देश को आंदोलनकारियों और आंदोलनजीवियों के बारे में फर्क समझना होगा: प्रधानमंत्री

नई दिल्ली। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जब लोकसभा में बोलने के लिए खड़े हुए तो उन्होंने किसान आंदोलन की भी चर्चा की। पीएम ने कहा कि किसान अफवाहों का शिकार हुए हैं तो विपक्ष खासतौर से कांग्रेस के सदस्यों ने काफी हंगामा किया। बाद में पीएम ने कहा कि किसानों के पवित्र आंदोलन को बर्बाद करने का काम आंदोलनकारियों ने नहीं, आंदोलनजीवियों ने किया है इसलिए देश को आंदोलनकारियों और आंदोलनजीवियों के बारे में फर्क करना बहुत जरूरी है। उन्होंने किसानों से कहा कि आइए टेबल पर बैठकर बात कीजिए।
मोदी का कांग्रेस पर तंज, ब्लैक और व्हाइट पर चर्चा की लेकिन…
पीएम ने कहा कि इस कोरोना काल में 3 कृषि कानून लाए गए। ये सुधार आवश्यक हैं। बरसों से हमारा कृषि क्षेत्र चुनौतियां महसूस कर रहा था, उससे निपटने के लिए हमने प्रयास किए हैं। यहां कांग्रेस के साथियों ने कानून के कलर पर काफी चर्चा की कि ब्लैक है कि व्हाइट है। अच्छा होता उसके कंटेंट पर चर्चा करते, अच्छा होता उसके इंटेंट पर चर्चा करते ताकि देश के किसानों तक सही चीज पहुंचती।
उन्होंने कांग्रेस सांसद अधीर रंजन की ओर इशारा करते हुए कहा कि दादा ने भी भाषण दिया लेकिन वह ज्यादातर समय इसकी बात करते रहे कि पीएम और उनके साथी बंगाल में यात्रा क्यों कर रहे हैं, कहां जा रहे हैं… दादा, इस बार आपके ज्ञान से वंचित रह गए। खैर, चुनाव के बाद आपके पास मौका होगा तो…. (इस पर सत्तापक्ष के लोग हंसने लगे)।
किसान अफवाहों का शिकार हुए
मोदी ने आगे कहा कि जहां तक आंदोलन का सवाल है, दिल्ली के बाहर हमारे किसान भाई-बहन बैठे हैं, जो भी गलत धारणाएं बनाई गई हैं, जो अफवाहें फैलाई गई हैं, उसका शिकार हुए हैं। इस पर अधीर रंजन ने विरोध किया। पीएम ने आगे कहा कि आंदोलन कर रहे सभी किसान साथियों की भावनाओं का सदन और सरकार भी आदर करती है और करती रहेगी इसीलिए सरकार के वरिष्ठ मंत्री पंजाब में और बाद में आंदोलन बढ़ने पर भी सम्मान भाव के साथ बातचीत कर रहे हैं।
मोदी ने कहा कि लगातार बातचीत होती रही है। किसानों की शंकाएं ढूंढने का प्रयास किया गया। तोमर जी ने विस्तार से बताया है। हम मानते हैं कि अगर इसमें कोई कमी हो, सचमुच में किसान का नुकसान हो रहा तो सुधार करने में क्या जाता है। हम अभी भी इंतजार करते हैं कि अगर वह कुछ बताते हैं तो हमें कोई दिक्कत नहीं है।
कानून लागू होने के बाद न मंडी बंद, न MSP
उन्होंने कहा कि अध्यादेश के जरिए तीनों कानून लागू हुए, बाद में संसद में पारित हुए। कानून लागू होने के बाद न देश में कोई मंडी बंद हुई है, न कहीं एमएसपी बंद हुआ है। यह सच्चाई है, जिसको हम छिपाकर बातें करते हैं। MSP पर खरीदी और बढ़ी है।
पीएम ने कहा कि ये हो हल्ला, ये आवाज, ये रुकावटें डालने का प्रयास सोची समझी रणनीति के तहत है। वह यह है कि जो झूठ फैलाया है, जो अफवाहें फैलाई हैं, उसका पर्दाफाश हो जाएगा तो सत्य वहां पहुंच जाएगा तो उनका टिकना भारी हो जाएगा। जैसा बाहर करते हैं, वैसा अंदर भी करो लेकिन इससे आप लोगों का विश्वास नहीं जीत पाओगे।
