फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप: मेजबान भारत का पहला मुकाबला अमेरिका से

भारत की मेजबानी में पहली बार फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप खेला जा रहा है। भारत का पहला मुकाबला अमेरिका से है।
भारतीय टीम में शामिल 21 युवा सितारों के लिए यह खुद को साबित
करने और अपनी पहचान बनाने का बेहद खास मौका है। टीम के मुख्य कोच लुई नोर्टन डि माटोस को खिलाड़ियों के साथ तैयारी के लिए केवल आठ महीने का समय मिला है लेकिन उन्हें अपने खिलाड़ियों पर अच्छा प्रदर्शन करने का पूरा भरोसा है।
आइए नजर डालते हैं टीम के 21 खिलाड़ियों पर जो मौका मिलते ही कमाल दिखाने को बेताब होंगे 
16 साल के हैं अमरजीत लेकिन टीम की कमान उन्हीं को सौंपी गई है। मिडफील्डर के तौर पर खेलते हैं। मेक्सिको के खिलाफ दोस्ताना मुकाबले में स्कोर किया था, टीम नेतृत्व क्षमता में माहिर हैं और कोच माटोस के पसंदीदा खिलाड़ियों में शामिल हैं।
17 साल के धीरज टीम के गोलकीपर हैं और मणिपुर के रहने वाले हैं। कोच माटोस की गोलकीपर के तौर पर पहली पसंद धीरज ने गोवा में हुए एएफसी अंडर-16 क्वॉलिफायर में अच्छा प्रदर्शन किया था। धीरज रियल मैड्रिड के फैन हैं, पेत्र सेच और गुरप्रीत सिंह संधु को अपना आइडल मानते हैं।
मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले 16 साल के जितेन्दर टीम के उप-कप्तान हैं और कोलकाता टॉप डिविजन में यूनाइटेड स्पोर्ट्स क्लब के लिए खेलते हैं। उनका सपना है कि वह जल्द सीनियर टीम के लिए खेलें।
सिक्किम के कोमल थताल मिडफील्डर के तौर पर टीम में हैं। 17 साल के कोमल का नाम तब सुर्खियों में आया जब उन्होंने ब्रिक्स अंडर-17 कप में भारतीय टीम का एकमात्र गोल किया था। लेफ्ट-विंगर कोमल से काफी उम्मीदे हैं और वह बड़े मंच पर खुद को साबित करने का प्रयास करेंगे
महिपालपुर अकैडमी में अभ्यास करने वाले अनवर अली अंडर-12 और अंडर-14 स्तर पर भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। पंजाब के अनवर अपनी आंखों के कारण दोस्तों के बीच बिल्ला के नाम से मशहूर हैं। मिनर्वा पंजाब एफसी के सदस्य हैं।
मिडफील्डर निनथोएगंबा टीम में शामिल सबसे कम उम्र के खिलाड़ियों में से एक हैं। भारत के दिग्गज फुटबॉलर सुनील छेत्री के बड़े फैन हैं। वह मणिपुर के उन आठ खिलाड़ियों में शामिल हैं जो भारतीय अंडर-17 टीम में जगह बनाने में कामयाब हुए।
मणिपुर के सुरेश सिंह मिडफील्डर हैं और 7 अगस्त को ही 17 साल के हुए हैं। निकोलई एडम के समय में टीम के कप्तान थे। काफी प्रतिभावान हैं और भारतीय खेल प्रेमियों को उनसे काफी उम्मीदें होंगी।
भारतीय टीम में शामिल एनआरआई हैं नमित जो डिफेंडर के तौर पर खेलते हैं। भारत के स्काउटिंग हेड अभिषेक यादव ने ओवरसीज स्काउटिंग प्रोग्राम के दौरान उन्हें देखा था और नमित की प्रतिभा से वह खासा प्रभावित हुए। भारतीय डिफेंस की मजबूत कड़ी माने जा रहे हैं।
