दिल्‍ली और उसके आसपास 8.5 या उससे भी अधिक तीव्रता वाले भूकंप की आशंका, 20 प्रतिशत बिल्डिंग ही बच पाएंगी

भू वैज्ञानिकों की नई स्‍टडी बताती है कि दिल्‍ली और उसके आस-पास 8.5 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप आ सकता है। दिल्ली के लिए यह खतरे वाली बात है क्योंकि भूकंप के लिहाज से यह काफी संवेदनशील है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस तीव्रता का भूकंप आया तो शहर की करीब 20 प्रतिशत बिल्डिंग ही बच पाएंगी। भूकंप के लिहाज से शहर इसलिए संवेदनशील है क्योंकि यह तीन फॉल्ट लाइनों- पर बसा हुआ है। ये फॉल्ट लाइन सोहना, मथुरा और दिल्ली-मुरादाबाद हैं। सबसे ज्यादा संवेदनशील गुड़गांव है जिसके आसपास सात फॉल्ट लाइन मौजूद है।
जीआरआईएचएच काउंसिल के संस्थापक मानित रस्तोगी ने कहा, ‘2001 गुजरात भूकंप के बाद दिल्ली को जोन तीन से जोन चार में शिफ्ट कर दिया गया। हालांकि, सारी इमारतें इसके पहले डिजाइन और बनाई गई थीं। मैं यह कहूंगा कि दिल्ली की सिर्फ 10 प्रतिशत इमारते हीं भूकंप को झेल सकती हैं।’
वैज्ञानिकों ने आगाह किया था कि हिमालय क्षेत्र में निकट भविष्य में उच्च-क्षमता वाले भूकंप की आशंका है जिसे ताजा स्टडी से बल मिल गया है। इस स्टडी में कहा गया है कि क्षेत्र में ‘बहुत अधिक खिंचाव’ की स्थिति से 8.5 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप आ सकता है।
बेंगलुरु स्थित जवाहर लाल नेहरू सेंटर फॉर ऐडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च के सिस्मोलॉजिस्ट और अध्ययन का नेतृत्व करने वाले सी. पी. राजेंद्रन ने कहा कि 1315 और 1440 के बीच आए भयानक भूकंप के बाद मध्य हिमालय का क्षेत्र भूकंप के लिए लिहाज से शांत रहा है, लेकिन भूगर्भिक क्षेत्र में काफी खिंचाव/तनाव की स्थिति पैदा हो गई है।
2008 में दिल्ली में कुछ पुरानी इमारतों को दुरुस्त करने का काम किया गया और 2015 में नेपाल में आए भूकंप के बाद दिल्ली सचिवालय, दिल्ली पुलिस और पीडब्ल्यूडी मुख्यालयों, लडलॉ कैसल स्कूल, विकास भवन, गुरु तेग बहादुर अस्पताल और डिवीजनल कमिश्‍नर के दफ्तर को मजबूत किया गया। हालांकि, दिल्ली सरकार की अधिकांश इमारतें भूकंप केंद्र में हैं। पीडब्ल्यूडी के सूत्रों का दावा है कि उन पर नियमित रूप से नजर रखी जा रही है और उनका रख-रखाव किया जा रहा है। सुरक्षा के लिए नियमित रूप से काम किया जा रहा है।
केंद्रीय भू विज्ञान मंत्रालय के एक पुराने अध्ययन में यमुना की बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्र में उन स्थानों को चिह्नित किया है जहां भूकंप का खतरा सबसे अधिक है जिनमें पूर्वी दिल्ली के घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके शामिल हैं। अन्य खतरे वाले इलाकों में लुटियंस की दिल्ली, सरिता विहार, पश्चिम विहार, वजीराबाद, करोल बाग और जनकपुरी है। सुरक्षित स्थानों में जेएनयू, एम्स, छतरपुर, नारायणा और वसंत कुंज है जो संभवतः भूकंप झेल सकते हैं।
-एजेंसियां

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