राजीव इंटरनेशनल स्कूल में हर्षोल्लास के साथ मना दशहरा

मथुरा। राजीव इंटरनेशनल स्कूल में दशहरा पर्व बड़ी धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शास्त्री सदन द्वारा एक विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम का संचालन आकांशा और दिव्यांशी के द्वारा किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत गणेश वंदना से तथा सभा का शुभारम्भ स्कूल की शैक्षिक संयोजिका प्रिया मदान द्वारा श्रीराम चंद्र जी, माँ दुर्गा जी एवं मां सरस्वती जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया।

इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए जिसमें छात्रों ने नृत्यनाटिका के माध्यम से नवदुर्गा के रूपों को व महिषासुर मर्दन को दर्शाया। इस अवसर पर बच्चों ने बुराई पर अच्छाई की विजय को दर्शाते हुए रामायण की कथा का नाट्य मंचन भी किया। रामायण तथा नवरात्रि‍ पर आधारित प्रश्नोत्तरी क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आकर्षण रावण दहन रहा जिसका सभी छात्र-छात्राओं ने लुफ्त उठाया छात्रों द्वारा योग की महत्ता को भी प्रदर्शित किया गया।
इस अवसर पर आर. के. एजूकेशन हब के चेयरमैन डाॅ. रामकिशोर अग्रवाल ने बच्चों को दशहरा पर्व की बधाई देते हुए कहा कि दशहरा पर्व हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। इन दिनों माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। त्योहार का अंतिम दिन विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है। यह हमें असत्य पर सत्य की जीत का मुख्य संदेश देता है। उन्होंने बच्चों से कहा कि केवल इसे मनाना ही काफी नहीं है बल्कि हमें सदैव अच्छाई की राह पर चलकर अपने को प्रगति के पथ पर अग्रसर रहना चाहिए।
स्कूल के प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल ने सभी को बधाई देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक है। शौर्य की उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। दशहरा या विजयदशमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। भगवान श्रीराम ने इसी दिन रावण का वध किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिए इस दशमी को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रणयात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी जैसे अवगुणों को छोड़ने की हमें प्रेरणा देता है। श्री अग्रवाल ने कहा कि स्कूल में दशहरा जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम को मनाकर हम बच्चों को उनकी सभ्यता तथा संस्कृति से जोड़ते हैं।
स्कूल की शैक्षिक संयोजिका प्रिया मदान ने छात्रों की प्रस्तुति की सराहना की और कहा कि हमारा उद्देश्य केवल सांस्कृतिक पर्वों को मनाकर उनकी याद ताजा करना नहीं है, अपितु उनके द्वारा दी गई सीख को भावी पीढ़ी को समझाना भी है जिससे क‍ि उनका अनुसरण करके वे अपने भविष्य को उज्ज्वल कर सकें।
– Legend News

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