भारतीय टीम में शामिल दूसरे गोलकीपर हैं सनी धालीवाल। कोच माटोस ने उन्हें प्राथमिकता दी और नवाज की जगह उन्हें टीम में शामिल किया। भारत की ओर से खेलने के लिए उन्हें कनाडाई पासपोर्ट छोड़ना पड़ा और अब उनके पास भारतीय पासपोर्ट है।
16 साल के संजीव स्टालिन बेंगलुरु से हैं और डेड-बॉल के विशेषज्ञ माने जाते हैं। कई बार फ्री किक पर टीम के लिए गोल किए हैं। अपने पिता से फुटबॉल के गुर सीखे हैं और उन्हें ही अपना आइडल मानते हैं।
मणिपुर के जिकसन सिंह मिडफील्डर के तौर पर टीम में शामिल हैं। बेंगलुरु चरण के दौरान उन्हें डेंगू हो गया था लेकिन अब वह पूरी तरह फिट हैं। सुनील छेत्री को आइडल मानते हैं और उनके साथ खेलना चाहते हैं।
पंजाब के लुधियाना से हैं प्रभसुखन गिल। 16 साल के प्रभसुखन को मौका मिलना हालांकि धीरज या सनी के टीम में शामिल नहीं होने के बाद ही संभव हो सकता है। हालांकि उन्होंने इससे पहले मौका मिलने पर अच्छा प्रदर्शन किया है।
इंफाल में जन्मे 17 साल के डिफेंडर बॉरिस सिंह अपने आक्रामक खेल के लिए जाने जाते हैं। प्रतिभावान खिलाड़ी हैं और कई अहम मौकों पर भारतीय टीम के लिए गोल किए हैं।
राहुल प्रवीण टीम में शामिल केरल के एकमात्र खिलाड़ी हैं। अपने गांव में फुटबॉल के गुर सीखे। 17 साल के राहुल की किक काफी शानदार है और वही उनकी ताकत भी है।
पश्चिम बंगाल के रहीम अली फॉरवर्ड के तौर पर टीम में शामिल हैं। कई बार स्थानापन्न खिलाड़ी के तौर पर खेले लेकिन स्कोर करने में अहम भूमिका निभाई। उनसे उम्मीद रहेगी कि वह मैदान पर एक बार फिर अपना जलवा दिखाएं।
मणिपुर के मिडफील्डर नॉन्गदंबा नॉरेम ने 4 देशों के टूर्नमेंट में चिली के खिलाफ मुकाबले में भारतीय टीम का एकमात्र गोल किया था। शुरुआती करियर में वह गोलकीपर के तौर पर खेलते थे लेकिन बाद में उन्होंने अपने पिता के कहने पर अपनी तकनीक में बदलाव किया।
मणिपुर के ही मोहम्मद शाहजहां काफी मेहनती खिलाड़ी हैं और अपनी कड़ी मेहनत के कारण ही वह कोच मातोस के पसंदीदा खिलाड़ियों में से एक हैं। मिडफील्डर के तौर पर खेलते हैं।
लालेंगमाविया अपने दोस्तों के बीच माविया के नाम से मशहूर हैं और अहम मौकों पर गोल करने की उनमें प्रतिभा है। मणिपुर के माविया मिडफील्डर हैं और भारतीय टीम के सुपरसब कहे जाते हैं।
बेंगलुरु के 17 साल के हेंड्री एंटॉने पूर्व कोच निकोलाई एडम के पसंदीदा खिलाड़ियों में से एक हैं। यदि उन्हें मौका मिलता है तो वह खुद को साबित करने की पूरी कोशिश करेंगे।
17 साल के अनिकेत जाधव भारतीय टीम में शामिल इकलौते मराठी हैं और फॉरवर्ड के तौर पर खेलते हैं। कोल्हापुर के अनिकेत इससे पहले पुणे एफसी के लिए खेल चुके हैं।
17 साल के अभिजीत सरकार मिडफील्डर के तौर पर खेलते हैं और फुटबॉल के दीवाने राज्य पश्चिम बंगाल से आते हैं। वर्ल्ड कप में अच्छा प्रदर्शन कर वह अपने परिवार और देश के लिए कुछ करना चाहते हैं।
-एजेंसी