आर्थिक झटका: 5% हुई GDP, 7 साल के सबसे निचले स्तर पर

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के आर्थिक हालातों को सुधारने के प्रयासों को झटका लगा है। विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट और कृषि उत्पादन की सुस्ती से GDP वृद्धि में यह गिरावट आई है। शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गयी है।

देश की आर्थिक वृद्धि दर 2019-20 की अप्रैल-जून तिमाही में घटकर पांच प्रतिशत रह गयी। यह पिछले सात साल का न्यूनतम स्तर है।

सीएसओ (CSO) द्वारा वर्तमान वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही के दौरान GDP ग्रोथ रेट कम होकर पांच फीसदी के स्तर पर आने से रोजगार बढ़ाने के सरकारी प्रयास को तगडा झटका लगा है। ग्रोथ रेट कम होने का साफ मतलब है कि आर्थिक क्रियाकलापों में बड़ी कमी आई है। साफ तौर पर इससे रोजगार के अवसरों में भी लगातार कमी आ रही है। विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले दिनों में रोजगार के अवसर और सिकुड़ सकते हैं।

सीएसओ द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़ी गिरावट आई है। पहली तिमाही के दौरान, मैन्युफैक्चरिंग की ग्रोथ रेट पिछले वर्ष की इस अवधि की 12 फीसद ग्रोथ रेट की तुलना में महज 0.6 फीसद रह गई है।

इससे पहले वित्त वर्ष 2012-13 की अप्रैल- जून अवधि में देश की आर्थिक वृद्धि दर सबसे निचले स्तर 4.9 प्रतिशत पर रही थी। एक साल पहले 2018-19 की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर आठ प्रतिशत के उच्च स्तर पर थी। जबकि इससे पिछली तिमाही की यदि बात की जाये तो जनवरी से मार्च 2019 की तिमाही में वृद्धि दर 5.8 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

भारतीय रिजर्व बैंक ने जून में हुई मौद्रिक समीक्षा में चालू वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान सात प्रतिशत से घटाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया था। इसके साथ ही केन्द्रीय बैंक ने कुल मांग बढ़ाकर वृद्धि चिंताओं से निपटने पर जोर दिया था।

केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष की पहली छमाही में जीडीपी वृद्धि दर के 5.8 प्रतिशत से 6.6 प्रतिशत और दूसरी छमाही में 7.3 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान जताया है। वर्ष 2019 की अप्रैल-जून अवधि में चीन की आर्थिक वृद्धि दर 6.2 प्रतिशत रही है जो पिछले 27 साल में सबसे कम रही।

– एजेंसी

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