लॉकडाउन के कारण भारत में हुआ Amazon को सबसे अधिक नुकसान

नई दिल्‍ली। कोरोना वायरस महामारी के कारण सरकार द्वारा किए गए देशव्यापी लॉकडाउन की वजह से दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी Amazon को दुनियाभर में सबसे अधिक नुकसान भारत में हुआ है। बीते 25 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन में कंपनी को केवल जरूरी वस्तुओं की बिक्री की ही मंजूरी दी गई है, जिसके कारण इसे अरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है। कंपनी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
कामकाज शुरू करने की अनुमति का अनुरोध
Amazon के सीएफओ ब्रायन ओल्सावस्की ने गुरुवार को बताया, ‘हमारा मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जिस देश में हमें सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है, वह देश भारत है, जहां अन्य कंपनियों की ही तरह हम भी बस जरूरी वस्तुओं की ही बिक्री कर पा रहे हैं। इसके कारण हमें कई तरह के ऑफर वापस लेने पड़े और उनकी घोषणा हम तभी कर पाएंगे, जब भारत सरकार हमें अपना कामकाज शुरू करने की मंजूरी देगी।’
इस हफ्ते की शुरुआत में Amazon इंडिया के हेड अमित अग्रवाल ने पीएमओ तथा वाणिज्य मंत्रालय को मार्क करते हुए ट्वीट में अनुरोध किया था कि सरकार ई-कॉमर्स कंपनियों को अपना कामकाज पूरी तरह शुरू करने की मंजूरी प्रदान करे।
फ्रांस में भी इसी तरह की समस्या
एक रिपोर्ट के मुताबिक Amazon को फ्रांस में भी कुछ इसी तरह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, जहां न्यायालय ने कंपनी को केवल जरूरी वस्तुओं की बिक्री करने का ही निर्देश जारी किया है।
कोरोना से जुड़ा खर्च 30 हजार करोड़
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ऐमजॉन की बिक्री बढ़कर 75 अरब डॉलर रही, जो पिछले साल की समान अवधि में 59.7 अरब डॉलर रही थी। हालांकि, शुद्ध आय पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 3.5 अरब डॉलर से घटकर 2.5 अरब डॉलर ही रही थी। Amazon ने कहा कि कंपनी को उम्मीद है कि वह कोरोना वायरस महामारी से संबंधित खर्चों में 4 अरब डॉलर (30 हजार करोड़) या उससे अधिक का खर्च करेगी।
इन पर खर्च कर रही कंपनी
कंपनी ने कहा, ‘कोरोना वायरस महामारी के दौरान ग्राहकों तक उत्पाद पहुंचाने तथा कर्मचारियों को सुरक्षित रखने में हमें पूरा 4 अरब डॉलर का खर्च करना पड़ सकता है। इसमें पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट, फैसिलिटीज की साफ-सफाई, सोशल डेस्टिंसिंग तय करने के लिए कम क्षमता वाली प्रक्रियाओं को अपनाना, ज्यादा समय तक काम करने वाले कर्मियों को अधिक वेतन और कोविड-19 की जांच करने के लिए अपने टेस्ट किट को विकसित करने में होने वाला खर्च शामिल है।’
-एजेंसियां

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