डॉ. निर्विकल्‍प अपहरण कांड: एक नहीं दो डॉक्‍टर का हुआ था अपहरण, दोनों से वसूली गई फिरौती, साथी डॉ. ही मास्‍टर माइंड

मथुरा। शहर के मशहूर ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. निर्विकल्‍प अग्रवाल के अपहरण से जुड़े सनसनीखेज खुलासे ने लोगों के होश उड़ा दिए हैं।
दरअसल, डॉ. निर्विकल्‍प का अपहरण करने से कुछ दिन पहले इन्‍हीं बदमाशों ने एक अन्‍य प्रसिद्ध डॉक्‍टर को अगवा कर उनसे एक करोड़ रुपए की फिरौती वसूली थी।
चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों डॉक्‍टर के अपहरण में इनके ही साथी एक ऐसे डॉक्‍टर का नाम सामने आया है, जो न केवल पूरे घटनाक्रम का सूत्रधार है बल्‍कि रहनुमा भी बना हुआ है।
बताया जाता है कि डॉ. निर्विकल्‍प के चारों नामजद अपहरणकर्ता पूरे समय जिस पांचवें शख्‍स से फोन पर संपर्क में थे, वह पांचवां शख्‍स ही मास्‍टरमाइंड डॉक्‍टर है जिसने एक-एक करके दोनों डॉक्‍टर के अपहरण का प्‍लॉट तैयार किया था।
चूंकि फिलहाल चारों नामजद आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर हैं इसलिए पूरी सच्‍चाई सामने आना मुश्‍किल है, लेकिन पुलिस यदि उनकी पुरानी ‘कॉल डिटेल’ पर भी काम कर ले तो उसे बड़ी उपलब्‍धि हासिल हो सकती है।
इस केस का एक सर्वाधिक रोचक पहलू यह है कि अपहृत किए गए दोनों डॉक्‍टर तथा अपहरण के सूत्रधार डॉक्‍टर सहित एक नामजद बदमाश का संबंध भी गेटबंद पॉश कॉलोनी ‘राधापुरम एस्‍टेट’ से ही जुड़ रहा है।
गौरतलब है कि डॉ. निर्विकल्‍प अपने परिवार सहित राधापुरम एस्‍टेट में रहते हैं जबकि इनसे पूर्व जिस डॉक्‍टर को अगवा कर बदमाश एक करोड़ रुपए की फिरौती वसूलने में सफल रहे थे, वो भी राधापुरम एस्‍टेट के ही निवासी हैं।
इसके अलावा इन दोनों डॉक्‍टरों को अगवा कराने वाले डॉक्‍टर साहब भी राधापुरम एस्‍टेट में ही रह रहे हैं।
इसमें एक इत्तेफाक यह भी जुड़ रहा है कि तीनों डॉक्‍टर नेशनल हाईवे अथवा उसके लिंक रोड पर प्रेक्‍टिस करते हैं। यानी इनके चिकित्‍सा संस्‍थान भी उसी एक दायरे में हैं, जहां घटना स्‍थल है।
कुल मिलाकर इन डॉक्‍टर्स के घर ही नहीं, व्‍यावसायिक ठिकाने भी हाईवे थाना क्षेत्र में आते हैं।
उल्‍लेखनीय है कि डॉ. निर्विकल्‍प की फिरौती जिस स्‍थान पर वसूली गई और जिसका पुलिस ने बाकायदा अपनी एफआईआर में जिक्र भी किया है, वह ”सिटी हॉस्‍पीटल” भी नेशनल हाईवे की सर्विस रोड पर है तथा हाईवे थाना क्षेत्र में पड़ता है।
