भारतीय नव वर्ष मनाने हेतु हिन्दू जनजागृति समिति का प्रबोधन

मथुरा। भिन्न- भिन्न संस्कृति अथवा उद्देश्य के अनुसार नववर्ष का आरंभ भी विभिन्न तिथियों पर मनाया जाता हैं। उदाहरण के रूप में ईसाई संस्कृति के अनुसार इसवी सन् 1 जनवरी से आरंभ होता है जब कि हिंदू वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होता है। आर्थिक वर्ष 1 अप्रैल से आरंभ होता है, शैक्षिक वर्ष जून से आरंभ होता है, जबकि व्यापारी वर्ष कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होता है। इन सभी वर्षारंभ में से अधिक उचित नववर्ष का आरंभ दिन है, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा।

1 जनवरी वास्तव में ईसाई नव वर्ष की शुरुआत है। आज जब ईसाई राष्ट्र विश्व में बहुसंख्यक हैं और उन्होंने विश्व के अधिकांश देशों पर राज किया हैं इसलिए उनकी संस्कृति का प्रभाव पूरी दुनिया में देखा जा सकता है। इससे यह भ्रांति पैदा हो गई है कि ‘1 जनवरी विश्व नव वर्ष है’ लेकिन आज दुनिया के नक्शे पर ऐसे कई देश हैं जिन्होंने इस पश्चिमी संस्कृति को नष्ट कर स्वराष्ट्र की संस्कृति को बचाया हैं। उनका नया वर्ष 1 जनवरी से शुरू नहीं होता है। भारतीय संस्कृति सबसे प्राचीन है।

भारतीय संस्कृति के अनुसार नए वर्ष का आरंभ संवत्सरारम्भ के दिन से होता है। यह पृथ्वी के निर्माण का दिन है। इसलिए सभी भारतीयों को नए वर्ष का आरंभ संवत्सरारम्भ से करना चाहिए लेकिन देश की स्वतंत्रता के बाद भी कुछ विषय में हमने अंग्रेजों के परतंत्र को नहीं छोड़ा है। यह उनमें से एक है, हमें इसे छोड़ना होगा।

मथुरा के श्री राधा माधव इंटर कॉलेज में हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा छात्र-प्रबोधन में श्री अरविंद गुप्ता द्वारा उक्‍त आव्‍हान करते हुए क्रिश्चियन नव वर्ष उत्सव के नाम पर होने वाले अनाचारों को रोकने हेतु आगे कदम बढ़ाने के ल‍िए कहा गया। इस उद्बोधन का लाभ लगभग 800 छात्रों तथा सभी उपस्थित शिक्षकों ने लिया।

कॉलेज के प्रधानाचार्य के.सी. शर्मा व प्रबंधक राकेश कुमार शर्मा को ये बहुत अच्छा लगा।

उपर्युक्त उद्बोधन के अतिरिक्त हिंदू जनजागृति समिति की ओर से 31 दिसंबर, नव वर्ष उत्सव के नाम पर सार्वजनिक स्थानों पर होने वाले अनाचार को रोकने हेतु मथुरा के सिटी मजिस्ट्रेट ऑफिस में तथा मथुरा के होली गेट पुलिस थाना में ज्ञापन भी दिया गया।

– Legend news

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