SCO संपर्क समूह की बैठक में भारत ने अफगानिस्तानियों के सहयोग का आह्वान किया, पाकिस्‍तान को लगाई फटकार

नई दिल्‍ली। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तजाकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन की मीटिंग अफगानिस्तानियों के सहयोग का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में शांति की प्रक्रिया जारी है और हम अफगानियों को झुकने नहीं दे सकते। उन्होंने कहा कि शांति प्रक्रिया का जल्दी अमल में आना सबसे जरूरी है। दोहा, इस्तांबुल और मॉस्कों में हुए समझौतों के आधार पर हमें आगे बढ़ना होगा। अफगानिस्तान का पिछला इतिहास जैसा ही उसका भविष्य नहीं हो सकता है। हर नई पीढ़ी की अलग ही उम्मीदें होती हैं। हमें उन्हें गिरने नहीं देना है।
एस. जयशंकर ने रूस, चीन जैसे देशों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का हमेशा से यह मानना रहा है कि शांति प्रक्रिया अफगानिस्तान की लीडरशिप में और उनके ही द्वारा होनी चाहिए। पाकिस्तान के दखल और उसकी ओर से तालिबान के सहयोग को लेकर भारत और अफगानिस्तान दोनों ही चिंतित है। इस बयान से उन्होंने पाकिस्तान की ओर से तालिबान को मदद किए जाने पर भी निशाना साधा।
अफगानिस्तान के भारत में मौजूद राजयनिक फरीद मुमुंदजाय ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि तालिबान के नेता पेशावर और क्वेटा से काम करते हैं। यह सही नहीं है। ऐसी स्थिति खत्म होनी ही चाहिए। शंघाई सहयोग संगठन SCO के विदेश मंत्रियों की काउंसिल और अफगानिस्तान पर SCO संपर्क समूह की बैठक में हिस्सा लेने के लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर तजाकिस्तान के दुशांबे पहुंचे। न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक जयशंकर आज चीनी काउंटरपार्ट वांग यी के साथ मीटिंग कर सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक एस जयशंकर इस मीटिंग में पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) को लेकर चल रहे विवाद का समाधान निकालने पर जोर दे सकते हैं।
अफगानिस्तान के विदेश मंत्री से मुलाकात की
अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बीच तालिबान ने कई इलाकों पर कब्जा कर लिया है, कई जगहों से अफगान आर्मी और तालिबान के टकराव की खबरें भी आई हैं। इसी बीच दुशांबे में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद हनीफ अतमर से मुलाकात की। दोनों के बीच पॉलिटिकल, सिक्योरिटी और शांति प्रक्रिया पर चर्चा हुई।
50 डिप्लोमैट्स को वापस बुला चुका
यह बैठक ऐसे समय में हुई, जब तालिबान अफगानिस्तान के अधिकतर इलाकों को तेजी से अपने कंट्रोल में ले रहा है। पूरी दुनिया इस वक्त मामले को गंभीरता से ले रही है। भारत ने अफगान फोर्सेस और तालिबान के बीच जंग के मद्देनजर कंधार स्थित अपने वाणिज्य दूतावास से लगभग 50 राजनयिकों एवं सुरक्षाकर्मियों को वापस बुला लिया था।
-एजेंसियां

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