इतिहास से छेड़छाड़ करने वाली फ‍िल्मों से क्षत्रिय महासभा नाराज़

नई दिल्ली। वर्तमान समय में हिंदी सिनेमा में सनातन संस्कृति और क्षत्रिय समाज की भावनाओं को आहत करने की जैसे होड़ लगी हुई है। अकसर फिल्मों में देखने को मिल जाता है कि कैसे एक क्षत्रिय को विलेन बना दिया जाता है।

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजा राजेन्द्र सिंह के नेतृत्व में एक कोर कमेटी की बैठक हुई, जिसमें क्षत्रिय महापुरुषों पर बनाई जाने वाली फिल्मों पर विचार किया गया। सामाजिक संस्कारों की क्षति सबसे ज्यादा फिल्म उद्योग के माध्यम से हो रही है और इतिहास से छेड़छाड़ किया जाता है। अब क्षत्रिय समाज बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा और साथ ही किसी फिल्म में अश्लीलता सहन नहीं किया जायेगा। अश्लीलता से नवयुवकों पर दुष्प्रभाव पड़ता है जिससे भारतीय संस्कारों का हनन हो रहा है।

राष्ट्रीय मंत्री फिल्म विभाग के सर्मेन्द्र सिंह का कहना है कि हमारे समाज में बलात्कारी, अत्याचारी, घमंडी अमीर, धोखा देने वाला और क्रूर क्षत्रियों को दिखाया गया है। हमें नकारात्मक भूमिका में खलनायक के तौर पर प्रस्तुत किया गया। हमारे इत‍िहास में वीर महापुरूषों के वास्तविक तथ्यों से छेड़छाड़ कर मुगलों का महिमामंडन करने वाली फिल्में बनाई गईं। सच तो यह है कि बॉलीवुड में खुलकर क्षत्रियों के विरोध दिखाया गया है। जबक‍ि आपको साउथ सिनेमा में इंडस्ट्री में हर फिल्म में भारतीय सभ्यता, संस्कृति, मंदिर परिवार और एक अच्छी कहानी सबकुछ मिल जाएगा।

बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में कुछ ऐसे भी निर्माता और निर्देशक हैं जो ऐसे एजेंडे पर काम रह रहे हैं जिससे हमारे देश की छवि विश्व पटल पर धूमिल हो। अ. भ. क्ष. महासभा के सभी पदाधिकारियों ने जिसमें रा. उपाध्यक्ष डा.राजेश कुमार सिंह, प्रहलाद सिंह तोमर व जैनेन्द्र सिंह पवार, रा. म. कार्यकारी अध्यक्ष सुमन सिंह गहरवार, भावना सिंह, उमेश कुमार सिंह रा.महासचिव प्रमुख, संगठन महासचिव डा.संजीव सिंह, रा. महामंत्री और राष्ट्रीय प्रवक्ता शक्ति सिंह चंदेल, रा. सचिव फिल्म विभाग अभिनव कुमार सिंह, राष्ट्रीय सचिव व म.प्र.प्रभारी कृष्ण प्रताप सिंह, महेन्द्र सिंह राठौड़, मनमोहन सिंह राजावत, उत्तम कुमार सिंह, पदम सिह चौहान, बी.के.सिंह चौहान, राखी परमार, हेमलता चौहान सभी ने ऐसी फिल्मों का विरोध किया है, जो क्षत्रिय समाज तथा हमारी सभ्यता, संस्कृति देश और समाज की संप्रभुता को आहत करती हों।

सभी ने एक सुर से कहा क‍ि सिनेमा का समाज में सकारात्मक योगदान होना चाहिए, समाज के सभी धर्मों का सम्मान होना चाहिए, इतिहास से छेड़छाड़ नहीं होना चाहिए।

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