परिवार व दोस्त हैं आत्महत्या के दुश्मन

कोविड १९ के प्रकोप से आज दुनिया बहुत बड़ी त्रासदी का सामना कर रही हैं| आये दिन लोगों की जान ले रहा हैं, वही दुनियाभर में एक ओर जहां विभिन्न तरह की बीमारियों से हर साल लाखों लोगों की जान जा रही हैं। वहीं, ऐसे लाखों लोग भी हैं जो किन्हीं वजहों से अपने खुद के जीवन के दुश्मन बन जाते हैं और आत्महत्या जैसा कदम उठते हैं। आत्महत्या सुनने भर से ही दिलों दिमाग में अजीब सी बैचेनी होने लगती है। जब सुबह अखबार उठाते हैं तो आत्महत्या की खबरों से दो चार होना ही पड़ता है।पुरी दुनिया में ८ लाख लोग आत्महत्या जैसा कदम उठाकर समाज की संरचना और सोच पर नए सिरे से बहस को जन्म देते हैं।भारत देश में भी आत्महत्या के मामले बढ़ते जा रहे हैं। आत्महत्या के पीछे वे आत्मघाती व्यवहार के लिए कई व्यक्तिगत और सामाजिक कारकों जैसे तलाक, दहेज, प्रेम सम्बंध, वैवाहिक अड़चन, अनुचित गर्भधारण, विवाहेतर सम्बंध, घरेलू कलह, कर्ज, गरीबी, बेरोजगारी, गंभीर बीमारी ,आर्थिक कमजोरी , सरकारी विभागो की निष्कियता और शैक्षिक समस्या आदि प्रमुख कारण होते हैं।
हर साल 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है। इसे मनाने का मकसद आत्महत्या के विरुद्ध जागरुकता फैलाना है। यह दिवस संदेश देता है कि आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोका जा सकता है।विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस साल 2003 से मनाया जा रहा है। इस दिवस की शुरुआत आईएएसपी (इंटरनेशनल असोसिएशन ऑफ सुसाइड प्रिवेंशन) ने की थी। इस दिवस को विश्व स्वास्थ्य संगठन और मानसिक स्वास्थ्य फेडरेशन को-स्पॉन्सर करते हैं।यह डाटा बताता है कि दुनियाभर में 79 फीसदी आत्महत्या निम्न और मध्यवर्ग इनकम वाले देशों के लोग करते हैं।

लोक स्वर की श्रीमती संध्या शर्मा कहती है आत्महत्या वह एक सेकंड है जब विचार उत्पन्न होता है और आदमी इतना घातक कदम उठा लेता है जिस पुरुष को हम लौह पुरुष कहते हैं देखा जाए वही अंदर से कितना कमजोर होता है यह डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों से पता चलता है की महिलाओं के मुकाबले में पुरुषों की संख्या अधिक है आप इसे इस तरह से भी कह सकती हैं कि ईश्वर ने और प्रकृति ने नारी को वह क्षमता दी है जो बड़े से बड़े कष्ट को बड़े धैर्य से सामना करती है आज अगर नारी पुरुष को संबल दे तो मुझे लगता है कि पुरुष इस तरह के घातक कदम नही उठाएंगे |
लोकस्वर के अध्यक्ष राजीव गुप्ता कहते हैं आज करोना महामारी में अनेक लोग नौकरी जाने के, व्यापार खत्म होने के, कर्जा देने से, स्वास्थ्यसे काफी चीजों से सामान्य दिनचर्या से अलग परेशानियों का सामना किया परंतु कई चिकित्सकों मनोचिकित्सक व सामाजिक संस्थाओं द्वारा वेब पर व व्हाट्सएप पर फेसबुक पर आदमी के परेशानी में

एक संभल व धैर्य दिया और यह बताया कि अगर वह अपने परिवार के साथ हंसता है बोलता है अपने दोस्तों के साथ अपनी बातें शेयर करता है और अपने शौक को को जिंदा रखता है तो वह आदमी आत्महत्या की तरफ सोच भी नहीं सकता है| ऐसे में अगर आप बहुत गौर से देखें दुनिया के हर ग्रंथ यह लिख रहे हैं कि आपका एक अजीज दोस्त होना चाहिए वह आपकी पत्नी भी हो सकती है |आपकी बहन हो सकती है| भाई हो सकता है| आपका दोस्त हो सकता है उनके साथ अगर आप अपनी परेशानियों को शेयर करते हैं तो आत्महत्या जैसे नपुंसक कार्य करने के लिए आप कभी भी प्रेरित नहीं होंगे मैं इन्हीं शब्दों के साथ सभी मनो चिकित्सकों का और सामाजिक संगठनों का जो कि समय-समय पर इस तरीके के मनोवैज्ञानिक कार्यक्रम करती हैं ताकि आदमी स्वस्थ रहें और आत्महत्या जैसा कदम ना उठाएं आपको एक बात और बता दूं कि जो लोग शाकाहारी शुद्ध भोजन पौष्टिक भोजन करते हैं उनके मन में इस तरीके की नकारात्मक विचार नहीं आते हैं इन्हीं शब्दों के साथ मैं समस्त विश्व के नागरिकों से अपील करना चाहता हूं कि समस्या का समाधान करें और दुनिया में लाखों लोग हैं जो परेशानियों का सामना कर रहे हैं|

– राजीव गुप्ता जनस्नेही,
परिवहन संपदा

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