पहले धर्म में धंधा, अब आपदा में अवसर तलाश रहे हैं रमाकांत

मथुरा। गोवर्धन स्‍थित विश्‍व प्रसिद्ध मुकुट मुखारबिंद मंदिर के रिसीवर की हैसियत से करोड़ों रुपए का घोटाला करने के बाद अब रमाकांत गोस्‍वामी आपदा में अवसर का लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
यह कहना है द इम्पीरियल पब्लिक फाउंडेशन’ नामक एनजीओ के अध्‍यक्ष रजत नारायण का।
यही वह एनजीओ है जिसने रामाकांत गोस्‍वामी द्वारा मंदिर के धन का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपए का घपला बाकायदा प्रेस कांफ्रेस करके सार्वजनिक किया था और जिसके आधार पर शासन स्‍तर से न सिर्फ SIT की जांच बैठाई गई बल्‍कि रमाकांत को मुख्‍य आरोपी मानते हुए एसआईटी ने एफआईआर भी दर्ज कराई।
दरअसल, आगरा से प्रकाशित दैनिक जागरण के 18 मई 2021 वाले अंक में गोवर्धन स्‍थित मुकुट मुखारबिंद के रिसीवर रमाकांत गोस्‍वामी के हवाले से पहले पन्‍ने पर ये खबर छपी थी- 

18 मई 2021 के दैनिक जागरण का समाचार
18 मई 2021 के दैनिक जागरण का समाचार

इस खबर को आधार बनाकर ही रजत नारायण ने कुछ सवाल खड़े किए हैं। जैसे कि-
1. रमाकांत गोस्वामी ने मुकुट मुखारबिंद मंदिर का रिसीवर नियुक्त होते ही सन् 2010 में सबसे पहले मंदिर के धन से अस्पताल बनाने के नाम पर एक कीमती ज़मीन ख़रीदी थी । रमाकांत ने इस ज़मीन की कीमत सर्किल रेट से कहीं अधिक देकर अपने ही कुछ लोगों को फायदा पहुंचाया, बावजूद इसके 10 साल बाद भी उस ज़मीन पर आज तक अस्‍पताल क्‍यों नहीं बन सका है?
2. रमाकांत गोस्‍वामी ने मंदिर के रिसीवर की हैसियत से कोरोना काल में गोवर्धन के लोगों, मंदिर के गरीब सेवायतों अथवा उनके परिजनों की कोई मदद की?
3. यदि की तो उसका कोई ब्‍यौरा जनता के सामने रखें और यदि नहीं की तो रमाकांत गोस्‍वामी को कुछ करने से पहले अब ऐसा समाचार छपवाने का ज्ञान कैसे प्राप्‍त हुआ जबकि कोरोना की दूसरी लहर भी लगभग गुजर चुकी है?
4. इस मुश्किल घड़ी में क्या रिसीवर रमाकांत गोस्वामी ने सिर्फ अखबारों की सुर्खियां बटोरने को यह घोषणा की थी?
5. क्‍या रमाकांत गोस्‍वामी अखबारों के जरिए खुद को समाजसेवी प्रचारित करके अपने ऊपर पहले से ही दर्ज घोटालों की FIR से बचने का प्रयास कर रहें हैं?
6 . या रामाकांत गोस्वामी ने ऐसी घोषणा इसलिए की है ताकि आपदा में अवसर का लाभ उठाते हुए यह फिर किसी बड़े घोटाले को अंजाम दे सकें?
रजत नारायण के अनुसार पिछले करीब 10 वर्षों में रमाकांत गोस्‍वामी ने 20 करोड़ से ज्यादा के घोटालों को अंजाम दिया है लिहाजा उनकी मंशा पर ऐसे प्रश्नचिन्‍ह लगना स्‍वाभाविक भी है और तार्किक भी, कि कहीं वह इस घोषणा के जरिये भी मंदिर के खाते में से फिर लाखों रुपए निकालने के फेर में तो नहीं हैं।
गौरतलब है कि पिछले घोटालों में एसआईटी द्वारा मुख आरोपी बनाए जाने के बावजूद रमाकांत गोस्‍वामी अब तक न सिर्फ गिरफ्तारी से बचे हुए हैं बल्‍कि रसीवर के पद पर भी काबिज हैं।
-Legend News

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