को-ऑपरेटिव सोसायटी घोटाले में गजेंद्र शेखावत के खिलाफ कोर्ट ने द‍िए जांच के आदेश

जयपुर। जयपुर कोर्ट ने आज केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता गजेंद्र सिंह शेखावत के खिलाफ शिकायत को एसओजी के पास भेजने के आदेश दिए इसके बाद सवाल उठने लगा है क‍ि जब एक साल से घोटाले की जांच चल रही थी तो शेखावत के खिलाफ जांच के आदेश अब कैसे।

राजस्थान की सियासी उठापटक के बीच केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर जांच का शिकंजा कस रहा है। विधायकों को खरीद-फरोख्त के मामले में एसओजी पहले ही शेखावत को नोटिस जारी कर चुका है। दूसरी तरफ जयपुर के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने मंगलवार को पुलिस से कहा है कि 884 करोड़ के क्रेडिट सोसायटी घोटाले में शेखावत के खिलाफ आरोपों की जांच होनी चाहिए। इस मामले में शेखावत की पत्नी का भी नाम है।

घोटाले में शेखावत का नाम कैसे?
संजीवनी क्रेडिट सोसायटी के निवेशकों की शिकायतों के बाद पिछले साल घोटाले का खुलासा हुआ था। सोसायटी के फाउंडर और एमडी विक्रम सिंह को एसओजी ने गिरफ्तार किया था। शेखावत और विक्रम सिंह प्रॉपर्टी के बिजनेस में पार्टनर रहे थे। हालांकि घोटाला सामने आने से काफी पहले ही दोनों अलग हो गए थे लेकिन शिकायत करने वालों का आरोप है कि संजीवनी क्रेडिट सोसायटी की बड़ी रकम शेखावत और उनके परिवार की कंपनियों में ट्रांसफर की गई।

क्या एफआईआर में शुरुआत से शेखावत का नाम था?
संजीवनी क्रेडिट सोसायटी घोटाले में एसओजी ने 23 अगस्त 2019 को एफआईआर दर्ज की थी। शेखावत का नाम चार्जशीट में नहीं था। बाद में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने भी शेखावत का नाम चार्जशीट में जोड़ने की अर्जी खारिज कर दी। उसके बाद याचिका लगाने वाला एडिशनल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट पहुंचा था।

घोटाला कैसे हुआ था?
सोसायटी ने राजस्थान में 211 और गुजरात में 26 शाखाओं के जरिए बड़े मुनाफे का लालच देकर करीब 1,46,991 निवेशकों से रकम जुटाई। एसओजी की जांच में पता चला कि सोसायटी के खाते में फर्जीवाड़ा कर 55,000 लोगों को करीब 1,100 करोड़ रुपए के कर्ज देना दिखा दिया।

यह घटनाक्रम कांग्रेस के इन आरोपों के बीच सामने आया है कि अशोक गहलोत की सरकार को गिराने में शेखावत शामिल हैं। विशेष ऑपरेशंस समूह (एसओजी) ने उन ऑडियो क्लिप्स की जांच के संबंध में मंत्री को पहले ही नोटिस भेज रखा है जिसमें कथित तौर पर कांग्रेस के विधायकों को लालच देने की कोशिशों के संकेत मिले हैं।

अतिरिक्त जिला न्यायाधीश पवन कुमार ने मंगलवार को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत को बीजेपी नेता के खिलाफ शिकायत को एसओजी के पास भेजने के आदेश दिए।

एसओजी की जयपुर ईकाई पिछले साल से इस घोटाले की जांच कर रही है, इस संबंध में प्राथमिकी 23 अगस्त 2019 को दर्ज की गई थी। एसओजी ने मामले के संबंध में दाखिल आरोपपत्र में शेखावत का जिक्र नहीं किया, बाद में एक मजिस्ट्रेट अदालत ने आरोपपत्र में उनका नाम शामिल करने की एक अर्जी भी खारिज़ कर दी।

इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत का रुख किया। मजिस्ट्रेट अदालत में दी अर्जी में शिकायतकर्ता गुलाम सिंह और लब्बू सिंह ने दावा किया कि प्राथमिकी में धन के जिस लेनदेन का जिक्र है वह मंत्री की कंपनियों से जुड़ा है।

बाड़मेर के दोनों निवासियों ने आरोप लगाया कि लेकिन एसओजी ने मंत्री या कंपनियों की भूमिका की जांच नहीं की। शिकायकर्ताओं ने आरोप लगाया कि एसओजी ने जानबूझकर मंत्री और कुछ अन्य को बचाया जिनका आरोपपत्र में जिक्र नहीं किया गया।

– एजेंसी

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