वित्त मंत्री ने नए भारत के निर्माण को खोला राहतों का पिटारा, MSMEs की मजबूती के लिए 3 लाख करोड़ रुपये का पैकेज

नई दिल्‍ली। सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSMEs) को मजबूती के लिए 3 लाख करोड़ रुपये के कोलैटरल फ्री ऑटोमैटिक लोन देने का ऐलान किया है।
वित्त मंत्री निर्माल सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी देते हुए बताया कि MSMEs, कुटीर उद्योगों और गृह उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए छह नए कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि MSME सेक्टर के लिए 4 हजार करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी दी जाएगी जिससे 2 लाख कंपनियों को फायदा होगा।
1. MSME और बिजनेस के लिए 3 लाख करोड़ रुपये के लिए कोलैटरल फ्री ऑटोमैटिक लोन, 100%
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग, कुटीर उद्योग और गृह उद्योग मिलकर 12 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देते हैं। इनके लिए 3 लाख करोड़ रुपये का कोलैटरल फ्री ऑटोमैटिक लोन का प्रवाधान किया गया है। किसी को अपनी ओर से किसी तरह की गारंटी देने की जरूरत नहीं है। इसकी समय-सीमा भी चार वर्ष की होगी। पहले एक वर्ष में मूलधन वापस नहीं करना पड़ेगा। 31 अक्टूबर, 2020 से इस स्कीम का फायदा उठाया जा सकता है। इस योजना का लाभ लेकर 45 लाख यूनिट बिजनेस एक्टविटी दोबारा शुरू कर सकते हैं और उनके यहां नौकरियां बचाई जा सकती हैं।
2. MSME के लिए 20 हजार करोड़ रुपये का सबॉर्डिनेट डेट
एनपीए वाले और स्ट्रेस्ड MSME 20 हजार करोड़ रुपये का सबॉर्डिनेट लोन दिया जाएगा। इससे 2 लाख से ज्यादा यूनिट को लाभ मिलेगा।
3. MSME फंड ऑफ फंड्स के जरिए 50 हजार करोड़ रुपये का इक्विटी इन्फ्यूजन
जो MSME अच्छा कर रहे हैं और वो बिजनेस का विस्तार करना चाहते हैं, अपना आकार और क्षमता बढ़ाना चाहते हैं लेकिन उन्हें सुविधा नहीं मिल पा रही है, उनके लिए फंड ऑफ फंड्स के जरिए फंडिंग मिलेगी।
4. MSME की परिभाषा बदली गई
MSME की परिभाषा बदल दी गई है और वो उनके हित में बदली गई है।
1 करोड़ रुपये तक निवेश करके 5 करोड़ तक का व्यापार करने वाली इंडस्ट्री सूक्ष्म
10 करोड़ तक का निवेश और 50 करोड़ तक व्यापार करने वाली इंडस्ट्री लघु
20 करोड़ तक का निवेश और 100 करोड़ रुपये तक का व्यापार करने वाली इंडस्ट्री मध्यम
5.200 करोड़ रुपये के लिए ग्लोबल टेंडर की अनुमति नहीं
200 करोड़ रुपये तक की सरकारी खरीद में ग्लोबल टेंडर की अनुमति नहीं होगी। सरकार को घरेलू कंपनियों से टेंडर मंगवाने की बाध्यता होगी।
6. अन्य उपाय
MSMEs को ई-मार्केट लिंकेज किया जाएगा।
ट्रेड फेयर में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी
सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के पास उनका बकाया है तो उन्हें अगले 45 दिनों में भुगतान करवाने की कोशिश की जाएगी।
आगे बढ़ी आयकर रिटर्न तारीख़
पाँच लाख तक के रिफ़ंड चौदह लाख से ज़्यादा लोगों को अब तक भेज दिए गए हैं।
जो पेंडिंग रिफ़ंड हैं, चाहें वो चैरिटेबल ट्रस्ट के हों या एलएलपी के हों, इन्हें जल्द ही रिफ़ंड जारी कर दिए जाएंगे।
इनकम टैक्स की रिटर्न तारीख़ को 31 जुलाई 2020 और 31 अक्तूबर 2020 से बढ़ाकर 30 नवंबर 2020 और टैक्स ऑडिट को बढ़ाकर 30 सितंबर 2020 कर दिया जाएगा।
डेट ऑफ़ एडजस्टमेंट को भी 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया गया है।
31 मार्च 2021 को वर्जित हो रही तारीख़ को बढ़ाकर 30 सितंबर 2020 कर दिया गया है।
विवाद से विश्वास स्कीम को कोई अतिरिक्त चार्ज दिए बिना 31 दिसंबर 2020 तक बढ़ा दिया गया है।
टीडीएस दरों में कमी
कल से 31 मार्च 2020 तक टीडीएस दरों और टीसीएस दरों को मौजूदा दर से 25 प्रतिशत तक घटा दिया गया है।
जो टीडीएस दरें हैं वो सभी ग़ैर-सैलेरी वाले लोगों के लिए 25 प्रतिशत कम की गई हैं और इससे पचास हज़ार करोड़ रुपए का लाभ आम जनता को मिलेगा।
उदाहरण के लिए जो ग़ैर-वेतन भोगी सौ रुपए टीडीएस देते थे, अब उन्हें 75 रुपए ही देने होंगे, 25 रुपए की बचत होगी।
बिल्डर्स को प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए मिलेगा वक़्त
कोविड 19 का प्रभाव रियल स्टेट प्रोजेक्टों पर भी पड़ा है।
