1947 के बाद पहली बार कश्मीरी पंडितों ने किशनगंगा में किया पूजन

केरन सेक्टर/ कश्मीर। सेव शारदा कमेटी कश्मीर की ओर से एलओसी पर केरन में पहली बार श्राद्ध पूजन का आयोजन किया गया। शारदा दिवस की पूर्व संध्या पर किशनगंगा नदी किनारे रवींद्र पंडिता के नेतृत्व में पूजा अर्चना की गई। स्वामी नंदलाल आश्रम के अनुयायियों ने कुपवाड़ा के टिक्कर से केरन पहुंचकर श्राद्ध पूजा की। इस दौरान कश्मीर में हिंसा के शिकार लोगों के लिए भी श्राद्ध किया गया।

रवींद्र पंडिता ने बताया कि देश के विभाजन के बाद पहली बार पूजा की गई है। किशनगंगा नदी विभाजन से पहले वार्षिक शारदा यात्रा का रूट रहा है। 1948 में शारदा पीठ के अंतिम स्वामी नंदलाल कुपवाड़ा के टिक्कर आ गए थे। पूजा को सेना, पुलिस ने अनुमति दी थी। सेव शारदा कमेटी ने करतारपुर की तरह शारदापीठ की यात्रा शुरू करने की मांग की है।

रवींद्र पंडिता ने बताया कि शारदा पीठ – आदि शंकराचार्य का सर्वोच्च पीठ किशुनगंगा, मधुमती और सरस्वती नदी के तट पर स्थित है और यह मुज़फ़्फ़राबाद से लगभग 140 किलोमीटर दूर है। अंतिम यात्रा कलशमीरी संत स्वामी नंद लाल जी द्वारा की गई थी, जो वर्ष 1948 में शारदा गांव से कश्मीर के हमारे हिस्से में आई थी।

सेव शारदा कमेटी तीर्थयात्रा को फिर से खोलने के लिए प्रयास कर रहा है और साथ ही साथ शारदा-प्राचीनतम सभ्यता की खोज भी कर रहा है। पंडिता ने कहा कि इसने उपग्रह इमेजरी के लिए इसरो से संपर्क किया है ताकि सभ्यता की सीमा का पता चल सके और बहुत कुछ सैटेलाइट इमेजरी के जरिए हासिल किया जा सके। समिति ने पहले ही माननीय पीएम, एचएम और ईएएम को तीर्थयात्रा को फिर से खोलने के बारे में विशेष रूप से लिखा था।

– एजेंसी

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