अर्थव्यवस्था: ब्रिटेन और फ्रांस को पीछे छोड़ दुनिया में 5वें नंबर पर आया भारत

नई दिल्‍ली। भारत अर्थव्यवस्था के मामले में ब्रिटेन और फ्रांस को पीछे छोड़ दुनिया में 5वें नंबर पर आ गया है। अमेरिकी थिंक टैंक वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू ने 2019 की रिपोर्ट जारी की है। इसके मुताबिक भारत की जीडीपी पिछले साल 2.94 लाख करोड़ डॉलर (209 लाख करोड़ रुपए) के स्तर पर पहुंच गई। ब्रिटेन 2.83 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ छठे और फ्रांस 2.71 लाख करोड़ डॉलर के साथ 7वें नंबर पर रहा। 2018 में भारत 7वें नंबर पर था। ब्रिटेन की 5वीं और फ्रांस की छठी रैंक थी।

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भारत का सर्विस सेक्टर दुनिया के तेजी से बढ़ते सेक्टर में शामिल
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अब पुरानी नीतियों की बजाय ओपन मार्केट इकोनॉमी में खुद को डेवलप कर रहा है। भारत में 1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण शुरू हुआ था। उस वक्त इंडस्ट्री पर नियंत्रण कम किया गया। विदेशी व्यापार और निवेश में भी छूट दी गई और सरकारी कंपनियों का निजीकरण शुरू हुआ था। इन वजहों से भारत की आर्थिक विकास दर में तेजी आई। वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू के मुताबिक भारत का सर्विस सेक्टर दुनिया के तेजी से बढ़ते सेक्टर में से एक है। देश की अर्थव्यवस्था में इसका 60% और रोजगार में 28% योगदान है। मैन्युफैक्चरिंग और एग्रीकल्चर भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अहम सेक्टर हैं।
जीडीपी की सालाना ग्रोथ 5% रहने का अनुमान
वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू को भी चालू वित्त वर्ष (2019-20) में भारत की जीडीपी ग्रोथ 5% रहने की उम्मीद है। यह 11 साल में सबसे कम होगी। 31 जनवरी को पेश आर्थिक सर्वेक्षण में भी 5% ग्रोथ का अनुमान ही जारी किया गया था। सर्वे में कहा गया कि ग्लोबल ग्रोथ में कमजोरी की वजह से भारत भी प्रभावित हो रहा है। फाइनेंशियल सेक्टर की दिक्कतों के चलते निवेश में कमी की वजह से भी चालू वित्त वर्ष में ग्रोथ घटी लेकिन जितनी गिरावट आनी थी आ चुकी है। अगले वित्त वर्ष से ग्रोथ बढ़ने की उम्मीद है। सरकार ने 2025 तक 5 लाख करोड़ डॉलर (355 लाख करोड़ रुपए) की इकोनॉमी तक पहुंचने का लक्ष्य तय किया है।
वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू के आंकड़ों की पुष्टि नहीं
वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू ने यह नहीं बताया कि जीडीपी का आंकलन किस आधार पर किया है। पिछले साल के आंकड़े भी नहीं बताए। अपने आंकड़ों की बजाय इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) के डेटा दिए गए। 2011 में शुरू हुई यह संस्था प्रमुख रूप से जनसंख्या के आंकड़ों के बारे में बताती है। इसकी वेबसाइट पर दावा किया गया है कि वह एक स्वतंत्र संस्था है। किसी राजनीतिक संस्था से उसका संबंध नहीं है।
-एजेंसियां

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