चीन द्वारा थोपे गये नए क़ानून के तहत हॉन्गकॉन्ग में पहली गिरफ्तारी

‘हॉन्गकॉन्ग में आज़ादी’ के नारे वाला पोस्टर लेकर प्रदर्शन में शामिल हुए एक शख़्स को चीन द्वारा थोपे गये नए क़ानून के तहत गिरफ़्तार किया गया है.
अधिकारियों के अनुसार, नए क़ानून के तहत ये पहली गिरफ़्तारी है.
ब्रिटिश शासन समाप्त होने की 23वीं सालगिरह मनाने के लिए कुछ प्रदर्शनकारी शहर में एकत्र हुए थे जिन्हें तितर-बितर करने के लिए पहले पुलिस ने इन लोगों पर मिर्च का स्प्रे किया, बाद में उन्हें वहाँ से खदेड़ दिया गया.
चीन द्वारा हॉन्गकॉन्ग में लागू किया गया ‘राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून’ कथित तौर पर अलगाव, तोड़फोड़ और आतंकवाद में शामिल लोगों को निशाना बनाने के लिए लाया गया है और इसके तहत जुर्म साबित होने पर आरोपी को जेल में उम्रकैद की सज़ा दी जा सकती है जबकि आलोचकों का कहना है कि चीन ने हॉन्गकॉन्ग के लोगों की आज़ादी छीनने के लिए इस विवादित क़ानून को लागू किया है, जिसकी चीन ने कभी गारंटी दी थी.
साल 1997 में हॉन्गकॉन्ग को ब्रिटेन ने चीन को वापस सौंप दिया था और उस वक़्त यह समझौता हुआ था कि चीन कम के कम पचास वर्ष तक हॉन्गकॉन्ग वासियों को प्राप्त कुछ स्वतंत्रताओं की रक्षा करेगा.
अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा है कि “चीन ने हॉन्गकॉन्ग के लोगों को 50 साल की आज़ादी का वादा किया था जिसे केवल 23 साल में ही चीन ने तोड़ दिया.”
हालांकि हॉन्गकॉन्ग शहर के नेता कैरी लैम ने कहा है कि ‘2019 में हुए व्यापक हिंसक प्रदर्शनों के बाद इस क़ानून से शहर में स्थिरता वापस लौटने में मदद मिलेगी.’
उन्होंने कहा, “ब्रिटेन के जाने के बाद, ये नया क़ानून चीन और हॉन्गकॉन्ग के संबंधों में अब तक की सबसे बड़ी तब्दीली है. इससे स्थिरता आयेगी.”
-BBC

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