सोशल मीडिया पर हनीट्रैप के जाल में फंस रहे बुजुर्ग

सोशल साइट बुजुर्गों के लिए बड़ा खतरा बन रहा है। हनीट्रैप के जाल में फंसाने वाला गैंग यहां सक्रिय है। रिटायर्ड सरकारी अधिकारी, सैनिक और पत्रकार इनके निशाने पर हैं।
साइबर सेल में ऐसी 4 शिकायतें आई हैं। ऐसे मामलों में पूर्व में पकड़े गए गैंग पर निगाहें रखते हुए गाजियाबाद पुलिस ने जांच शुरू की है।
सरकारी सेवा से रिटायर होने वालों को मिलने वाली रकम पर ठगों की निगाह हैं। बदनामी के डर से कई मामलों में पीड़ित पुलिस के पास भी नहीं पहुंच रहे। 4 केस मिलने के बाद पुलिस ऐसे पीड़ितों तक भी पहुंच बनाने का प्रयास कर रही है।
वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर वसूली
सोशल साइट पर दोस्ती से यह जाल शुरू होता है। पहले चैट, फिर मोबाइल नंबर पर बातचीत होती है। दोस्ती बढ़ने पर होटल में मुलाकात या वीडियो चैट पर आपत्तिजानक हालत में बातचीत होती है। इसके बाद इन्हीं वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर वसूली शुरू होती है।
गाजियाबाद और मेरठ में ऐसे गैंग की गिरफ्तारी के बाद 4 शिकायतें साइबर सेल को मिलीं। पत्रकार, रिटायर्ड अधिकारी और सैनिकों के साथ वारदात को अंजाम दिया गया था। ऐसी हरकत करने वाले कई गैंग पहले पकड़े गए थे। पुलिस अपनी शुरुआती जांच में पहले उन गैंग तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
सभी बड़े पद से हुए हैं रिटायर
पुलिस को हाल ही में मिली शिकायतों में से सभी पीड़ित बड़े पदों से रिटायर हुए हैं। सोशल मीडिया पर उनसे युवती की मुलाकात हुई। बातचीत बढ़ने के बाद एनसीआर के होटल में बुलाया गया। फिर गैंग के लोगों ने उनकी आपत्तिजनक वीडियो बना ली। फिर उन्हें ब्लैकमेल कर रुपये की डिमांड शुरू हुई।
शुरुआत में तो पीड़ितों ने कुछ रुपये दे दिए लेकिन मांग बढ़ने लगी तो पीड़ित शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंचे। कई पीड़ित तो बदनामी के डर से पुलिस के पास शिकायत लेकर नहीं पहुंच रहे। पुलिस ऐसे लोगों की भी जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है, जिससे गुप्त तरीके से उनकी मदद की जा सके।
आ चुके हैं कई मामले
हनीट्रैप में फंसाकर ठगने के कई मामले आ चुके हैं। पिछले साल हापुड़ के एक किसान को भी इसी तरह से ठगा गया था। खुद को विदेशी मूल की युवती बताकर ठगों ने फेसबुक पर उनसे दोस्ती की थी। इसके बाद कई बार में करीब 32 लाख रुपये ठग लिए थे। इस तरह से कई अन्य लोगों से भी इस गैंग ने ठगी की थी। बाद में हापुड़ पुलिस ने गैंग के कई लोगों को गिरफ्तार किया था।
सैनिकों को भी हनीट्रैप में फंसाकर कई गुप्त जानकारी हासिल करने के मामले सामने आ चुके हैं। हाल ही में हापुड़ के एक व्यक्ति को भी ऐसे ही केस में गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि उसने विदेशी एजेंट को सेना से जुड़ी कई जानकारी दी है। आरोपित ने कुछ वक्त पहले सेना की नौकरी से इस्तीफा दे दिया था।
पुलिस का क्या कहना है
सीओ साइबर सेल अभय कुमार मिश्रा ने कहा कि ऐसे सभी मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है। हमारी टीम कुछ शुरुआती क्लू पर काम कर रही है। कुछ पीड़ित बदनामी के डर से पुलिस तक नहीं आ रहे हैं। ऐसे लोगों से भी संपर्क कर मदद की कोशिश की जाएगी। जो भी गैंग बुजुर्गों को इस तरह अपने जाल में फंसा रहे हैं, उन्हें जल्द ही बेनकाब किया जाएगा।
ऐसे फंसा रहे
सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों को जाल में फंसाया जाता है। इसमें ये जरूरी नहीं कि सामने जो लड़की बातें कर रही है वो वास्तव में लड़की ही हो। कई बार पुरुष एजेंट महिला बन कर बातें करते हैं। गिरोह की लड़कियां फर्जी आईडी पर लिए गए मोबाइल नंबरों से बातचीत और वॉट्सऐप चैटिंग करती हैं। चैटिंग के दौरान लोगों की अंतरंग तस्वीरें, बेहद निजी राज आदि जान लिए जाते हैं। फिर ब्लैकमेल करने में उनका इस्तेमाल किया जाता है। कई मामलों में हनीट्रैप में फंसाने के लिए लड़की खुद को विदेशी मूल का बताकर दोस्ती करती है। इसके बाद लूटपाट का प्लॉट तैयार कर शिकार को जाल में फसाया जाता है।
हनीट्रैप से ऐसे बचें
– अनजान लोगों से सोशल मीडिया पर दोस्ती करने से बचें।
– सोशल मीडिया पर दोस्तों से किसी भी प्रकार की निजी सूचना साझा न करें।
– कोई भी अनजान व्यक्ति सोशल मीडिया या मोबाइल से नजदीकी बढ़ाने की कोशिश करे तो उससे सावधान रहें।
– सोशल मीडिया पर कितना भी गहरा दोस्त क्यों न हो उससे अपनी अंतरंग तस्वीरें आदि साझा न करें।
– कुछ भी संदिग्ध होने पर पुलिस को इसकी सूचना दें। स्थानीय थाने, साइबर सेल या पुलिस अधिकारी से शिकायत कर सकता है।
– ऐसे मामलों में निवेदन करने पर पुलिस आपकी सूचना और पहचान को सार्वजनिक किए बगैर जांच करेगी।
-एजेंसियां

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