अब यदि बात करें नामजद बदमाशों की तो 11 फरवरी 2020 की रात हाईवे थाना पुलिस द्वारा लिखाए गए डॉ. निर्विकल्‍प के अपहरण मामले का एक नामजद अभियुक्‍त अनूप पुत्र जगदीश निवासी ग्राम कौलाहार थाना नौहझील मथुरा, काफी समय तक राधापुरम एस्‍टेट में किराए पर रहा था। यहां रहकर उसने कॉलोनी के कई लोगों से अपने अच्‍छे ताल्लुकात बना लिए थे।
यहां से निकलने के बाद भी अनूप गणेशरा रोड स्‍थित एक अन्‍य कॉलोनी में रहने लगा, जिससे उसका राधापुरम एस्‍टेट तक आना-जाना लगा रहता था।
अपहरण कराने के पीछे की कहानी
कुछ दिनों के अंतराल पर दो नामचीन डॉक्‍टरों का उनके ही किसी साथी डॉक्‍टर द्वारा अपहरण कराकर मोटी फिरौती वसूलने की कहानी भी किसी फिल्‍मी पटकथा जैसी है।
इस कहानी के अनुसार डॉ. निर्विकल्‍प का अपहरण कराने से पहले जिस डॉक्‍टर का अपहरण कराकर फिरौती वसूली गई थी, उन डॉक्‍टर और मास्‍टरमाइंड डॉक्‍टर के बीच पूर्व में व्‍यावसायिक रिश्‍ते थे।
इन रिश्‍तों में दरार आई तो कुछ हिसाब-किताब बाकी रह गया। पहले राजी-खुशी हिसाब करने के प्रयास हुए लेकिन जब बात नहीं बनी तो टेढ़ी उंगली से चार गुना घी निकाल लिया गया।
बताया जाता है कि इस मामले में बड़े आराम से फिरौती हजम हो गई इसलिए बदमाशों के मुंह भी खून लग चुका था।
बदमाशों ने अपनी आदत के मुताबिक अब अपहरण कराने वाले डॉक्‍टर से कोई दूसरा मुर्गा बताने को दबाव बनाना शुरू कर दिया।
मास्‍टरमाइंड डॉक्‍टर को डॉ. निर्विकल्‍प की कमजोरी पता थी, और वह यह भी जानता था डॉ. निर्विकल्‍प दूसरे डॉक्‍टर्स की अपेक्षा काफी सज्‍जन व्‍यक्‍ति हैं।
डॉ. निर्विकल्‍प की इसी कमजोरी का लाभ उठाकर उनके साथी डॉक्‍टर ने उन्‍हें टारगेट बनवाया और इसमें भी सफलता हाथ लगी।
पुलिस तक बात पहुंची कैसे
दो डॉक्‍टर्स का अपहरण कर इत्‍मीनान से मोटी रकम हड़पने वाले बदमाशों के हाथ तो जैसे कोई खजाना लग गया था। उन्‍होंने अपना इस्‍तेमाल करने वाले डॉक्‍टर साहब का पीछा इसके बाद भी नहीं छोड़ा।
व्‍यावसायिक रिश्‍तों का हिसाब बदमाशों के जरिए कराने वाले डॉक्‍टर के लिए अब ये बदमाश ही मुसीबत बन चुके थे लिहाजा डॉक्‍टर साहब ने इसका भी रास्‍ता निकाला।
काम आए पुलिस और मास्‍टरमाइंड डॉक्‍टर के गहरे संबंध
पुलिस के ही सूत्र बताते हैं कि दो डॉक्‍टरों का अपहरण कराकर अच्‍छी-खासी फिरौती दिलवाने वाले डॉक्‍टर के पुलिस, और विशेषकर इलाका पुलिस से बहुत मधुर संबंध रहते हैं।
इसे यूं भी समझ सकते हैं कि पुलिस से गहरी पैठ बनाकर रखने वालों में टॉप पर इस डॉक्‍टर का नाम शामिल है क्‍योंकि दोनों के हित एक-दूसरे से जुड़े हैं।
बस, इन्‍हीं संबंधों को फायदा उठाकर डॉक्‍टर ने इलाका पुलिस के जरिए ही आगरा में बैठे अधिकारियों तक डॉ. निर्विकल्‍प के अपहरण और फिरौती की बात पहुंचवाई।
