चिकित्सालयों की धोखाधड़ी के विरोध में संगठित होकर लड़ें

नई द‍िल्ली। कोरोना के कारण रोगी की गंभीर स्थिति होने पर रोगी की प्राणरक्षा हो, इसलिए हम कोई विचार न कर रोगी को चिकित्सालय में भर्ती करते हैं लेकिन सरकार द्वारा निर्धारित की गई रोगी सेवा का दर, आवश्यक औषधि, वैकल्पिक औषधियां, हमारे अधिकार, वर्तमान कानून आदि ज्ञात न होने के कारण हमसे अत्यधिक पैसे लूटे जाते हैं।

संकट के समय अनेक लोक थक-हारकर लड़ने का विचार छोड़ देते हैं इसलिए लूटनेवालों का राज चलता है, ऐसे में यदि हम उपलब्ध कानून और औषधोपचार के संदर्भ में योग्य जानकारी प्राप्त करें, तो हम धोखाधड़ी से बच सकते हैं। इस हेतु कोरोना काल में होनेवाली धोखाधड़ी के विरोध में संगठित होकर लड़ना चाहिए। हम जिलाधिकारी, महानगरपालिका आयुक्त और पुलिस के पास परिवाद (शिकायत) कर दोषिषयों पर कार्यवाही के लिए प्रयास कर सकते हैं, ऐसा प्रतिपादन आरोग्य साहाय्य समिति के मुंबई जिला समन्यवक डॉ. उदय धुरी ने किया। वे ‘आरोग्य साहाय्य समिति’ आयोजित ‘कोरोना काल में लूट के शिकार : जानें अपना अधिकार !’, इस ‘ऑनलाइन विशेष संवाद’ में बोल रहे थे ।

पुणे स्थित ‘श्रीमती काशीबाई नवले मेडिकल कॉलेज और जनरल हॉस्पिटल’ की अचेतशास्त्र विशेषज्ञ डॉ. ज्योती काळे भी इस कार्यक्रम में सम्मिलित थीं । यह कार्यक्रम हिन्दू जनजागृति समिति के Hindujagruti.org इस जालस्थल से, साथ ही ‘ट्वीटर’ और ‘यू-ट्यूब’ के माध्यम से प्रसारित किया गया । यह हा कार्यक्रम 6632 लोगों ने देखा ।

इस परिसंवाद के आरंभ में हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळे के संदेश का वाचन किया गया। ‘समाजव्यवस्था उत्तम रखना, यह प्रशासन का कर्तव्य है लेकिन प्रशासन और समाज व्यवस्था भ्रष्ट होने के कारण, हमें उसके विरोध में आवाज उठाना पड़ रहा है ।’, ऐसा उन्होंने अपने संदेश में कहा । इस समय देश के विविध राज्यों के कुछ रोगी तथा रोगियों के रिश्तेदारों ने उनके साथ किस प्रकार धोखाधडी की गई, इसका अनुभव कथन किया। साथ ही कुछ रोगियों को समय से उपचार न मिलने के कारण उनकी मृत्यु हुई, ऐसा भी बताया।

इस संदर्भ में बोलते हुए डॉ. धुरी ने आगे कहा कि, निजी चिकित्सालयों में भारी मात्रा में लूट की जा रही है। रोगियों को लूटनेवाले ठाणे जिले के ‘ठाणे हेल्थकेयर’ और ‘सफायर’ इन दो चिकित्सालयों के विरोध में ‘आरोग्य साहाय्य समिति’ ने ठाणे महानगरपालिका आयुक्त के पास परिवाद (शिकायत) प्रविष्ट किया था। इन दोनों चिकित्सालयों से 16 लाख रुपए का दंड वसूल किया गया है लेकिन ऐसे चिकित्सालयों पर फौजदारी अपराध प्रविष्ट कर उन्हें रोगियों के पैसे वापस करने के लिए बाध्य करना चाहिए, तब जनता को खरा न्याय मिलेगा। इस हेतु हमें ‘ग्राहक मंच’ के पास परिवाद (शिकायत) करना चाहिए।

‘रेमडीसिव्हिर’ इंजेक्शन के संदर्भ में बोलते हुए डॉ. ज्योती काळे ने कहा कि, ‘रेमडीसिव्हिर’ इंजेक्शन को जीवनरक्षक के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है। गंभीर रोग न हुए लोगों को आरंभ के काल में इस इंजेक्शन का लाभ होता है। इस इंजेक्शन के फॅबी-फ्लू, फॅवीपीरॅवीर, स्टेरॉईड, प्रतिजैविके (अ‍ॅन्टी-बायोटिक), ऑक्सिजन आदि अनेक विकल्प हैं। इन सभी वैकल्पिक औषधियों से भी रोगी स्वस्थ होते हैं। यह प्रशासन और वैद्यकीय संगठन जनता को बताएं। इस समय जनता अपने अनुभव ‘आरोग्य साहाय्य समिति’ को बताएं, ऐसा आव्हान भी किया गया।

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