मोदी ने कहा कि कानून बनने के बाद मैं किसी भी किसान से पूछना चाहता हूं कि पहले जो व्यवस्थाएं थीं, क्या कुछ भी छीना गया क्या है। वो भी अनिवार्य नहीं है। आपकी मर्जी हो जाइए, वहां जाइए, जहां ज्यादा फायदा होता हो किसान का, वहां चले जाइए।
अधीर जी, अब ज्यादा हो रहा है
हंगामा बढ़ता देख पीएम ने गुस्से में कहा कि अधीर रंजन जी अब ज्यादा हो रहा है। टीएमसी से ज्यादा पब्लिसिटी बंगाल में आपको मिल जाएगी। अधीर रंजन जी अच्छा नहीं लगता है…. आप ऐसा नहीं करते थे। हद से ज्यादा क्यों कर रहे हो। ये नए कानून किसी के लिए भी बंधनकर्ता नहीं हैं। जहां विकल्प है तो विरोध का कारण ही नहीं बनता है। मैं देख रहा हूं आंदोलन का नया तरीका बना है, आंदोलनकारी ऐसे तरीके नहीं अपनाते हैं, आंदोलनजीवी ऐसे तरीके अपनाते हैं। पिछले कई सालों से एकदम से तूफान खड़ा किया जाता है। जो भी अहिंसा और लोकतंत्र में विश्वास करते हैं उन्हें इसकी चिंता करनी चाहिए।
पुरानी मंडियों पर भी कोई पाबंदी नहीं है। इस बजट में मंडियों को आधुनिक बनाने के लिए और बजट की व्यवस्था की गई है। कांग्रेस सांसद खासतौर से अधीर रंजन चौधरी लगातार विरोध करते रहे। पीएम ने कई बार उन्हें टोंका। कुछ देर बाद कांग्रेस के सदस्यों ने वॉकआउट कर दिया।
सिगरेट पहुंचाने वाली नौकरी का किस्सा
कृषि कानूनों में बदलाव की जरूरत समझाने के लिए पीएम मोदी ने आज लोकसभा में 40-50 साल पुरानी घटना सुनाई। उन्होंने कहा कि मैंने किसी से सुना था, तारीख इधर-उधर हो सकती है। 60 के दशक में तमिलनाडु में राज्य के कर्मचारियों की तनख्वाह बढ़ाने के लिए कमीशन बैठा था। उस कमेटी के चेयरमैन के पास एक लिफाफा आया, जिस पर टॉप सीक्रेट लिखा था।
उन्होंने देखा तो उसमें एक अर्जी थी, जिसमें लिखा था- मैं बहुत सालों से सिस्टम में ईमानदारी से काम कर रहा हूं लेकिन वेतन नहीं बढ़ रहा है इसे बढ़ाया जाए। चेयरमैन ने लिखा कि आप कौन हो, पद क्या है। जवाब मिला कि मैं सरकार में मुख्य सचिव के कार्यालय में CCA के पद पर बैठा हूं। इनको पता नहीं था कि ये क्या होता है। लिखा कि मुझे तो पता ही नहीं है ये कौन सा पद होता है।
कर्मचारी ने लिखा कि मैं बंधा हुआ हूं, 1975 के बाद ही मैं इसके बारे में जिक्र कर सकता हूं। चेयरमैन ने लिखा कि तो 1975 के बाद के कमीशन में जाना तो फिर उस कर्मचारी ने चिट्ठी लिखकर बताया कि मैं CCA के पद पर काम कर रहा हूं और इसका मतलब होता है चर्चिल सिगार असिस्टेंट।
यह पद क्या है? इसके जवाब में कर्मचारी ने बताया कि 1948 में जब चर्चिल ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने थे तो त्रिची से उनके लिए सिगार जाती थी। CCA का काम था कि उनको सिगार अच्छे से पहुंची कि नहीं, इसकी चिंता करना। 1945 में वह चुनाव हार गए पर पद बना रहा और सप्लाई जारी रही। देश आजाद हो गया फिर भी पद जारी रहा। चर्चिल को सिगरेट पहुंचाने की जिम्मेदारी वाला पद मुख्य सचिव के कार्यालय में चल रहा था। उसने प्रमोशन और तनख्वाह के लिए चिट्ठी लिखी। अगर हम बदलाव नहीं करेंगे तो कैसे चलेगा, इससे बड़ा क्या उदाहरण हो सकता है।
