987 में वर्ल्ड कप जीता था, तब तक चैपल को रिटायर हुए काफी वक्त हो गया था।

फिर गैरी कर्स्टन आए, दक्षिण अफ्रीका को वैसे भी चोकर्स कहा जाता रहा है। अफ्रीकी टीम कभी चैंपियन नहीं रही है लेकिन कर्स्टन के साथ भारतीय टीम जरूर चैंपियन बन गई।

2015 में जिम्बाब्वे के डंकन फ्लेचर कोच थे, जिम्बाब्वे की टीम को कुछ यादगार जीत के लिए जरूर जाना जाता है लेकिन चैंपियनशिप की दावेदार यह टीम कभी नहीं रही।

अब शास्त्री हैं। सदी में पहली बार किसी भारतीय के तौर पर। वो चैंपियन टीम के सदस्य भी रहे हैं। 1983 वर्ल्ड कप में वो टीम का हिस्सा थे।

1983 के वर्ल्ड कप में शास्त्री ने पांच मैच खेले थे। शास्त्री के बारे में यह तथ्य पता होना जरूरी है कि जब वो टीम इंडिया में आए, तो वो गेंदबाज थे। उन्होंने वर्ल्ड कप में खेले पांच मैचों में 21.75 के औसत से चार विकेट लिए। पांच पारियों में एक बार नॉट आउट रहते हुए 40 रन बनाए।

वो एक तरह से नंबर दस के बल्लेबाज थे। उनके बाद बलविंदर सिंह संधू ही बचते थे लेकिन दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अलग-अलग नंबर पर बल्लेबाजी की,  यहां तक कि ऑस्ट्रेलिया और वेस्ट इंडीज के खिलाफ मैचों में पारी की शुरुआत की।

रवि शास्त्री का टीम के साथ होना एक और वजह से अहम है। वो एक और बड़ी जीत का हिस्सा थे, जिसे वर्ल्ड कप के बराबर ही माना जाता है। 1985 में हुए बेंसन हेजेस कप में भी वो टीम का हिस्सा थे बल्कि तब वह चैंपियन ऑफ चैंपियंस बने थे. उन्हें ऑडी कार मिली थी, जिसकी उस वक्त क्या, अब भी चर्चा होती है। इस बार भी वो टीम का हिस्सा है। तब खिलाड़ी के तौर पर थे, अब कोच के तौर पर… वो भी सदी में पहली बार भारतीय टीम के भारतीय कोच बनकर।

-एजेंसी

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