भारत में टेक्नोलॉजी की स्वीकार्यता बहुत तेजी से बढ़ी है : डॉ. राय

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित महत्वपूर्ण व्याख्यान श्रंखला, ‘चांसलर डिस्टिंग्विश लेक्चर्स सिरीज-लीडर्स टुडे’ के दूसरे चरण में ‘लेटेस्ट ट्रेंड एंड अपोर्चुनिटीज़ इन इन्फोर्मेशन टेक्नोलाजी’ विषय पर बोलते हुए मुख्य वक्ता डा.ओमकार राय, डायरेक्टर जनरल सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया ( Software Technology Park of India ) ने कहा कि हमारे देश में टेक्नोलॉजी की स्वीकार्यता बहुत तेजी से बढ़ी है। इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत आज विश्वस्तर पर बड़ा नाम बन चुका है। सारे विश्व को हमारे एक्सपर्ट काम करके दे रहे हैं।

डॉ.ओमकार राय ने संस्कृति विवि द्वारा शुरु की गई इस व्याख्यान श्रंखला की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस श्रृंखला के माध्यम से बहुत सारे लोग ज्ञान का आदान-प्रदान कर पाएंगे। यह बहुत महत्वपूर्ण विषय है, आईटी सेक्टर को तीसरी क्रांति के रूप में देखा जाता है। इस क्षेत्र में भारत को बड़ा नाम मिला। भारत के पास विद्वतजन काफी थे, जब तीसरी क्रांति हो रही थी तब करीब 44 लाख आईटी एक्सपर्ट भारत ने पूरे विश्व को दिए हैं। आईटी इंडस्ट्री का केवल यही योगदान नहीं है। भारत की आईटी सर्विसेज में बदलाव और गुणात्मक बदलाव आया। आज हम विश्व के कई देशों के बहुत सारे प्रोडक्ट भारत से तैयार कर दे रहे हैं। भारत में एक से बढ़कर एक डिजिटल प्लेटफार्म तैयार हो रहे हैं। ‘Adhar‘ के रूप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि हमने हासिल की है, यह भारत की आईटी सेक्टर की ताकत है।

डॉ. राय ने कहा कि आईटी इंडस्ट्री ने पूरी दुनिया में भुगतान सहज कर दिया। हर दिशा में रोज नए-नए प्लेटफार्म तैयार हो रहे हैं, जिनमें हमारे देश का टेलेंट नजर आता है। नये-नए विचार और नए-नए सपने लेकर आ रहे हैं। भारत में अनेक प्लेटफार्म बहुत सस्ते में तैयार हो गए। फ्लिपकार्ट, नौकरी.काम, ओला. योयो ये पूरा स्टार्टअप इको सिस्टम हैं। लाकडाउन में एजूकेशन सिस्टम में भारत में बहुत सारे और बड़े सिस्टम तैयार हो गए। हमने टेक्नोलाजी के आयात को लगभग समाप्त कर दिया।

लॉकडाउन सिस्टम में अनेक परिवर्तन हुए इनका नेतृत्व आई इंडस्ट्री कर रही है। हमारे यहां लॉकडाउन में ई-कॉमर्स सिस्टम से सारे काम होने लगे। हमारे देश में डिजिटल प्लेटफार्म का इस्तेमाल शुरू कर दिया, तमाम देसी प्लेटफॉर्म तैयार हो गए। भारतीयों की डिजिटल स्वीकार्यता बहुत बढ़ी है। गांव तक इसकी पहुंच हुई है। चुनावों में डिजिटल प्लेटफॉर्म का गांव का कम पढ़ा लिखा आदमी भी खूब जमकर इस्तेमाल कर रहा है। भारतीय उत्पादों के प्रति भारत के लोगों की रुचि बढ़ी है। स्टार्टअप इंडिया के द्वारा नवोन्मेष प्रवृत्ति बढ़ी है। भारत की बड़ी जनसंख्या है। डाटा को रखने के लिए बड़े वेयर हाउस की जरूरत है। अब भारत के छात्र-छात्राएं आगे बढ़ रहे हैं और दुनिया से अलग और उपयोगी उत्पाद बनाने में जुट गए हैं। स्पोर्ट्स के क्षेत्र में कुछ नया करेंगे तो भारत में उसे हाथों हाथ लिया जाएगा। डोमेस्टिक मार्केट में डिजिटल टेक्नोलॉजी का बहुत बड़ा उपयोग हो रहा है और आने वाले दिनों में यह व्यापक रूप में नजर आएगा।

वेबिनार में संस्कृति विवि के चांसलर सचिन गुप्ता ने डॉ. ओमकार राय का धन्यवाद करते हुए उन्होंने बताया कि जरूरत पड़ने पर नामीबिया की एजूकेशन मिनिस्ट्री के लिए हमने सॉफ्टवेयर बना कर दिया। हम लगातार प्रयासरत हैं कि हमारे बच्चे अपने टेलेंट को प्रदर्शित करें। अभी बहुत संभावनाएं हैं, हम विद्यार्थियों को कहते हैं कि आपके पास कोई आईडिया है तो उसे कैश करें, बहुत छोटे आइडिया आपको ऊंचाइयों पर ले जाते हैं।

संस्कृति विवि के कुलपति प्रोफेसर सीएस दुबे द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हम पंचायत स्तर तक विद्यार्थियों को जोड़ रहे हैं, ताकि विद्यार्थी अपने क्षेत्र की समस्याओं के निदान के लिए आगे आएं और कुछ नया करें। विद्यार्थियों से आइडिया लिए जा रहे हैं। हम इन आइडिया को स्टार्टअप में कन्वर्ट करेंगे।

डॉ. राय से उन्होंने कहा कि रूरल एरिया में आपकी मदद से हम कुछ बड़ा करने के लिए तैयार हैं। डॉ. राय ने प्रोफेसर दुबे के प्रस्ताव पर सकारात्म रुख अपनाते हुए कहा कि STPI के 60 में से 52 सेंटर छोटे शहरों में हैं। देश के छोटे शहरों में भी वही सर्विसेज लागू करने जा रहे हैं जो बड़े शहरों में हैं। चुनौती कार्यक्रम शुरू किये हैं। मुझे जानकर बहुत खुशी हो रही है कि संस्कृति विवि में नवोन्मेष काम हो रहे हैं।

वेबिनार का संचालन संस्कृति स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग (Sanskriti School of Engineering) के डीन सुरेश कासवान ने किया और अंत में संस्कृति विवि के कुलपति प्रोफेसर सीएस दुबे ने मुख्य वक्ता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

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