कोरोना काल, भगवान, लोकतंत्र… पढ़िए मोदी ने क्या-क्या कहा
इससे पहले पीएम ने कहा कि राष्ट्रपति जी का भाषण भारत के 130 करोड़ नागरिकों के संकल्प शक्ति का परिचायक है। विकट और विपरीत काल में भी यह देश किस प्रकार से अपना रास्ता चुनता है, रास्ता तय करता है और रास्ते पर एचीव करता हुआ आगे बढ़ता है, ये सारी बातें राष्ट्रपति जी ने अभिभाषण में कही हैं। उनका एक एक शब्द देशवासियों में एक नया विश्वास पैदा करने वाला है और हर किसी के दिल में देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा जगाने वाला है। हम उनका जितना आभार व्यक्त करें उतना कम है। इस सदन में भी 15 घंटे से ज्यादा चर्चा हुई है। रात को 12 बजे तक हमारे सभी सांसदों ने इस चेतना को जगाए रखा और चर्चा को जीवंत बनाया है। इस चर्चा में भाग लेने वाले मैं सभी सदस्यों का मैं आभार व्यक्त करता हूं।
मैं विशेष रूप में हमारी महिला सांसदों का आभार व्यक्त करना चाहता हूं क्योंकि इस चर्चा में उनकी भागीदारी भी ज्यादा थी विचारों की धार भी थी, रिसर्च करके बातें रखने का उनका प्रयास था और उन्होंने चर्चा को समृद्ध किया है।
भारत आजादी के 75वें वर्ष में एक प्रकार से दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं। यह पड़ाव हर हिंदुस्तानी के लिए गर्व का है और आगे बढ़ने का पर्व है इसलिए समाज व्यवस्था में हम कहीं पर भी हों, देश के किसी भी कोने में हों, सामाजिक आर्थिक व्यवस्था में स्थान कहीं पर हो लेकिन हम सभी को मिलकर इस पर्व से नई प्रेरणा और संकल्प लेकर 2047 जब देश आजादी के 100 साल मनाएगा तो हम अगले 25 साल में देश को कहां ले जाएंगे। दुनिया में हम अपने देश को कहां ले जाएंगे, यह संकल्प शक्ति बनाने का काम इस पंचायत का है।
देश जब आजाद हुआ तो आखिरी ब्रिटिश कमांडर थे, वह यहां से गए तो यही कहते रहते थे कि भारत कई देशों का महाद्वीप है और कोई भी इसे एक राष्ट्र कभी नहीं बना पाएगा। कुछ लोग ये कहते थे कि भारत में लोकतंत्र चमत्कार ही होगा, ये भ्रम भी हमने तोड़ा है। लोकतंत्र हमारी रगों और सांस में बुना हुआ है, हमारी हर सोच, हर पहल, हर प्रयास लोकतंत्र की भावना से भरा हुआ रहता है।
जिनके मन में शक थे उसे समाप्त कर दिया। हमारी संस्कृति और एकता ही है कि हम विश्व के सामने एक राष्ट्र के रूप में खड़े हैं और विश्व के लिए एक आशा की किरण लेकर खड़े हैं।
अनेक सत्ता परिवर्तन आए, बड़ी आसानी से आए। परिवर्तित सत्ता परिवर्तन को भी सबने स्वीकार करके आगे बढ़ाया। 75 साल का यह क्रम रहा है। हम विविधताओं से भरे देश हैं। सैकड़ों भाषाएं, भांति-भांति का पहनावा है उसके बाद भी हमने एक लक्ष्य एक राह करके दिखाया है।
स्वामी विवेकानंद कहते थे कि हर राष्ट्र के पास एक संदेश होता है, जो उसे पहुंचाना होता है। हर राष्ट्र का एक मिशन होता है, जो उसे हासिल करना होता है। एक नियति होती है, जिसको वह प्राप्त होता है। कोरोना के दरम्यान भारत ने जिस प्रकार से अपने आप को संभाला और दुनिया को संभलने में मदद की। जिन भावनाओं, संस्कारों को लेकर वेद से विवेकानंद तक हम पले बढ़े हैं- वह है सर्वे भवन्तु सुखिन:…. कोरोना काल में भारत ने इसको करके दिखाया है। भारत ने आत्मनिर्भर भारत के रूप में जिस प्रकार से कदम उठाए हैं सबने उठाए हैं।
