हीरा कारोबारी सावजी ढोलकिया इस बार फिर चर्चा में

सूरत। पिछले कुछ वर्षों से दिवाली के मौके पर अपने कर्मचारियों को खास तोहफा देकर सुर्खियां बटोरने वाले हीरा कारोबारी और हरि कृष्णा एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन सावजी ढोलकिया इस बार फिर चर्चा में हैं।
इस दिवाली पर भी प्रसिद्ध हरि कृष्णा ग्रुप की तरफ से बोनस के तौर पर 600 कर्मचारियों को कार और 900 कर्मचारियों को एफडी दी जाएगी। गुरुवार को डायमंड किंग सावजी इन कर्मचारियों को सम्मानित करेंगे। वहीं पहली बार इस ग्रुप के चार कर्मचारियों को यह तोहफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों गुरुवार को नई दिल्ली में मिला।
इस बारे में ढोलकिया ने बताया, ‘हमारे लॉयल्टी प्रोग्राम के तहत इस वर्ष 1500 कर्मचारी चयनित हुए हैं। इसमें से 600 कर्मचारियों ने गिफ्ट के रूप में कार पर सहमति दी जबकि 900 कर्मचारियों ने बैंक में एफडी की मांग की। पहली बार हमारे चार कर्मचारी पीएम नरेंद्र मोदी के हाथ से यह गिफ्ट प्राप्त करेंगे। इसमें एक दिव्यांग बेटी भी शामिल है।’
ढोलकिया के मुताबिक नई दिल्ली में ग्रुप के चार कर्मचारियों को सम्मानित करने के बाद पीएम मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उनकी कंपनी के सभी कर्मचारियों को संबोधित भी करेंगे। ढोलकिया ने बताया कि इस वर्ष उनकी कंपनी दिवाली बोनस के बतौर कुल 50 करोड़ रुपये कर्मचारियों पर खर्च कर रही है। यह उस लॉयल्टी प्रोग्राम का हिस्सा है जिसे 2011 में इस कंपनी की तरफ से शुरू किया गया था।
पिछले महीने 3 कर्मचारियों को गिफ्ट में मर्सेडीज बेंज
पिछले महीने ही ढोलकिया ने अपने तीन कर्मचारियों को (जिन्होंने नौकरी के 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं) मर्सेडीज बेंज गिफ्ट की थी कार की चाबियां गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा मध्य प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के हाथों से कर्मचारियों को दिलाई गईं। 1 करोड़ रुपये की कीमत की जीएल फॉर्मेटिक मॉडल वाली कारें इन कर्मचारियों को बतौर सरप्राइज गिफ्ट दी गई थीं।
2011 से हर वर्ष देते हैं अनोखा तोहफा
बता दें कि ढोलकिया 2011 से हर साल कर्मचारियों को इसी तरह के दिवाली बोनस देते रहे हैं। 2015 में उनकी कंपनी ने अपने कर्मचारियों को दिवाली बोनस के तौर पर 491 कार और 200 फ्लैट बांटे थे। 2014 में भी कंपनी ने कर्मचारियों के बीच इन्सेंटिव के तौर पर 50 करोड़ रुपये बांटे थे।
कर्ज लेकर शुरू किया था हीरा कारोबार
सावजी ढोलकिया अमरेली जिले के दुधाला गांव के रहने वाले हैं। अपने चाचा से कर्ज लेकर उन्होंने हीरा कारोबार शुरू किया और अपनी मेहनत से उसे इस मुकाम तक पहुंचाया। अरबपति होने के बावजूद उन्होंने हाल ही में अपने बेटे द्रव्य को पैसे की अहमियत की सीख देने के लिए सिर्फ 7 हजार रुपये के साथ कोची शहर में खुद की दम पर रोजी-रोटी कमाने भेजा था। एमबीए कर चुके बेटे को अपने पैरों पर खड़े होने की कला सीखने के लिए उन्होंने ऐसा किया था।
-एजेंसियां

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