आगरा में यू टर्न ले रहे हैं आंकड़े, आज 35 नए केस सामने आए

आगरा। कोरोना से जंग में आगरा मॉडल की चर्चा के बीच यहां आंकड़े एक बार फिर यू-टर्न ले रहे हैं। आगरा में सोमवार को 35 नए केस सामने आए है जिसके बाद यहां कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 138 हो गई है। इससे पहले रविवार को आगरा में कोरोना के एकसाथ 12 नए मामले सामने आए थे। इसके अलावा फतेहपुर सीकरी से 14 नए केस मिले हैं। ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर कैसे पहले केस के बाद क्लस्टर रोकथाम रणनीति के तहत संक्रमण पर नियंत्रण के बावजूद जिले में कोरोना के मामले फिर से बढ़ रहे हैं।
केंद्र सरकार ने आगरा को बताया ‘रोल मॉडल’
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने शनिवार को दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान आगरा मॉडल को रोल मॉडल बताते हुए पूरे देश को इसे फॉलो करने को कहा था। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी तारीफ की और अगले ही दिन रविवार को आगरा में 12 नए कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ गए। इसके बाद आज भी 35 लोग पॉजिटिव पाए गए। इसी के साथ आगरा में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़कर 138 हो गई है, जो पूरे प्रदेश के जिलों में सबसे अधिक है।
पारस अस्पताल सबसे बड़ा हॉटस्पॉट
आगरा में जो नए पॉजिटिव केस सामने आ रहे हैं, उनमें एक निजी अस्पताल (पारस अस्पताल) और इसके संपर्क में आने वाले अधिक हैं। यह अस्पताल कोरोना का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बना हुआ है जहां से अकेले ही 20 मामले सामने आए हैं। अस्पताल में हाथरस, अलीगढ़ और फिरोजाबाद से भी मरीज आते हैं। प्रशासन के पास इनकी कोई जानकारी नहीं है।
ऐसे में प्रशासन ने 22 मार्च से 6 अप्रैल तक पारस अस्पताल में आने वाले लोगों को कंट्रोल रूम में जानकारी देने को कहा है। माना जा रहा है कि जब तक इन सभी के सैंपल नहीं हो जाते, खतरा मंडराता जा रहा है। यहां उपचार कराने वाले आगरा देहात में भी बड़ी संख्या में लोग हैं। स्टाफ में भी कई लोग देहात से आते हैं।
अस्पताल पर कार्यवाही न होने से उठे सवाल
इस अस्पताल में ढोली खार की 65 वर्षीय महिला किडनी की बीमारी का उपचार कराने के लिए भर्ती हुई थी। हालत में सुधार न होने पर उन्हें मथुरा के नयति हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया। वहां उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। पारस अस्पताल को सील कर दिया गया। मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया। यहां रोजाना 250 से 300 मरीज आते थे।
पारस अस्पताल का पूरा स्टाफ भी आता-जाता रहा। महिला में संक्रमण मिलने के बाद जांच उसके संपर्क में आए लोगों की जांच शुरू हुई तो 16 मामले सामने आ गए। अस्पताल को क्वारंटीन सेंटर बना दिया गया है लेकिन फिर भी लापरवाही के चलते अभी तक उसके खिलाफ कार्यवाही न होने के चलते सवाल उठ रहे हैं।
3 मार्च को आया था आगरा में पहला केस
आगरा में पहला संक्रमण 3 मार्च को आया था, जब इटली से लौटे आगरा के जूता व्यवसाई के परिवार के 6 सदस्यों में इसकी पुष्टि हुई। यूपी भर में कोरोना का यह पहला बड़ा मामला था। प्रशासन ने पहला काम विदेश से आए लोगों की जांच कराकर किया। 336 के सैंपल लिए गए। 11 लोगों में संक्रमण मिला।
ऐसे में जिला प्रशासन एकदम हरकत में आ गया और डीएम प्रभु एन सिंह ने तुरंत आगरा में विदेश से आए लोगों की सूची बनवाने की शुरुआत कराई और संक्रमित हो चुके परिवार के रिश्तेदारों और संपर्क में आए लोगों को क्वारंटीन कराया। इस परिवार के आसपास के आवासीय इलाके को हॉट स्पॉट घोषित कर दिया।
क्या है आगरा रोल मॉडल?
इन सबके बीच जिस आगरा मॉडल की चर्चा है, उसके बारे में जान लीजिए।
दरअसल, आगरा में संक्रमण रोकने के लिए क्लस्टर रोकथाम रणनीति की शुरुआत 2 मार्च से हुई। इसमें एपिसेंटर 1 और 2 के तहत 3 किमी में कंटेनमेंट और 5 किमी में बफर जोन बनाए गए हैं। एपिसेंटर 1 के क्षेत्र में 15 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल किए गए। हर केस की कॉन्टैंक्ट ट्रैसिंग हुई।
दो सदस्यों वाली 1248 टीमों को अभियान में उतारा गया, जिनमें आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता थीं। पूरे क्षेत्र के 1.6 लाख घरों में जाकर 9, 90, 691 लोगों की जांच हुई। 2500 लोगों में लक्षण मिले। इनमें से 36 ऐसे थे, जो 28 दिनों में विदेश यात्रा से लौटे थे। इसके अलावा हर क्षेत्र का माइक्रोप्लान बनाया गया और स्मार्ट सिटी केंद्र वॉररूम बना।
कहां हुई लापरवाही, उठ रहे सवाल
कोरोना से जंग में एक ओर आगरा मॉडल की भारत सरकार और राज्य सरकार तारीफ कर रही है, लेकिन मामले बढ़ने से अब इस लड़ाई में सवाल भी उठ रहे हैं कि आखिर प्रशासन कहां पर चूक रहा है, जिसकी वजह से आगरा में कोरोना मरीजों की संख्या 100 से ज्यादा हो गई है।
-एजेंसियां

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