CPEC प्रोजेक्‍ट पर ग्रहण, डेवलपमेंट साइट पर झाड़ियां उगीं

हॉन्ग कॉन्ग। पाकिस्तान और चीन के करीब 7 साल पुराने सपने को नज़र लग गई है। 2015 में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की पाकिस्तान यात्रा के दौरान शुरू हुआ चीन -पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) का प्रोजेक्ट्स पूरा होना अब तक सपना-सा ही लग रहा है।
अरबों डॉलर का प्रोजेक्ट, इतने सालों के बाद भी हकीकत में तब्दील होने से कोसों दूर दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान में जहां एयरपोर्ट बनाया जाना था, उस डेवलपमेंट साइट पर झाड़ियां उग आई हैं। कोरोना वायरस के कारण मुश्किलें और भी बढ़ती नजर आ रही हैं।
62 अरब डॉलर का प्रोजेक्ट
चीन और पाकिस्तान के इस 62 अरब डॉलर के प्रोजेक्ट के तहत चीन पीओके, बलूचिस्तान, पाकिस्तान से होकर चीन के शिनजिआंग प्रांत तक सड़क बनाई जा रही है। इसकी सहायता से चीन अरब सागर के ग्वादर बंदरगाह तक कनेक्टिविटी को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जो भविष्य में उसके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।
शुरुआत में पाकिस्तान में बंदरगाह, सड़कों, पाइपलाइन्स, दर्जनों फैक्ट्रियों और पाक में सबसे बड़े एयरपोर्ट का प्लान था। योजना के मुताबिक ग्वादर में नया एयरपोर्ट 3 साल पहले ही तैयार हो जाना चाहिए था लेकिन यह इलाका सूना पड़ा है, यहां झाड़ियां नजर आती हैं। चीन सरकार के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने यह खबर दी है।
CPEC प्रोजेक्ट्स का एक-तिहाई ही हुआ पूरा!
सीपेक प्रोजेक्ट्स का एक-तिहाई से भी कम काम पूरा हुआ है। सरकारी स्टेटमेंट्स की मानें तो महज 19 अरब डॉलर का खर्च अब तक हुआ है और इसमें ज्यादा कसूरवार पाकिस्तान है। पाकिस्तान ने बार-बार पैसों की कमी के कारण कंस्ट्रक्शन टारगेट मिस किया। पाकिस्तान को पिछले साल अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 6 अरब अमेरिकी डॉलर का बेलआउट फंड मिला था।
बलूचिस्तान में विरोध ने धीमी की रफ्तार!
इसके अलावा सीपेक प्रोजेक्ट्स की रफ्तार पर ब्रेक लगने का एक कारण यह भी है कि दो प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार के आरोप में जेल चले गए।
वहीं बलूचिस्तान के स्थानीय लोग भी इसका विरोध कर रहे थे। ग्वादर इसी प्रांत में आता है। मई 2019 में मिलिटेंट्स ने शहर में गदर मचाया और शहर के अकेले फाइव स्टार होटल पर हमला कर दिया था, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई थी।

सिर्फ पाकिस्तान में ही नहीं देरी
ग्वादर में सीपेक प्रोजेक्ट में देरी समस्याओं के बढ़ने की ओर इशारा कर रही है। चीन सिर्फ पाकिस्तान में ही अपने प्रोजेक्ट्स को लेकर देरी का सामना नहीं कर रहा है, बल्कि श्रीलंका, मलेशिया और केन्या भी इस लिस्ट में शामिल हैं।

ट्रेड वॉर के बाद अब कोरोना से बढ़ा चीन को खतरा
चीन की जीडीपी की रफ्तार पिछले तीन दशकों में सबसे नीचे आ गई है। लगातार महंगाई बढ़ती जा रही है और इसी बीच लंबे समय तक चीन और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर को का असर भी झेलता रहा चीन। अब कोरोना वायरस इकॉनमी के लिए बड़ा खतरा बन गया है।
-एजेंसियां

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