इंश्योरेंस कंपनियों को शक: कोरोना के क्‍लेम में बड़ी गड़बड़ी कर रहे हैं निजी अस्‍पताल

नई दिल्‍ली। एक ओर पूरा देश कोरोना वायरस की गिरफ्त में है, लॉकडाउन लागू है, लेकिन ओर कुछ निजी अस्पतालों के बिल में इंश्योरेंस कंपनियों को बड़ी गड़बड़ी का शक हो रहा है।
इंश्योरेंस इंडस्ट्री के हिसाब से 4 मई तक करीब 1000 कोरोना वायरस मरीजों के क्लेम कंपनियों में पहुंचे हैं, जिनकी कुल राशि 20 करोड़ रुपए तक है।
भले ही इसका औसत 2 लाख रुपए दिख रहा है लेकिन हकीकत में बिल में बड़ा उतार-चढ़ाव दिखाई देता है।
जमा किया जा रहा अस्पतालों का डेटा
एक इंश्योरेंस कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बहुत से क्लेम 2-3 लाख रुपए के हैं, लेकिन कुछ क्लेम ऐसे हैं जो 12 लाख रुपए तक के हैं। इस वजह से अब इंश्योरेंस कंपनियों ने इन अस्पतालों का डेटा जमा करना शुरू कर दिया है ताकि ये समझा जा सके कि आखिर इतना खर्च किन चीजों में हो रहा है। इंश्योरेंस कंपनियों के अनुसार ये सब 25 मार्च से शुरू हुआ है, जब से सरकार ने निजी अस्पतालों को कोरोना के मरीजों का इलाज करने की इजाजत दी है।
खर्चों के पैटर्न की होगी स्टडी
इंडस्ट्री के एक अधिकारी ने कहा है कि वह सारे डेटा लगातार जनरल इंश्योरेंस काउंसिल को भेज रहे हैं। खर्चों के पैटर्न को स्टडी किया जा रहा है और पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कहां दिक्कत है। इससे ये पता चलेगा कि किस वजह से अस्पतालों के खर्चे अचानक से बढ़ जा रहे हैं।
डॉक्टरों का ये है तर्क
हालांकि डॉक्टरों का तर्क है कि कोरोना मरीजों की देखभाल में बहुत सारे मास्क, ग्लव्स और पीपीई सूट इस्तेमाल होते हैं, जिससे भी खर्च बढ़ रहा है। हर 8 घंटे में कम से कम एक बार इन्हें डिस्कार्ड करना जरूरी है। बता दें कि पिछले दिनों एक अस्पताल ने पीपीई सूट का बिल 80 हजार रुपए रखा था, जिसे इंश्योरेंस कंपनी ने देने से मना कर दिया।
-एजेंसियां

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