डूरंड लाइन विवाद: तालिबान ने पाकिस्‍तान को जंग की धमकी दी

डूरंड लाइन को लेकर तालिबान और पाकिस्तान में विवाद बढ़ता जा रहा है। तालिबान ने अफगान सीमा पर पाकिस्तान की बाड़बंदी पर कड़ा एतराज जताते हुए जंग की धमकी दी है। तालिबान शुरू से ही पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच की सीमा यानी डूरंड लाइन को नहीं मानता है। उसका दावा है कि अफगानिस्तान का इलाका वर्तमान सीमा के काफी आगे तक है। यह इकलौता ऐसा मुद्दा है, जिस पर अफगानिस्तान की पूर्व नागरिक सरकार और तालिबान एकमत थे। तालिबान ने डूरंड लाइन पर पाकिस्तान की बाड़बंदी को गिरा भी दिया है। ऐसे में यह तय है कि तालिबान के ब्रांड एंबेसडर बन दुनिया से चंदा मांग रहे इमरान खान की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ने वाली हैं।
तालिबान डूरंड लाइन का विरोध करता है
अफगानिस्तान के बहुसंख्यक पश्तून और तालिबान ने कभी भी डूरंड लाइन को आधिकारिक सीमा रेखा नहीं माना है। तालिबान के शीर्ष प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने अफगानिस्तान पर कब्जे के तुरंत बाद कहा था कि नई अफगान सरकार इस मुद्दे पर अपनी रूख का ऐलान करेगी। उन्होंने दावा किया था कि पाकिस्तान की बनाई बाड़ ने लोगों को अलग कर दिया है और परिवारों को विभाजित कर दिया है। हम सीमा पर एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण माहौल बनाना चाहते हैं इसलिए अवरोध पैदा करने की कोई जरूरत नहीं है।
ब्रिटिश-सोवियत संघ ग्रेट गेम की विरासत है डूरंड लाइन
डूरंड रेखा रूसी और ब्रिटिश साम्राज्यों के बीच 19वीं शताब्दी के ग्रेट गेम की एक विरासत है। तब पूर्व में रूसी विस्तारवाद से बचने के लिए भयभीत ब्रिटिश साम्राज्य ने अफगानिस्तान को एक बफर जोन के रूप में इस्तेमाल किया था। 12 नवंबर, 1893 को ब्रिटिश सिविल सर्वेंट सर हेनरी मोर्टिमर डूरंड और उस समय के अफगान शासक अमीर अब्दुर रहमान के बीच डूरंड रेखा के रूप में प्रसिद्ध समझौता हुआ था।
कैसे बनी डूरंड लाइन
दूसरे अफगान युद्ध की समाप्ति के दो साल बाद 1880 में अब्दुर रहमान अफगानिस्तान के राजा नियुक्त किए गए। इस युद्ध में ब्रिटिश फौज ने अफगानिस्तान साम्राज्य के बहुत बड़े हिस्से पर अपना अधिकार कर लिया था। अब्दुर रहमान को अंग्रेजों ने अपनी इच्छा से राजा बनाया। जिसके बाद 1893 में सर डूरंड के साथ उनके समझौते ने भारत के साथ अफगान सीमा पर उनके और ब्रिटिश भारत के प्रभाव के क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण किया गया। तब वर्तमान पाकिस्तान भी भारत में ही शामिल था।
चीन से ईरान तक फैली हुई है यह रेखा
सात खंडों वाले इस समझौते ने तत्कालीन ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के बीच 2,670 किलोमीटर की लाइन को मान्यता दी। डूरंड्स कर्स: ए लाइन अक्रॉस द पठान हार्ट के लेखक राजीव डोगरा के अनुसार डूरंड ने आमिर के साथ अपनी बातचीत के दौरान अफगानिस्तान के एक छोटे से नक्शे पर ही यह लाइन खींच दी थी। डूरंड लाइन चीन की सीमा से लेकर ईरान तक फैला हुआ है।
पश्तूनों को क्या है आपत्ति?
पाकिस्तान अफगानिस्तान सीमा के नजदीक रहने वाले पश्तूनों का आरोप है कि इस लाइन ने उनके घरों का बटवारा कर दिया। वे पिछले सौ साल से उस इलाके में अपने परिवार और कबीले के साथ रहते थे, लेकिन अंग्रेजों ने एक चाल के तहत पश्तून बहुल इलाकों के बीच से यह लाइन खींची। जिसका नतीजा यह हुआ कि पश्तून दो देशों के बीच की दीवार में कैद हो गए।
-एजेंसियां

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