सिख दंगों के लिए सोनिया को साजिशकर्ता के रूप में समन करने की मांग

शिरोमणि अकाली दल ने यूपीए चीफ सोनिया गांधी को सिख दंगों के लिए साजिशकर्ता के रूप में समन करने की मांग की है।
उधर बीजेपी ने भी पूर्व पीएम राजीव गांधी के ‘बरगद बयान’ का जिक्र कर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है।
शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर बादल ने आज कहा कि एसआईटी को सोनिया गांधी को साजिशकर्ता के रूप में समन करना चाहिए। 1984 के दंगों की प्लानिंग उनके निवास पर हुई और उनके पति उस समय सत्ता में थे। कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी चाहिए कि सोनिया गांधी को लाई डिटेक्टर टेस्ट का सामना करने के लिए कहें।’
गौरतलब है कि मंगलवार को दिल्ली की एक अदालत ने 34 साल बाद सिख विरोधी दंगों में एक दोषी को मौत की सजा तथा दूसरे को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद बयानबाजी तेज हुई है।
बुधवार को बीजेपी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कांग्रेस पर सवाल दागे। बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पिछले 25 सालों में इस मामले पर ठीक से सुनवाई नहीं होने दी थी।
बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘पिछले 34 साल में कांग्रेस पार्टी द्वारा योजनाबद्ध और सुनियोजित तरीके से इस बात की पूरी कोशिश की गई कि 1984 के नरसंहार के आरोपियों के खिलाफ कोई प्रमाणिक कार्यवाही न हो। कोर्ट के फैसले से सिख नरसंहार के उस जख्म पर मरहम लगा है। इस मामले में न्याय मिले केंद्र सरकार हर प्रकार से सहयोग करेगी।’ प्रसाद ने पूर्व पीएम राजीव गांधी के एक बयान के आधार पर भी कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘राजीव गांधी ने अपने भाषण में कहा था कि जब बरगद का पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है, कांग्रेस पार्टी ने आज तक उनके इस भाषण से अपने आपको अलग नहीं किया है।’ उन्होंने कहा कि जिनके अपने मारे गए उनको न्याय न मिले, इसकी हर कोशिश की गई। इसका मकसद था अपनों को बचाना। देशभर में सिख विरोधी दंगे हुए। इंसानियत का तकाजा था कि न्याय मिलना चाहिए था।
प्रसाद ने कांग्रेस पर तीन सवालों के जरिए सिलसिलेवार हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘मैं केवल तीन सवाल करना चाहता हूं। पहला, आज जब अदालत का फैसला आया है क्या तब भी कांग्रेस राजीव के बयान को सही मानती है, कि जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है? दूसरा, 1984 दंगों के बाद वीपी सिंह को छोड़ दें तो कांग्रेस लगातार सत्ता में थी, 24-25 साल में सिखों को न्याय दिलाने के लिए उन्होंने क्या कोशिश की है? तीसरा, कमलनाथ को पंजाब का प्रभारी बनाया गया था। उनकी सिख दंगों में कथित भूमिका की काफी चर्चे थे और उन्हें एक सप्ताह के भीतर पंजाब प्रभारी से हटा दिया गया था। कांग्रेस को अगर डर नहीं था तो कमलनाथ को पंजाब पार्टी प्रभारी के पद से क्यों हटाया गया।’
-एजेंसियां

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