शहरी विकास मंत्रालय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह देगा कि प्रोजेक्ट की जो रजिस्ट्रेशन और कंपलीशन तारीख़ है उसे स्वतःसंज्ञान लेकर छह महीनों के लिए आगे बढ़ा दिया जाए।
25 मार्च इसकी अंतिम तारीख़ थी उसे बिना व्यक्तिगत आवेदन मंगवाएं छह महीने के लिए आगे बढ़ा दिया जाए।
ठेकेदारों को बैंक गारंटी में राहत
जहां एक ओर पहले दो सौ करोड़ तक के टेंडर ग्लोबल नहीं होंगे, अब उसके बाद, जो अभी हमारे कांट्रेक्टर देश भर में रेलवे का, सड़कों का, केंद्र सरकार का काम कर रहे हैं, उन्हें अगले छह महीनों के लिए राहत दी जा रही है ताकि उन्हें कोई ख़मियाज़ा न भुगतना पड़े।
जो सिक्यूरिटी जमा की जाती थी उसे आंशिक रूप से जारी किया जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर किसी ने 70 फ़ीसदी काम कर दिया है तो उसके एवज़ में बैंक गारंटी को रिलीज़ किया जा सकता है ताकि ठेकेदार के हाथ में पैसा आ सके ताकि वो आगे काम कर सके।
एनबीएफ़सी के लिए तीस हज़ार करोड़
ग़ैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी एनबीएफ़सी या फिर हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों और माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूट के लिए तीस हज़ार करोड़ की स्पेशल लिक्विडिटी स्कीम लाई जा रही है।
इससे इनके धन की आपूर्ति भी होगी, इनके माध्यम से हाउसिंग सेक्टर और एमएसएमई सेक्टर को बल मिलेगा और लाभ आम लोगों तक पहुंचेगा. इसकी गारंटी भारत सरकार देगी।
इपीएफ़ खाते में योगदान हुआ दस प्रतिशत
कर्मचारी और नियोक्ता ईपीएफ़ खाते में 12-12 प्रतिशत का योगदान करते हैं. अब सरकार ने इसे बदल कर दस प्रतिशत कर दिया है. इससे कुल मिलाकर 6750 करोड़ रुपए लोगों के पास आएंगे।
वित्त मंत्री ने कहा, “जिनका ईपीएफ़ का योगदान है, ऐसे संस्थानों के लिए और कर्मचारियों के लिए दस-दस प्रतिशत अगले तीन महीनों के लिए किया गया है लेकिन जो केंद्रीय सरकारी संस्थान हैं इनके लिए 12-12 प्रतिशत ही रहेगा।”
हम एमएसएमई की परिभाषा बदल रहे हैं: वित्त मंत्री
हम एमएसएमई की परिभाषा बदल रहे हैं ताकि उन्हें अपने आकार के बढ़ने की चिंता न हो, उन्हें क़द बढ़ने पर भी वही फ़ायदे मिलेंगे जो एमएसएमई रहते हुए मिल रहे थे। ये माँग कई सालों से चली आ रही थी। अब हम ये करने जा रहे हैं।
पहले 25 लाख से कम की उत्पादन यूनिट को माइक्रो इंडस्ट्री माना जाता था, अब एक करोड़ तक के निवेश की यूनिट को भी माइक्रो यूनिट माना जाएगा। एक करोड़ तक के निवेश वाली सर्विस सेक्टर की यूनिट भी माइक्रो में मानी जाएंगी। एक करोड़ से कम निवेश और पाँच करोड़ तक के कारोबार करने वाले उद्योग को माइक्रो माना जाएगा।
वहीं दस करोड़ तक के निवेश और 50 करोड़ तक का कारोबार करने वाली यूनिट को स्माल एंटरप्राइज़ माना जाएगा। मीडियम उद्योग के लिए बीस करोड़ तक का निवेश और सौ करोड़ तक के टर्नओवर का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री ने जो कल लोकल के लिए वोकल होने की बात कही थी. ये उसी के तहत किया जा रहा है। सभी एमएसएमई को ई-मार्केट के ज़रिए जोड़ा जाएगा। इसके अलावा व्यापार मेलों में कैसे एमएसएमई शामिल हो सकें, इसके लिए क़दम उठाए जाएंगे। जो हमारे सार्वजनिक केंद्र उपक्रम हैं, उनमें जो उनके लंबित पेमेंट है उन्हें 45 दिनों के भीतर किया जाएगा।
हम एक नया भारत बनाने जा रहें हैं
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में एक विज़न साझा किया है। ये विज़न हमारे समाज के कई वर्गों के साथ गहरी और विस्तृत चर्चा के बाद साझा किया गया है।
ये चर्चाएं मंत्रालयों और प्रधानंत्री कार्यालय में हुई हैं. ये सुनिश्चित किया गया है कि लोगों से मिले इनपुट को पैकेज में शामिल किया जाए।
इस पहल को ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ का नाम दिया गया है और मैं कई बार आत्मनिर्भर भारत शब्द का इस्तेमाल करूंगी।
‘ये पाँच अहम स्तंभों पर खड़ा होगा। इकोनॉमी, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी ड्रिवन सिस्टम, डेमोग्राफ़ी एंड डिमांड. हम इन पाँच स्तंभों पर ही आत्म निर्भर भारत को खड़ा करेंगे।’
बीते चालीस दिनों में वेंटिलेंटर, पीपीई और अन्य उपकरणों का उत्पादन बढ़ा है, हमारे पास ऐसा करना की क्षमता हैं।
मैं आपको सुधार के लिए उठाए गए कामयाब क़दमों के बारे में बता रही हूं।
हम एक नया भारत बनाने जा रहे हैं जो आत्मनिर्भर होगा।
-एजेंसियां

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