सच तो यह है कि मास्‍टरमाइंड डॉक्‍टर को मालूम था कि डॉ. निर्विकल्‍प के अपहरण और लाखों रुपए की फिरौती के बंदरबांट में कुछ पुलिसकर्मी खाली हाथ रह गए हैं इसलिए वह उच्‍च अधिकारियों तक बात पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ने वाले।
बताते हैं कि डॉ. और इन पुलिसकर्मियों को इस बात का भी इल्‍म था कि मथुरा पुलिस के अधिकारियों एवं आगरा में बैठे उच्‍च पुलिस अधिकारियों की बन नहीं रही इसलिए आगरा में बैठे अधिकारी मामले की गंभीरता को समझने में पूरी रुचि लेंगे।
डॉ. निर्विकल्‍प ने किसी को नहीं बताई अपने अपहरण की बात
पुलिस के ही सूत्र बताते हैं कि डॉ. निर्विकल्‍प ने अपने किसी साथी या आईएमए के पदाधिकारी को भी अपने अपहरण की बात नहीं बताई क्‍योंकि वह तो किसी भी तरह इसे भूल जाना चाहते थे। तब भी नहीं जब बदमाशों ने उन्‍हें फिर से फोन करना शुरू कर दिया था।
डॉक्‍टर निर्विकल्‍प यदि इतनी हिम्‍मत कर लेते तो सबसे पहले पुलिस को ही बताते क्‍योंकि उन्‍हें अपहरण कराने वाले अपने साथी डॉक्‍टर तथा पुलिस के बीच की ट्यूनिंग का कुछ पता नहीं था।
आईएमए के किसी पदाधिकारी डॉक्‍टर के माध्‍यम से डॉ. निर्विकल्‍प के अपहरण की बात पुलिस तक पहुंचने की कहानी में इसलिए दम नहीं है क्‍योंकि जब डॉक्‍टर निर्विकल्‍प ही अपने साथ हुई घटना के बारे में पुलिस को नहीं बताना चाहते थे तो उनकी मर्जी के बिना आईएमए का कोई पदाधिकारी पुलिस को उनके साथ हुई घटना की जानकारी क्‍यों देगा।
अगर ये मान भी लिया जाए कि डॉ. निर्विकल्‍प ने दोस्‍ती या निजी संबंधों की खातिर आईएमए के किसी पदाधिकारी को जानकारी दी तो एसोसिएशन का जिम्‍मेदार पदाधिकारी होने के नाते वह पहले यह बात आईएमए के ही प्लेटफार्म पर रखते। फिर आईएमए जो भी निर्णय लेती, सभी के हित में ही लेती।
पहले भी खेल करते रहे हैं मथुरा के कुछ डॉक्‍टर
अपनी जान छुड़ाने को साथी डॉक्‍टरों से चौथ वसूली कराने का मथुरा के कुछ डॉक्‍टर्स का खेल पुराना है।
मशहूर फिजीशियन डॉ. उमेश माहेश्‍वरी के अपहरण का किस्‍सा जिन्‍हें मालूम है, वो भली-भांति जानते हैं कि उसमें मथुरा के दो पुलिस अधिकारी दिल्‍ली में बंद एक कुख्‍यात बदमाश से पूछताछ करने गए थे।
उस बदमाश ने तब स्‍पष्‍ट कहा था कि डॉ. उमेश माहेश्‍वरी के अपहरण से तो उसका कोई लेना-देना नहीं है अलबत्ता वो मथुरा के अन्‍य कई डॉक्‍टर्स से बराबर चौथ वसूली करता रहता है। बाहर होता है तो खुद वसूली करने जाता है, और अंदर होने पर अपने किसी गुर्गे को भेजता है।
उस बदमाश ने मथुरा पुलिस को बाकायदा कैमरे के सामने बताया कि वह कृष्‍णा नगर के एक नर्सिंगहोम संचालक डॉक्‍टर से नियमति तौर पर वसूली करता है।
