चीन से सटे अरुणाचल प्रदेश में सेला सुरंग परियोजना की खुदाई का काम पूरा

अरुणाचल प्रदेश में सेला सुरंग परियोजना के लिए खुदाई का काम पूरा हो गया है। बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने शनिवार को एक सुरंग के लिए आखिरी धमाका किया। सेला टनल 13,000 फीट से ज्‍यादा की ऊंचाई पर बनी दुनिया की सबसे बड़ी डबल लेन सुरंग होगी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार सेला टनल प्रोजेक्‍ट अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। चीन से सटे अरुणाचल प्रदेश में यह सुरंग सैनिकों को तवांग सेक्‍टर के फॉरवर्ड एरियाज तक जल्‍द पहुंचने में गेमचेंजर साबित होगी। एक बयान में रक्षा मंत्रालय ने कहा कि 980 मीटर लंबी एक सुरंग (टनल 1) के लिए आखिरी ब्‍लास्‍ट वर्चुअल सेरेमनी के जरिए हुआ। रिमोट के जरिए बटन BRO के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल राजीव चौधरी ने दबाया।
सेला टनल प्रोजेक्‍ट क्‍यों है इतना खास?
प्रोजेक्‍ट के तहत तवांग और वेस्ट कामेंग जिलों के बीच दो सुरंग बन रही है- टनल 1 और टनल 2
1,555 मीटर का ट्विन ट्यूब चैनल तैयार किया जा रहा है। दूसरी सुरंग 980 मीटर लंबी है
सेला टनल 13,500 फीट से ज्‍यादा की ऊंचाई पर दो लेन में बनी दुनिया की सबसे बडी सुरंग होगी
टनल 2 में ट्रैफिक के लिए एक बाई-लेन ट्यूब होगा और एक एस्‍केप ट्यूब होगा। मतलब मुख्य सुरंग के बगल में ही इतनी ही लंबाई की एक और सुरंग बन रही है, जो किसी इमर्जेंसी के समय काम आएगी
लेटेस्ट टेक्नॉलजी का इस्‍तेमाल कर बनाई जा रही इस टनल पर बर्फबारी का असर नहीं होगा
प्रोजेक्‍ट के तहत दो सड़कें (7 किलोमीटर और 1.3 किलोमीटर) भी बनाई जाएंगी
रणनीतिक रूप से क्‍यों अहम है यह प्रोजेक्‍ट?
सेला दर्रा (पास) 317 किलोमीटर लंबी बालीपारा-चाहरद्वार-तवांग सड़क पर है।
यह पास अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग, पूर्वी कामेंग और तवांग जिलों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला एकमात्र रास्ता है।
तवांग सेक्‍टर में LAC तक पहुंचने का भी यह इकलौता रास्ता है। खराब मौसम में हेलिकॉप्टर भी उड़ान नहीं भर पाते।
यह रास्ता हर मौसम में खुला रहेगा तो स्थानीय लोगों के साथ ही भारतीय सेना को मूवमेंट में सहूलियत होगी।
लद्दाख और अरुणाच प्रदेश में चीनी सेना की तरफ से अतिक्रमण को देखते हुए इस सुरंग का महत्‍व और बढ़ गया है।
सुरंग परियोजना की आधारशिला फरवरी 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी। इस परियोजना पर करीब 700 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। सेला सुरंग प्रोजेक्‍ट अगले तीन साल में पूरा होने की उम्मीद है।
-एजेंसियां

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