विश्व युद्ध के पहले जो शक्ति देशों के बात थी, बाद में यूएन के बनने के बाद ताकत और सैन्य शक्ति बढ़ने लगीं। कोरोना के बाद भी दुनिया में संबंधों का नया ऑर्डर जन्म लेगा। नया वर्ल्ड ऑर्डर बनना ही है, लेकिन दुनिया ने जिस प्रकार से संकट को झेला है। दुनिया मजबूर हुई है, भारत दुनिया से कटकर नहीं रह सकता। हमें भी मजबूत प्लेयर के रूप में उभरना होगा। हम केवल जनसंख्या के आधार पर अपनी मजबूती का दावा नहीं कर पाएंगे। नए वर्ल्ड ऑर्डर में भारत को सशक्त होना पड़ेगा और उसका रास्ता है आत्मनिर्भर भारत।
आज फार्मेसी में हम आत्मनिर्भर हैं, सबके कल्याण के लिए बड़ी भूमिका अदा कर रहा है। हमारे लिए आवश्यक है कि हम आत्मनिर्भर भारत के विचार को बल दें। ये किसी शासन व्यवस्था या किसी राजनेता का विचार नहीं है। आज हिंदुस्तान के हर कोने में वोकल फ़ॉर लोकल सुनाई दे रहा है। ये आत्मगौरव का भाव आत्मनिर्भर भारत के लिए बहुत काम आ रहा है।
पीएम ने कहा कि हमारे लिए गर्व का विषय है, भारत में भी भय का वातावरण पैदा करने के प्रयास हुए थे, विश्वास से कोई कुछ कर और कह नहीं सकता लेकिन इतनी कम व्यवस्थाओं वाला देश तो दुनिया में शक होना स्वाभाविक था। लेकिन 130 करोड़ देशवासियों के समर्पण ने हमें बचाकर रखा है। इसका गौरव गान हमें करना चाहिए। भारत की पहचान बनाने के लिए भी यह अवसर है।
लोकसभा में मोदी ने कहा कि यह भगवान की कृपा है कि दुनिया हिल गई और हम बच गए क्योंकि वो नर्स और डॉक्टर भगवान का रूप बनकर आए थे। वे अपने बच्चों को शाम को लौटूंगा कहकर जाते थे लेकिन 15 दिन तक नहीं आते थे। हम कोरोना से जीत पाए क्योंकि जिस मरीज के पास कोई नहीं जाता था, हमारा सफाई कर्मचारी उसके पास जाता था। ऐंबुलेंस चलाने वाला ड्राइवर पढ़ा लिखा नहीं था, उसे पता था कि मैं जिसे लेकर जा रहा हूं वह कोरोना पॉजिटिव है। इसलिए भगवान का रूप ही था जिसने हमें बचाया है।
कई कारणों से जिन लोगों के भीतर निराशा फैल हो चुकी है, उनको भी मैं कहता हूं कि कुछ पल के लिए 130 करोड़ देशवासियों के पराक्रम को याद कीजिए आपके अंदर भी ऊर्जा आ जाएगी।
पीएम ने कहा कि देश में इस कोरोना काल में भी करीब 75 करोड़ से अधिक भारतीयों को 8 महीने तक राशन पहुंचाया। जन धन, आधार और मोबाइल के द्वारा 2 लाख करोड़ रुपया इस कालखंड में लोगों तक पहुंचा दिया और दुर्भाग्य देखिए जो आधार, जो मोबाइल, जनधन अकाउंट इतना गरीब के काम आया। कभी सोचता हूं कि कौन लोग आधार को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे थे।
मोदी ने कहा कि ठेले, रेहड़ी वालों को इस काल में पैसे मिले। हमारी अर्थव्यवस्था में हमने रिफॉर्म का सिलसिला जारी रखा। आज ट्रैक्टर हो, गाड़ियों का रिकॉर्ड सेल हो रहा है। जीएसटी का कलेक्शन रिकॉर्ड हो रहा है। दिख रहा है कि नए जोश के साथ भारत की इकॉनमी उभर रही है। दुनिया के विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि दो डिजिट वाला ग्रोथ अवश्य होगा।
-एजेंसियां

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