सती के श्राप का भय, नहीं रखा जाता Karva Chauth, अहोई अष्टमी का व्रत

मथुरा। पति की लम्बी उम्र के लिए रखा जाने वाला Karva Chauth का व्रत और बेटों के लिए मां अहोई अष्टमी का व्रत रखने से बचती हैं। ऐसी मान्यता है कि Karva Chauth व्रत इस गांव में एक शती के कारण शापित हैं। व्रत को न करने की इस गांव में यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। जब पति की लम्बी आयु के लिए सुहागिनें करवा चौथ का व्रत रख कर पूजा अर्चना करेंगी और रात के समय सुहागिनें चांद को अर्घ्य देंगी उस समय मथुरा से करीब 40 किलोमीटर दूर सुरीर गांव में सन्नाटा पसरा रहेगा।

कहा जाता है कि इस गांव में सती के श्राप से बचने के लिए इन दोनों व्रतों को महिलाएं नहीं रखती हैं। एक छोटा सा सती माता का मंदिर गांव में मौजूद है। महिलाएं इस मंदिर पर जाकर पूजा अर्चना करती हैं। गांव के मुहल्ला बाघा में ठाकुर समाज की बुर्जुग महिलाओं ने बताया कि यहां की महिलाएं वर्षों से दोनों व्रत नहीं करती हैं।

यहां आने वाली नवविवाहिताओं की इस व्रत को करने की इच्छा मन में ही रह जाती है। जब वह यहां आकर अपने से पहले गांव में ब्याहकर आईं महिलाओं को व्रत रखते नहीं देखती हैं तो वह भी वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को मानने लगती हैं। नयी नवेली विवाहिता रेखा का कहना कि शादी के बाद गांव में आने पर पता चला कि यहां यह दोनों व्रत नहीं रखे जाते हैं तो मन में दुख तो हुआ गांव की बुर्जुग महिलाओं के कहने पर इस परम्परा को निभाना भी जरूरी है।

एक दूसरी महिला का कहना था कि मान्यता है कि इस परंपरा को तोड़ने की हिम्मत करना तो दूर सोचना भी पाप है। यह हम सभी महिलाओं के दिलो दिमाग में गहरे से बैठा हुआ है। जब यह परंपरा इतने लम्बे समय से निभाई जा रही है तो इसका पालन करना ही ठीक होगा। इस परंपरा के पीछे जरूर कोई कारण छिपा होगा।

बुजर्गो की मानें तो सैकड़ों वर्ष पहले गांव रामनगला (नौहझील) का एक ब्राह्मण युवक अपनी पत्नी को गांव से विदा कराकर घर लौट रहा था। सुरीर में होकर निकलने के दौरान बाघा मोहल्ले में ठाकुर समाज के लोगों का ब्राह्मण युवक से भैंसा बुग्घी को लेकर विवाद हो गया। जिसमें इन लोगों के हाथों ब्राह्मण युवक की मौत हो गई थी। अपने सामने पति की मौत से कुपित मृतक ब्राह्मण युवक की पत्नी इन लोगों को श्राप देते हुए पति के साथ सती हो गई थी। इसे सती का श्राप कहें या बिलखती पत्नी के कोप का कहर, संयोगवश इस घटना के बाद मोहल्ले में मानो मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा हो, गांव कई जवान लोगों की मौत हो गई, गांव में महिलाएं विधवा होने लगीं। शोक, डर और दहशत से गांव में लोगों के परिवार में कोहराम मच गया। जिसे देख कुछ बुजर्ग लोगों ने इसे सती के श्राप का असर मानते हुए क्षमा याचना की और मोहल्ले में एक मंदिर स्थापना कर सती की पूजा-अर्चना शुरू कर दी।

ऐसा माना जाता है कि पति और पुत्रों की दीर्घायु को मनाए जाने वाले करवाचौथ एवं अहोई अष्टमी के त्योहार पर सती बंदिश लगा गई थी। तभी से त्योहार मनाना तो दूर इस गांव की महिलाएं पूरा साज-श्रृंगार भी नहीं करती हैं। उन्हें ऐसा करने पर सती के नाराज होने का भय सताता रहता है।

सुरीर क्षेत्र में सती के श्राप के कारण यहां के सैकड़ों परिवारों की विवाहिताएं इस दिन न तो कोई साज श्रंगार करती हैं और न ही व्रत रखती हैं।
इसी गांव की बुर्जुग महिला सुनहरी देवी ने बताया कि सती की पूजा अर्चना करने के बाद से गांव में मौतों का सिलसिला तो थम गया लेकिन सुहाग की सलामती के लिए रखा जाने वाला Karva Chauth और पुत्रों की रक्षा के लिए अहोई अष्टमी के व्रतों व त्योहारों पर सती के श्राप की वजह से लगी रोक आज भी जारी है। तभी से आज तक इस मौहल्ले में सैकड़ों परिवारों में कोई भी विवाहिता न तो साज श्रंगार करती है और न ही पति की दीर्घायु की कामना के लिए करवाचौथ का व्रत ही रखती है।

– सुनील शर्मा

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