उसने यह भी बताया कि इस नर्सिंग होम संचालक ने कई बार उसे दूसरे डॉक्‍टर्स को भी निशाना बनवाया है, और खुद मध्‍यस्‍थता करके अच्‍छे पैसे दिलवाए हैं।
इस कुख्‍यात गैंगेस्‍टर ने तब इस बात का भी खुलासा किया था कि कोड वर्ड्स के रूप में वह उधार की रकम चुकाने को कहता है जिससे किसी को कोई शक न हो।
तब उस बदमाश के गैंग ने इस नर्सिंग होम संचालक डॉक्‍टर के माध्‍यम से करीब एक दर्जन डॉक्‍टरों को निशाना बनाया था।
इस बदमाश की हत्‍या हो जाने के बाद कुछ समय के लिए यह सिलसिला थमा किंतु अब लगता है कि उसके गैंग को पुराना घर दिखा दिया गया है।
जहां तक सवाल है डॉ. निर्विकल्‍प के अपहरण और फिरौती के केस को पुलिस द्वारा अपनी ओर से दर्ज कर लेने का, तो उसमें कुछ होता दिखाई नहीं दे रहा।
एफआईआर दर्ज हुए एक सप्‍ताह से ऊपर का समय बीत गया लेकिन पुलिस किसी स्‍थानीय नामजद तक भी नहीं पहुंच सकी है जबकि यही पुलिस पूर्व में मेरठ निवासी एक बदमाश को तत्‍काल उठा लाई थी।
पुलिस ने अब तक किया है तो सिर्फ इतना कि चारों नामजद आरोपियों पर पचास-पचास हजार का ईनाम घोषित कर दिया है।
कल को यदि इनमें से कोई पुलिस के हत्‍थे चढ़ भी जाता है तो कौन गवाही देगा और कहां से सबूत मिलेंगे। थोड़े-बहुत रुपए बरामद दिखाकर किसी को जेल भेजा गया तो उसे जमानत मिलने में कोई असुविधा नहीं होगी।
डॉ. निर्विकल्‍प कुछ बोलने से रहे, क्‍योंकि उन्‍हें कुछ बोलना ही नहीं है। जिन डॉक्‍टर साहब को पुलिस तक बात पहुंचाने का श्रेय दिया जा रहा है, वह बोलने क्‍यों लगे।
पुलिस की इसे खोलने में पहले ही कोई रुचि नहीं है। बदमाश अपना जुर्म कबूल कर लें, यह हो नहीं सकता।
ऐसे में होगा तो केवल इतना कि इस तरह की कहानियां आगे भी दोहराई जाती रहेंगी। कुछ अंतराल के बाद कोई तीसरा डॉक्‍टर बदमाशों का, या यूं कहें कि अपने ही हमपेशा का शिकार बनेगा। और यह सिलसिला तब तक नहीं थमेगा, जब तक खुद डॉक्‍टर आगे आकर इसे रोकने का प्रयास नहीं करते।
जब तक वो अपने बीच मौजूद ऐसे तत्‍वों को चिन्‍हित कर उनके खिलाफ कठोर कदम नहीं उठाते।
आईएमए हो या नर्सिंग होम ऐसोसिएशन, अथवा डॉक्‍टरों की कोई अन्‍य संस्‍था हो, सबको सोचना होगा कि कोई भी संस्‍था मात्र जिंदाबाद-मुर्दाबाद करने के लिए नहीं होती।
उसे खड़ा करने के पीछे जो उद्देश्‍य होते हैं, उनमें ऐसे डॉक्‍टर्स पर भी कार्यवाही करने का मकसद निहित होता है जो किसी भी तरह इस पवित्र पेशे को अपनी आपराधिक प्रवृत्ति से कलंकित करने का काम करते हैं।
– सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी

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